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The Scoopp

 

इस्लामाबाद में SCO बैठक के बहाने भारत-पाकिस्तान आमने-सामने, आतंकवाद पर दोनों ने जताई साझा चिंता

इस्लामाबाद में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की अहम बैठक ने भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक अलग तस्वीर पेश की है। दोनों देशों के प्रतिनिधि एक ही बहुपक्षीय मंच पर मौजूद रहे और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आतंकवाद से निपटने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का हिस्सा बने। खास बात यह रही कि बैठक के कुछ दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारत की भागीदारी की पुष्टि करते हुए आतंकवाद को दोनों देशों के लिए साझा चुनौती बताया।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों में लगातार तनाव बना हुआ है। हालांकि SCO जैसे बहुपक्षीय मंचों पर दोनों देशों की भागीदारी पहले भी होती रही है, लेकिन इस बार इस्लामाबाद में हुई बैठक के बाद पाकिस्तान की ओर से भारत की मौजूदगी और आगे भी ऐसी भागीदारी जारी रहने की उम्मीद जताना चर्चा का विषय बन गया है।

14 सितंबर को इस्लामाबाद में हुई अहम बैठक

शंघाई सहयोग संगठन के क्षेत्रीय आतंकवाद-रोधी ढांचे यानी SCO RATS काउंसिल की 46वीं बैठक 14 सितंबर को इस्लामाबाद में आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता उस समय पाकिस्तान के पास मौजूद SCO RATS की चेयरमैनशिप के तहत हुई। इसमें संगठन के सदस्य देशों के संबंधित अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के आधिकारिक विवरण के मुताबिक बैठक में भारत के अलावा बेलारूस, ईरान, कजाकिस्तान, चीन, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। SCO RATS की कार्यकारी समिति के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में हिस्सा लिया।

बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा की मौजूदा स्थिति पर विचार-विमर्श किया गया। इसके साथ ही आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद के खिलाफ सदस्य देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े मुद्दों की समीक्षा हुई।

भारत की मौजूदगी की पाकिस्तान ने की पुष्टि

भारत की भागीदारी का आधिकारिक तौर पर जिक्र पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में सामने आया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान से जब इस्लामाबाद में आयोजित बैठक में भारत की मौजूदगी को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने इसकी पुष्टि की।

पाकिस्तानी पक्ष के अनुसार, इस बैठक में नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान में भारतीय मिशन के चार्ज डी अफेयर्स ने हिस्सा लिया। यानी भारत की ओर से राजनयिक स्तर पर प्रतिनिधित्व किया गया था।

प्रवक्ता ने कहा कि भारत की भागीदारी हुई है और पाकिस्तान को उम्मीद है कि ऐसी भागीदारी आगे भी जारी रहेगी। उनके मुताबिक इस तरह के मंच का व्यापक उद्देश्य शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देना तथा आतंकवाद से मुकाबला करना है।

उन्होंने आतंकवाद को भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए साझा चुनौती के तौर पर पेश किया। यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि दोनों देशों के बीच आतंकवाद का मुद्दा लंबे समय से द्विपक्षीय संबंधों में सबसे संवेदनशील विषयों में शामिल रहा है।

SCO RATS में आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर जोर

इस बैठक का मुख्य फोकस किसी द्विपक्षीय भारत-पाकिस्तान वार्ता के बजाय SCO के सदस्य देशों के बीच क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग रहा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक में पहले लिए गए फैसलों के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई और आतंकवाद, अलगाववाद तथा उग्रवाद से निपटने के लिए संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर काम आगे बढ़ाया गया।

बैठक में सूचना ढांचे को मजबूत करने से जुड़े फैसले भी लिए गए। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग को बेहतर बनाना है।

इसके अलावा 2027 में आतंकवाद से संबंधित कुछ संयुक्त गतिविधियां आयोजित करने पर भी सहमति बनी। इनमें आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त सूचना अभियान, इंटरनेट के आतंकवादी, अलगाववादी और उग्रवादी इस्तेमाल का मुकाबला करने पर व्यावहारिक सेमिनार तथा इंटरनेट के जरिए होने वाली ऐसी गतिविधियों की पहचान और रोकथाम से जुड़ा संयुक्त आतंकवाद-रोधी अभ्यास शामिल है।

बैठक में ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर भी चर्चा

इस्लामाबाद में हुई SCO RATS बैठक सिर्फ आतंकवाद-रोधी सहयोग तक सीमित नहीं रही। सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मौजूदा अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर भी विचार किया।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय और SCO के आधिकारिक विवरण के अनुसार, परिषद ने ईरान के खिलाफ हुए नए सैन्य हमलों की निंदा की और ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा तथा क्षेत्रीय अखंडता से संबंधित अपने पहले के रुख को दोहराया। साथ ही क्षेत्र में तनाव कम करने, शांति स्थापित करने और स्थिरता बनाए रखने के प्रयासों का समर्थन किया गया।

बैठक के बाद SCO RATS की अध्यक्षता पाकिस्तान से रूस को सौंप दी गई। अगली बैठक ताशकंद स्थित SCO RATS की कार्यकारी समिति के परिसर में आयोजित करने पर सहमति बनी है।

भारत-पाकिस्तान संबंधों के बीच क्यों अहम है यह घटनाक्रम?

भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कई मुद्दों को लेकर मतभेद हैं। ऐसे माहौल में दोनों देशों के प्रतिनिधियों का किसी बहुपक्षीय सुरक्षा मंच पर एक साथ मौजूद होना अपने आप में एक कूटनीतिक घटनाक्रम है। हालांकि इसे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में किसी बड़े बदलाव के संकेत के तौर पर नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह बैठक SCO के संस्थागत ढांचे के तहत हुई थी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी भारत की भागीदारी को इसी व्यापक बहुपक्षीय उद्देश्य के संदर्भ में रखा। प्रवक्ता ने बातचीत के दौरान शांति, सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को इस मंच की प्राथमिकताओं से जोड़ा।

इससे यह जरूर स्पष्ट होता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच मतभेदों के बावजूद दोनों देश उन अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों पर साथ बैठ सकते हैं, जहां साझा सुरक्षा हितों से जुड़े विषयों पर सदस्य देशों को भाग लेना होता है।

सिख तीर्थयात्रियों के मुद्दे पर भी पाकिस्तान का बयान

इसी प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय से एक अन्य भारत-पाकिस्तान से जुड़ा सवाल भी पूछा गया। मामला पाकिस्तान से भारत आने वाले सिख तीर्थयात्रियों का था।

मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि पाकिस्तान के फैसलाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सिख तीर्थयात्रियों के एक जत्थे को भारत जाने वाली यात्रा के लिए रोका गया। ये श्रद्धालु भारत स्थित श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जाना चाहते थे।

कुछ रिपोर्टों के मुताबिक यात्रियों को अतिरिक्त दस्तावेज या अनुमति से जुड़े सवालों का सामना करना पड़ा और उनकी निर्धारित हवाई यात्रा प्रभावित हुई। भारतीय मीडिया में इस घटना को लेकर तीर्थयात्रियों के फंसे होने की खबरें सामने आई थीं।

हालांकि पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इन रिपोर्टों पर अलग पक्ष रखा।

पाकिस्तान ने रिपोर्टों को बताया गलत

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने कहा कि यह कहना सही नहीं है कि तीर्थयात्रियों को विमान में चढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने इस मामले में सामने आई खबरों को दुर्भावनापूर्ण मीडिया अभियान बताया।

पाकिस्तानी पक्ष का कहना था कि उसे इस बात की जानकारी नहीं थी कि भारतीय उच्चायोग ने संबंधित तीर्थयात्रियों के लिए वीजा जारी किए हैं। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि इन वीजा को भारत और पाकिस्तान के बीच 1974 के द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत जारी किए गए वीजा की श्रेणी में नहीं रखा गया था।

यहां दोनों पक्षों की बातों में अंतर भी दिखाई देता है। एक ओर तीर्थयात्रियों और मीडिया रिपोर्टों में एयरपोर्ट पर रोके जाने और अतिरिक्त मंजूरी मांगे जाने की बात सामने आई, वहीं पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने विमान में चढ़ने से रोकने संबंधी दावे को खारिज किया।

वीजा और वाघा बॉर्डर को लेकर क्या कहा गया?

पाकिस्तान के एक सरकारी अधिकारी के हवाले से बताया गया कि संबंधित सिख यात्रियों ने दिल्ली स्थित मंदिर प्रबंधन समिति के जरिए अपने भारतीय वीजा की व्यवस्था की थी। अधिकारी के मुताबिक, यात्रा की योजना बनाते समय उन्हें पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के साथ समन्वय करना चाहिए था।

पाकिस्तानी अधिकारी ने यह भी कहा कि यात्रियों को भारत पहुंचने के लिए वाघा बॉर्डर के रास्ते यात्रा को प्राथमिकता देनी चाहिए थी। इसी वजह से हवाई मार्ग से यात्रा करने के लिए जरूरी प्रक्रियाओं को लेकर विवाद की स्थिति बनी।

इससे पहले आई रिपोर्टों में बताया गया था कि बड़ी संख्या में पाकिस्तानी सिख श्रद्धालु हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए भारत आना चाहते थे और उन्होंने हवाई मार्ग से यात्रा की योजना बनाई थी। कुछ यात्रियों के अनुसार, उन्हें यात्रा के दौरान अतिरिक्त मंजूरी से जुड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा।

एक ही समय पर दो अलग तस्वीरें

इस पूरे घटनाक्रम में भारत-पाकिस्तान संबंधों की दो अलग तस्वीरें दिखाई देती हैं। एक तरफ इस्लामाबाद में SCO के सुरक्षा मंच पर दोनों देशों के प्रतिनिधि एक साथ बैठे और आतंकवाद के खिलाफ क्षेत्रीय सहयोग के मुद्दे पर चर्चा हुई। दूसरी तरफ धार्मिक यात्रियों की आवाजाही और वीजा प्रक्रिया को लेकर दोनों पक्षों की व्याख्याएं अलग-अलग सामने आईं।

SCO बैठक के संदर्भ में पाकिस्तान ने भारत की भागीदारी को स्वीकार किया और आगे भी ऐसी भागीदारी जारी रहने की उम्मीद जताई। दूसरी ओर तीर्थयात्रियों के मामले में पाकिस्तान ने अपनी प्रशासनिक और वीजा संबंधी स्थिति स्पष्ट की।

इसलिए इस्लामाबाद की बैठक को भारत-पाकिस्तान के बीच किसी औपचारिक द्विपक्षीय समझौते या संबंधों में व्यापक बदलाव के तौर पर देखना उचित नहीं होगा। यह मुख्य रूप से SCO RATS के बहुपक्षीय ढांचे में हुई बैठक थी, जिसमें सदस्य देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और उग्रवाद से जुड़े मुद्दों पर सहयोग की समीक्षा की।

फिर भी, तनावपूर्ण द्विपक्षीय माहौल के बीच भारत की इस्लामाबाद में मौजूदगी और पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद को दोनों देशों की साझा चुनौती बताना इस बैठक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल रहा।

आगे भी जारी रह सकता है बहुपक्षीय संपर्क

SCO की संरचना भारत और पाकिस्तान सहित कई देशों को साझा सुरक्षा और क्षेत्रीय मुद्दों पर एक ही मंच उपलब्ध कराती है। इस बैठक में सूचना साझा करने की व्यवस्था मजबूत करने और 2027 में संयुक्त गतिविधियां आयोजित करने पर सहमति इस बात की ओर संकेत करती है कि SCO के संस्थागत ढांचे के भीतर सुरक्षा सहयोग जारी रखने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

भारत और पाकिस्तान के बीच भविष्य में ऐसे मंचों पर भागीदारी किस स्तर तक जारी रहती है, यह अलग-अलग कूटनीतिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। फिलहाल इस्लामाबाद में हुई 46वीं SCO RATS बैठक का प्रमुख संदेश क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग, आतंकवाद के खिलाफ समन्वय और सदस्य देशों के बीच सूचना साझेदारी को मजबूत करने से जुड़ा रहा।