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इस्लामाबाद वार्ता बेनतीजा: ईरान-अमेरिका में सहमति नहीं, जेडी वेंस लौटे

इस्लामाबाद में हाल ही में हुई United States और Iran के बीच उच्चस्तरीय वार्ता आखिरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। करीब 15 घंटे तक चली इस लंबी बैठक के बाद अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने साफ तौर पर कहा कि दोनों देशों के बीच समझौते की सभी संभावनाएं फिलहाल खत्म हो गई हैं और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वापस लौट रहा है।

यह बैठक हाल ही में हुए युद्धविराम के बाद काफी अहम मानी जा रही थी, क्योंकि उम्मीद थी कि दोनों देश अपने मतभेद कम कर किसी साझा समाधान पर पहुंच सकते हैं। बातचीत के शुरुआती दौर में माहौल सकारात्मक बताया जा रहा था और दोनों पक्ष एक साझा ढांचे की दिशा में आगे बढ़ते दिख रहे थे। यहां तक कि मसौदा तैयार करने के लिए टेक्स्ट के आदान-प्रदान की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।

लेकिन जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ी, मतभेद गहराते चले गए। अमेरिकी पक्ष ने कुछ प्रमुख मुद्दों पर कड़ी शर्तें रखीं, जिन्हें ईरान ने मानने से इनकार कर दिया। सबसे बड़ा विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को लेकर रहा। अमेरिका चाहता था कि ईरान स्पष्ट और ठोस गारंटी दे कि वह कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेगा और न ही ऐसे संसाधनों को विकसित करेगा जिससे वह तेजी से हथियार बना सके।

इसके अलावा, Strait of Hormuz में शिपिंग व्यवस्था को लेकर भी मतभेद सामने आए। अमेरिका चाहता था कि 28 फरवरी से पहले की स्थिति को बहाल किया जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर किसी तरह का असर न पड़े। यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

तीसरा बड़ा मुद्दा लेबनान की स्थिति को लेकर था, जहां Hezbollah के खिलाफ Israel की सैन्य कार्रवाई को लेकर भी दोनों देशों के विचार अलग-अलग रहे। अमेरिका इस मामले में इजरायल के रुख के साथ खड़ा दिखा, जबकि ईरान ने इसे स्वीकार नहीं किया।

ईरान की सरकारी मीडिया ने इस वार्ता के टूटने के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया। ईरानी पक्ष का कहना है कि जब बातचीत एक अहम मोड़ पर थी और दोनों देश एक साझा टेक्स्ट पर काम कर रहे थे, उसी दौरान अमेरिकी टीम ने नई-नई मांगें जोड़ दीं, जिससे पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई। ईरान ने इसे “अत्यधिक और बार-बार बढ़ाई गई शर्तें” करार दिया।

वहीं, जेडी वेंस ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका ने अपनी “रेड लाइंस” पहले ही स्पष्ट कर दी थीं और यह भी बता दिया था कि किन मुद्दों पर समझौता संभव है और किन पर नहीं। उनके मुताबिक, ईरान ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।

वेंस ने यह भी दोहराया कि अमेरिकी नेतृत्व का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ मौखिक भरोसे का मामला नहीं है, बल्कि ठोस और विश्वसनीय गारंटी की जरूरत है।

इस वार्ता के विफल होने से क्षेत्रीय तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। खासकर मध्य पूर्व में पहले से ही संवेदनशील हालात के बीच इस तरह की कूटनीतिक असफलता का असर आने वाले समय में और गहरा हो सकता है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि दोनों देश आगे किसी नए मंच पर बातचीत की कोशिश करते हैं या टकराव और बढ़ता है।