फीफा विश्व कप 2026 के क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड ने रोमांच से भरपूर मुकाबले में नॉर्वे को अतिरिक्त समय (एक्स्ट्रा टाइम) में 2-1 से हराकर सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया। मुकाबले के सबसे बड़े हीरो जूड बेलिंगहम रहे, जिन्होंने दोनों गोल दागकर अपनी टीम को जीत दिलाई। उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत इंग्लैंड ने आठ साल बाद विश्व कप के अंतिम चार में जगह बनाई और अब उसकी नजरें 1966 के बाद दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने पर टिक गई हैं।
यह मुकाबला शुरुआत से अंत तक उतार-चढ़ाव से भरा रहा। नॉर्वे ने पहले बढ़त बनाकर इंग्लैंड पर दबाव बनाया, लेकिन बेलिंगहम ने पहले बराबरी और फिर अतिरिक्त समय में निर्णायक गोल करके मैच का रुख पूरी तरह बदल दिया। इसी प्रदर्शन के लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ भी चुना गया।
नॉर्वे ने पहले चौंकाया, फिर इंग्लैंड ने पलट दी बाजी
क्वार्टर फाइनल के पहले हाफ में नॉर्वे ने शानदार शुरुआत की। टीम के युवा खिलाड़ी एंड्रियास शेल्डेरुप ने 36वें मिनट में गोल करके इंग्लैंड को झटका दिया। इस गोल के बाद नॉर्वे का आत्मविश्वास बढ़ गया और इंग्लैंड कुछ समय तक दबाव में दिखाई दिया।
हालांकि, पहले हाफ के इंजरी टाइम में इंग्लैंड ने जोरदार वापसी की। जूड बेलिंगहम ने शानदार मूव बनाते हुए बराबरी का गोल दाग दिया। इस गोल ने इंग्लैंड को नई ऊर्जा दी और दूसरे हाफ में टीम ने लगातार आक्रमण जारी रखा। निर्धारित 90 मिनट तक दोनों टीमें 1-1 की बराबरी पर रहीं, जिसके बाद मुकाबला अतिरिक्त समय में पहुंच गया।
अतिरिक्त समय में बेलिंगहम बने इंग्लैंड के सुपरस्टार
एक्स्ट्रा टाइम शुरू होते ही इंग्लैंड ने तेज आक्रमण किए और इसका फायदा 93वें मिनट में मिला। जूड बेलिंगहम ने बेहतरीन फिनिश के साथ अपना दूसरा गोल दागते हुए इंग्लैंड को 2-1 की बढ़त दिला दी। इसके बाद नॉर्वे ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन इंग्लैंड की मजबूत डिफेंस ने उसे कोई मौका नहीं दिया।
अंतिम सीटी बजते ही इंग्लैंड के खिलाड़ियों और समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। टीम ने लगातार दबाव झेलने के बाद जीत दर्ज की और विश्व कप के सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली।
चौथी बार विश्व कप के अंतिम चार में पहुंचा इंग्लैंड
इस जीत के साथ इंग्लैंड ने विश्व कप इतिहास में चौथी बार सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। इससे पहले टीम केवल तीन बार अंतिम चार में पहुंची थी।
विश्व कप में इंग्लैंड का सेमीफाइनल सफर इस प्रकार रहा—
- 1966 में पुर्तगाल को हराकर फाइनल में पहुंचा और पहली बार विश्व चैंपियन बना।
- 1990 में पश्चिम जर्मनी के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में हार का सामना करना पड़ा।
- 2018 में क्रोएशिया के खिलाफ अतिरिक्त समय में हारकर फाइनल में पहुंचने का सपना टूट गया।
- 2026 में नॉर्वे को 2-1 से हराकर फिर से अंतिम चार में जगह बनाई।
अब इंग्लैंड की अगली चुनौती अर्जेंटीना होगी। दोनों टीमों के बीच होने वाला सेमीफाइनल इस विश्व कप के सबसे बड़े मुकाबलों में शामिल माना जा रहा है।
बेलिंगहम ने युवा खिलाड़ियों की खास सूची में बनाई जगह
जूड बेलिंगहम इस विश्व कप में लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। नॉर्वे के खिलाफ दो गोल करने के साथ ही उन्होंने विश्व कप इतिहास में अपने कुल गोलों की संख्या सात तक पहुंचा दी।
24 वर्ष से कम उम्र में विश्व कप में सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ियों की सूची में अब बेलिंगहम संयुक्त रूप से दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं।
इस सूची में शीर्ष खिलाड़ी इस प्रकार हैं—
- किलियन एमबाप्पे – 12 गोल
- पेले – 7 गोल
- जूड बेलिंगहम – 7 गोल
- जेम्स रोड्रिगेज – 6 गोल
- मारियो केम्पेस – 6 गोल
बेलिंगहम अब केवल एमबाप्पे से पीछे हैं, जबकि उन्होंने पेले जैसे महान खिलाड़ी की बराबरी कर ली है। यह उपलब्धि उनके शानदार करियर को और खास बनाती है।
हैरी केन और बेलिंगहम ने मिलकर बनाया नया रिकॉर्ड
इंग्लैंड की इस जीत के साथ विश्व कप इतिहास में एक नया रिकॉर्ड भी दर्ज हुआ। पहली बार किसी एक विश्व कप संस्करण में किसी देश के दो खिलाड़ियों ने छह या उससे अधिक गोल किए हैं।
इंग्लैंड के लिए—
- जूड बेलिंगहम – 7 गोल
- हैरी केन – 6 गोल
इससे पहले विश्व कप के किसी भी टूर्नामेंट में ऐसा नहीं हुआ था कि एक ही टीम के दो खिलाड़ी छह या उससे ज्यादा गोल करने में सफल रहे हों। यह रिकॉर्ड इंग्लैंड के आक्रामक खेल की मजबूती को दर्शाता है।
नॉर्वे का शानदार अभियान यहीं थमा
हालांकि नॉर्वे को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन टीम ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया। पहली बार विश्व कप के क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर नॉर्वे ने सभी को प्रभावित किया।
टीम के स्टार स्ट्राइकर एर्लिंग हालैंड से बड़ी उम्मीदें थीं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में सात गोल किए और गोल्डन बूट की दौड़ में भी मजबूत दावेदार रहे। हालांकि, क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की मजबूत रक्षा पंक्ति के सामने वह गोल करने में सफल नहीं हो सके।
नॉर्वे ने पूरे अभियान के दौरान कई मजबूत टीमों को चुनौती दी और यह साबित किया कि भविष्य में वह विश्व फुटबॉल की बड़ी ताकत बन सकता है।
जीत के बाद भी संतुष्ट नहीं दिखे थॉमस टुचेल
इंग्लैंड के मुख्य कोच थॉमस टुचेल ने जीत का स्वागत जरूर किया, लेकिन टीम के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने खुलकर अपनी राय रखी।
मैच के बाद उन्होंने कहा कि सेमीफाइनल में पहुंचना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन टीम ने मुकाबले को जरूरत से ज्यादा कठिन बना लिया। उनके अनुसार इंग्लैंड को बेहतर फुटबॉल खेलनी होगी क्योंकि अगले दौर में अर्जेंटीना जैसी मजबूत टीम का सामना करना है।
टुचेल ने यह भी माना कि कई मौकों पर किस्मत ने टीम का साथ दिया, लेकिन आगे बढ़ने के लिए खिलाड़ियों को अधिक अनुशासित और प्रभावी प्रदर्शन करना होगा।
आंकड़ों में भी इंग्लैंड रहा आगे
हालांकि मुकाबला बेहद करीबी रहा और फैसला अतिरिक्त समय में हुआ, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि इंग्लैंड ने खेल के अधिकांश हिस्से में नियंत्रण बनाए रखा।
मैच के प्रमुख आंकड़े—
- कुल गोल प्रयास: इंग्लैंड 14, नॉर्वे 13
- लक्ष्य पर शॉट: इंग्लैंड 7, नॉर्वे 4
- सफल पास: इंग्लैंड 653, नॉर्वे 562
- पासिंग सटीकता: इंग्लैंड 88 प्रतिशत, नॉर्वे 86 प्रतिशत
इन आंकड़ों से साफ है कि इंग्लैंड ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखा और निर्णायक मौकों का बेहतर इस्तेमाल किया। यही वजह रही कि टीम अतिरिक्त समय में जीत हासिल करने में सफल रही।
अब सबकी नजरें अर्जेंटीना के खिलाफ होने वाले मुकाबले पर
सेमीफाइनल में इंग्लैंड का सामना अर्जेंटीना से होगा, जिसे इस विश्व कप का सबसे चर्चित मुकाबला माना जा रहा है। दोनों टीमों के बीच लंबे समय से यादगार मुकाबले होते रहे हैं और इस बार भी कड़ा संघर्ष देखने की उम्मीद है।
इंग्लैंड की कोशिश होगी कि वह 1966 के बाद पहली बार विश्व कप ट्रॉफी जीतने की दिशा में एक और कदम बढ़ाए, जबकि अर्जेंटीना अपनी मजबूत टीम के दम पर फाइनल में पहुंचने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरेगा।
बेलिंगहम की मौजूदा फॉर्म, हैरी केन का अनुभव और इंग्लैंड की संतुलित टीम उसे खिताब का मजबूत दावेदार बना रही है। वहीं, अर्जेंटीना के खिलाफ सेमीफाइनल यह तय करेगा कि क्या इंग्लैंड वास्तव में 1966 का इतिहास दोहराने की ओर बढ़ रहा है या उसका सफर अंतिम चार में ही रुक जाएगा।