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अरुणाचल की सीमा पर चीन की गतिविधियों को लेकर सियासी घमासान, कांग्रेस के दावों और सेना के बयान में सामने आया अंतर

अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में चीनी सैनिकों की कथित गतिविधियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिरम ने आरोप लगाया है कि चीन के सैनिक भारतीय सीमा के भीतर 40 से 50 किलोमीटर तक प्रवेश कर चुके हैं। उनके मुताबिक, अपर सुबनसिरी जिले के कुछ इलाकों में भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने होने की जानकारी मिली है। कांग्रेस नेता ने सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

हालांकि, दूसरी तरफ भारतीय सेना ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उस वीडियो को फर्जी बताया है, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के कुछ इलाकों पर चीन के कब्जे का दावा किया जा रहा था। सेना का कहना है कि वायरल वीडियो वास्तविक घटनाक्रम का प्रमाण नहीं है, बल्कि अक्टूबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के फुटेज के साथ छेड़छाड़ करके तैयार किया गया है।

इस मामले में अब दो अलग-अलग पहलू सामने आए हैं। कांग्रेस जहां सीमावर्ती इलाकों से मिली कथित शिकायतों के आधार पर सवाल उठा रही है, वहीं सेना ने वायरल वीडियो की सामग्री को भ्रामक करार दिया है। ऐसे में सीमा पर वास्तविक स्थिति को लेकर उठे सवालों और सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा कर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जुटाई जानकारी

अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिरम के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने अगस्त में राज्य के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। यह दौरा 26 से 29 अगस्त के बीच आयोजित किया गया। प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्य के पूर्व गृह मंत्री तांगा बयालिंग के अलावा अपर सुबनसिरी क्षेत्र के सांसद जारोडुम क्री भी शामिल थे।

दौरे के दौरान कांग्रेस नेताओं ने राजधानी ईटानगर से अपनी यात्रा शुरू की और नाचो के रास्ते लाइमकिंग तथा तक्षिंग तक पहुंचे। इन क्षेत्रों में पहुंचकर प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने स्थानीय निवासियों से बातचीत की और सीमा के आसपास उनकी गतिविधियों तथा रोजमर्रा की परेशानियों के बारे में जानकारी हासिल की।

दौरे के बाद सिरम ने दावा किया कि स्थानीय लोगों ने उन्हें सीमावर्ती क्षेत्रों में बदलती परिस्थितियों के बारे में बताया है। उनके अनुसार, कुछ ऐसे स्थानों पर जाना अब पहले की तुलना में मुश्किल हो गया है, जहां ग्रामीण परंपरागत रूप से याक चराने, जंगलों से जरूरी संसाधन जुटाने और शिकार जैसी गतिविधियों के लिए जाते रहे हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि स्थानीय लोगों की इन शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने सीमा पर चीनी सैनिकों की कथित गतिविधियों और ग्रामीणों की आवाजाही से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कराने की जरूरत बताई।

हालांकि, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की ओर से लगाए गए आरोप अपने आप में चीनी सैनिकों की कथित मौजूदगी या सीमा के भीतर उनकी गतिविधियों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करते। इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित तथ्यों की आधिकारिक जांच महत्वपूर्ण होगी।

40 से 50 किलोमीटर तक अंदर आने का कांग्रेस नेता ने किया दावा

बोसिराम सिरम ने आरोप लगाया कि चीन के सैनिक अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में भारतीय सीमा के भीतर लगभग 40 से 50 किलोमीटर तक आ गए हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के आमने-सामने होने की जानकारी सामने आई है।

कांग्रेस नेता के अनुसार, यदि सीमा पर ऐसी स्थिति बनी हुई है, तो इसका असर केवल सुरक्षा व्यवस्था पर ही नहीं, बल्कि स्थानीय नागरिकों की सामान्य गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने दावा किया कि सीमा के आसपास रहने वाले लोगों को उन इलाकों तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका इस्तेमाल वे लंबे समय से करते आए हैं।

सिरम ने स्थानीय लोगों से प्राप्त जानकारी का हवाला देते हुए जुलाई के अंतिम सप्ताह में सैनिकों के बीच हाथापाई और लाठियां चलने की घटनाएं होने का भी दावा किया। हालांकि, इन घटनाओं को लेकर प्रस्तुत जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों से मिलने वाली शिकायतों की अनदेखी करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को मौके की स्थिति का आकलन करना चाहिए। उनका तर्क है कि सीमा पर रहने वाले लोगों को क्षेत्र की परिस्थितियों का प्रत्यक्ष अनुभव होता है, इसलिए उनकी बातों को केवल अफवाह मानकर खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

इस पूरे मामले में यह अंतर ध्यान रखना जरूरी है कि सीमा पर चीनी सैनिकों के प्रवेश, सैनिकों के बीच कथित झड़प और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित होने संबंधी बातें कांग्रेस नेता के आरोप हैं। इन्हें स्थापित तथ्य मानने से पहले आधिकारिक जानकारी और स्वतंत्र पुष्टि की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व के बयानों पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

सीमा की स्थिति को लेकर बोसिराम सिरम ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार के रुख पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब स्थानीय लोगों की ओर से गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं, तो उनकी जांच कराए बिना उन्हें गलत या निराधार बताना उचित नहीं है।

सिरम ने राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और केंद्रीय रक्षा मंत्री के उन बयानों पर आपत्ति जताई, जिनमें घुसपैठ संबंधी दावों को खारिज किया गया था। कांग्रेस नेता के मुताबिक, सरकार को स्थानीय निवासियों की बात सुननी चाहिए और यह पता लगाना चाहिए कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तव में क्या परिस्थितियां हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। कांग्रेस की मांग है कि सीमा पर सैनिकों की गतिविधियों, स्थानीय लोगों की पहुंच और सुरक्षा से संबंधित शिकायतों का तथ्यात्मक आकलन किया जाए, ताकि किसी भी तरह की आशंका को दूर किया जा सके।

इस मुद्दे पर कांग्रेस ने संवैधानिक स्तर पर भी अपनी बात रखने की कोशिश की। सिरम के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात के लिए समय मांगा था। पार्टी का उद्देश्य उन्हें अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों से संबंधित जानकारी देना था। हालांकि, सिरम ने दावा किया कि प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात की अनुमति नहीं मिली।

कांग्रेस नेता का कहना है कि सीमा से जुड़ा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इसलिए इस पर राजनीतिक बयानबाजी से आगे बढ़कर तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।

सीमावर्ती सैनिकों की सुविधाओं को लेकर भी जताई चिंता

बोसिराम सिरम ने सीमा पर तैनात सैनिकों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी कुछ दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि दूरदराज के सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट कनेक्टिविटी की कमी के कारण सैनिकों को अपने परिवारों से संपर्क करने में परेशानी हो सकती है।

इसके अलावा, उन्होंने भोजन और अन्य जरूरी सामान की आपूर्ति में दिक्कतों का भी आरोप लगाया। उनके मुताबिक, ऐसे क्षेत्रों में तैनात जवानों तक आवश्यक सुविधाएं पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

कांग्रेस नेता ने इन समस्याओं का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों से स्थिति का जायजा लेने की मांग की। हालांकि, सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने और आपूर्ति व्यवस्था में कमी के दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं, संचार व्यवस्था और रसद आपूर्ति से संबंधित मुद्दे सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से अहम होते हैं। लेकिन किसी खास क्षेत्र में इन सुविधाओं की वास्तविक स्थिति निर्धारित करने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित एजेंसियों की जानकारी जरूरी है।

वायरल वीडियो को लेकर सेना ने क्या सफाई दी?

कांग्रेस के आरोपों के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी प्रसारित हुआ, जिसमें अरुणाचल प्रदेश के कुछ क्षेत्रों पर चीन के कब्जे का दावा किया गया था। वीडियो में लेफ्टिनेंट जनरल गिरीश कालिया के नाम का उल्लेख करते हुए कहा जा रहा था कि चीन ने असाफिला, लॉन्गजू और तक्षिंग सर्किल के इलाकों पर कब्जा कर लिया है।

वीडियो में यह दावा भी किया गया कि भारतीय सैनिकों को आवश्यक सामान उपलब्ध नहीं हो रहा है। इन दावों के प्रसारित होने के बाद भारतीय सेना ने वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी बताया।

सेना के मुताबिक, वायरल क्लिप को अक्टूबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के मूल फुटेज में बदलाव करके तैयार किया गया था। सेना ने स्पष्ट किया कि वीडियो में दिखाई देने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे के बारे में नहीं थी।

सेना की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 27 अक्टूबर 2023 को कुपवाड़ा में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में मेजर जनरल गिरीश कालिया ने नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ की कोशिशों और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से संबंधित जानकारी दी थी।

उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान घुसपैठ की 10 कोशिशों को नाकाम करने, 27 आतंकियों को मार गिराने तथा हथियारों और नशीले पदार्थों की बरामदगी का जिक्र किया गया था। सेना ने कहा कि उस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के किसी इलाके पर चीन के कब्जे या भारतीय सैनिकों को जरूरी सामान नहीं मिलने की बात नहीं कही गई थी।

इसलिए सेना के अनुसार, पुराने फुटेज को नए दावों के साथ जोड़कर प्रसारित करना भ्रामक है। वीडियो को अरुणाचल प्रदेश की वर्तमान स्थिति का प्रमाण मानने का कोई आधार नहीं है।

सीमा विवाद पर आरोपों और प्रमाणों के बीच अंतर जरूरी

अरुणाचल प्रदेश से जुड़े इस विवाद में कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप और सेना की ओर से वायरल वीडियो पर दी गई सफाई दो अलग-अलग विषयों को सामने लाते हैं। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय लोगों से बातचीत के आधार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में कथित गतिविधियों और समस्याओं की जांच की मांग की है। दूसरी ओर, सेना ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उस वीडियो को गलत बताया है, जिसका इस्तेमाल चीन के कब्जे संबंधी दावों को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा था।

यह समझना जरूरी है कि किसी वीडियो के फर्जी होने से उससे अलग लगाए गए सभी आरोप अपने आप सही या गलत साबित नहीं होते। इसी तरह, स्थानीय लोगों के हवाले से किए गए दावों को भी स्वतंत्र पुष्टि के बिना अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।

सीमा से जुड़े मामलों में तथ्यात्मक जानकारी, आधिकारिक आकलन और विश्वसनीय प्रमाणों का विशेष महत्व होता है। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की कथित गतिविधियों, स्थानीय निवासियों की आवाजाही और सैनिकों को सुविधाएं मिलने संबंधी आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित अधिकारियों की जांच अहम होगी।

फिलहाल, इस मामले में कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है, जबकि भारतीय सेना ने वायरल वीडियो को संपादित और भ्रामक करार दिया है। वास्तविक स्थिति के बारे में किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दोनों विषयों से संबंधित दावों और उपलब्ध प्रमाणों का अलग-अलग सत्यापन जरूरी है।

Photo : AI