अगर आप एंड्रॉयड स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं और अपने फोन का डेटा गूगल अकाउंट पर बैकअप के रूप में सेव रखते हैं, तो आने वाले समय में आपके फ्री क्लाउड स्टोरेज की खपत पहले से ज्यादा हो सकती है। गूगल ने अपनी बैकअप स्टोरेज पॉलिसी में बदलाव किया है, जिसके तहत अब फोन का बैकअप भी उसी 15GB फ्री स्टोरेज लिमिट में शामिल किया जाएगा, जिसमें पहले से जीमेल, गूगल ड्राइव और गूगल फोटोज का डेटा स्टोर होता है।
कंपनी का कहना है कि यह बदलाव चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सबसे पहले इसका असर नए एंड्रॉयड यूजर्स पर दिखाई देगा, जबकि पुराने यूजर्स के अकाउंट में इसे अगले कुछ महीनों के दौरान धीरे-धीरे रोलआउट किया जाएगा। यानी जिन लोगों के फोन में अभी पुरानी व्यवस्था लागू है, उन्हें भी जल्द नई पॉलिसी का हिस्सा बनना होगा।
अब केवल फोटो-वीडियो ही नहीं, बैकअप डेटा भी होगा शामिल
अब तक अधिकतर यूजर्स का मानना था कि उनके गूगल अकाउंट की फ्री स्टोरेज में मुख्य रूप से गूगल फोटोज पर अपलोड की गई तस्वीरें, वीडियो, जीमेल के ईमेल और गूगल ड्राइव की फाइलें ही जगह घेरती हैं। लेकिन नए नियम के बाद फोन का बैकअप डेटा भी इसी लिमिट में जोड़ा जाएगा।
इसका मतलब है कि कॉल हिस्ट्री, SMS, MMS, डिवाइस सेटिंग्स, इंस्टॉल किए गए ऐप्स का बैकअप और अन्य जरूरी सिस्टम डेटा भी 15GB फ्री स्टोरेज का हिस्सा माना जाएगा। ऐसे में जिन यूजर्स के अकाउंट में पहले से काफी फोटो और वीडियो सेव हैं, उनके लिए स्टोरेज जल्दी भरने की संभावना बढ़ सकती है।
रोलआउट होगा धीरे-धीरे
गूगल ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव एक साथ सभी यूजर्स पर लागू नहीं होगा। नए एंड्रॉयड डिवाइस या नए गूगल अकाउंट इस्तेमाल करने वाले यूजर्स सबसे पहले नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे। इसके बाद पुराने यूजर्स के लिए भी इसे चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा।
इसलिए यदि अभी आपके अकाउंट में बैकअप स्टोरेज अलग दिखाई दे रही है, तो आने वाले समय में यह बदल सकती है और आपके कुल क्लाउड स्टोरेज उपयोग में इसका असर दिखने लगेगा।
स्टोरेज खत्म होने पर खरीदना पड़ सकता है अतिरिक्त स्पेस
अगर आपके गूगल अकाउंट की 15GB फ्री लिमिट पूरी हो जाती है, तो नया डेटा सेव करने में परेशानी आ सकती है। ऐसे में अतिरिक्त स्टोरेज खरीदने का विकल्प उपलब्ध रहेगा।
भारत में गूगल वन (Google One) की शुरुआती सदस्यता ₹59 प्रति माह से शुरू होती है। इस प्लान में 30GB क्लाउड स्टोरेज मिलती है। इसके अलावा कंपनी 100GB, 200GB, 2TB और उससे अधिक क्षमता वाले प्लान भी उपलब्ध कराती है। हाल के समय में कुछ AI आधारित सब्सक्रिप्शन के साथ भी अतिरिक्त स्टोरेज ऑफर की जा रही है, जिससे यूजर्स अपनी जरूरत के अनुसार प्लान चुन सकते हैं।
पहले भी स्टोरेज पॉलिसी में बदलाव कर चुका है गूगल
यह पहली बार नहीं है जब कंपनी ने अपनी स्टोरेज नीति में बदलाव किया हो। इससे पहले भी गूगल ने कुछ नए अकाउंट्स पर परीक्षण के तौर पर फ्री स्टोरेज सीमा को 15GB से घटाकर 5GB करने की प्रक्रिया शुरू की थी, खासकर उन यूजर्स के लिए जिन्होंने अपने अकाउंट से मोबाइल नंबर लिंक नहीं किया था।
हालांकि यह बदलाव सीमित स्तर पर था, लेकिन इससे यह संकेत जरूर मिला कि कंपनी समय-समय पर अपनी क्लाउड स्टोरेज पॉलिसी में संशोधन करती रहती है।
यूजर्स को मिलेगा बैकअप पर ज्यादा कंट्रोल
नई व्यवस्था के साथ गूगल बैकअप सेटिंग्स में कुछ अतिरिक्त विकल्प भी जोड़ रहा है, ताकि यूजर्स तय कर सकें कि कौन-सा डेटा क्लाउड पर सेव करना है और कौन-सा नहीं।
अब तक केवल ऐप आधारित बैकअप कंट्रोल उपलब्ध थे, लेकिन अब SMS, MMS, कॉल हिस्ट्री और डिवाइस सेटिंग्स के लिए अलग-अलग ऑन-ऑफ टॉगल दिए जाएंगे। इससे यूजर जरूरत के अनुसार किसी खास कैटेगरी का बैकअप बंद कर सकेगा और स्टोरेज बचा पाएगा।
इन विकल्पों का इस्तेमाल करने के लिए फोन की सेटिंग्स में जाकर Google Backup सेक्शन खोलना होगा, जहां अलग-अलग प्रकार के बैकअप को नियंत्रित किया जा सकेगा।
कंपनी का दावा- ज्यादा असर नहीं पड़ेगा
हालांकि कई यूजर्स को चिंता है कि नई नीति के कारण उनकी फ्री स्टोरेज बहुत जल्दी भर जाएगी, लेकिन गूगल का दावा इससे अलग है।
कंपनी के एक प्रवक्ता के अनुसार, औसतन किसी यूजर के अकाउंट में इस बदलाव की वजह से केवल लगभग 40MB अतिरिक्त डेटा ही जुड़ने की संभावना है। कंपनी का कहना है कि बैकअप डेटा आमतौर पर बहुत बड़ा नहीं होता, इसलिए अधिकांश लोगों को स्टोरेज पर बड़ा असर महसूस नहीं होगा।
गूगल के मुताबिक इस बदलाव का उद्देश्य केवल सभी प्रकार के एंड्रॉयड बैकअप को एक समान तरीके से स्टोरेज में शामिल करना है, ताकि यूजर्स को स्पष्ट जानकारी मिल सके कि उनके अकाउंट में कौन-कौन सा डेटा जगह ले रहा है।
किन यूजर्स पर पड़ सकता है ज्यादा असर?
जिन लोगों के गूगल अकाउंट में पहले से हजारों फोटो, लंबे वीडियो, बड़े डॉक्यूमेंट और कई वर्षों का ईमेल डेटा मौजूद है, उनके लिए यह बदलाव ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे अकाउंट पहले ही 15GB की सीमा के करीब होते हैं। अब यदि बैकअप डेटा भी उसी सीमा में जुड़ जाएगा तो स्टोरेज जल्दी समाप्त हो सकती है।
इसके विपरीत जिन यूजर्स का क्लाउड स्टोरेज उपयोग कम है, उन्हें शायद इस बदलाव का तुरंत कोई बड़ा असर महसूस न हो।
क्लाउड स्टोरेज क्या होती है?
क्लाउड स्टोरेज इंटरनेट पर उपलब्ध एक डिजिटल स्टोरेज सेवा होती है, जहां आपकी फाइलें, फोटो, वीडियो और अन्य डेटा कंपनी के सुरक्षित सर्वर पर सेव रहते हैं। इससे किसी भी डिवाइस पर उसी गूगल अकाउंट से लॉगिन करके डेटा एक्सेस किया जा सकता है। फोन खराब होने या बदलने की स्थिति में भी जरूरी फाइलें सुरक्षित रहती हैं।
बैकअप डेटा किसे कहा जाता है?
बैकअप डेटा वह जानकारी होती है जिसे फोन अपने महत्वपूर्ण रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए क्लाउड पर स्टोर करता है। इसमें कॉल हिस्ट्री, SMS, MMS, डिवाइस सेटिंग्स, कुछ ऐप्स का डेटा, वाई-फाई पासवर्ड और अन्य जरूरी सिस्टम जानकारी शामिल हो सकती है। नया फोन लेने या पुराना फोन खो जाने पर यही बैकअप डेटा नए डिवाइस में जानकारी वापस लाने में मदद करता है।
क्या करना चाहिए यूजर्स को?
अगर आप नहीं चाहते कि आपका क्लाउड स्टोरेज जल्दी भर जाए, तो समय-समय पर गूगल अकाउंट का स्टोरेज चेक करना उपयोगी रहेगा। अनावश्यक फोटो, वीडियो और बड़ी फाइलें हटाने के अलावा जरूरत न होने पर कुछ बैकअप विकल्प बंद भी किए जा सकते हैं। वहीं जिन यूजर्स को नियमित रूप से अधिक स्टोरेज की जरूरत रहती है, वे अपनी आवश्यकता के अनुसार गूगल वन या अन्य उपलब्ध पेड प्लान का विकल्प चुन सकते हैं। नई पॉलिसी लागू होने के बाद स्टोरेज उपयोग पर नजर रखना पहले की तुलना में अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा।