मध्य पूर्व में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई शुरू करते हुए उसके कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला हुआ था, जिसके लिए अमेरिका ने ईरान को जिम्मेदार ठहराया था। दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ते तनाव ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, गुरुवार तड़के शुरू किए गए इस ऑपरेशन का उद्देश्य उन ठिकानों को निशाना बनाना था, जहां से अमेरिकी हितों और सैनिकों के खिलाफ हमलों की योजना बनाई जा रही थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि निर्धारित समय पर सैन्य अभियान शुरू किया गया और यह हाल में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों का जवाब है।
CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका अपने सैनिकों और सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। बयान में यह भी कहा गया कि यदि भविष्य में अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमला किया जाता है तो उसका जवाब भी इसी तरह दिया जाएगा। हालांकि, अभियान के दौरान कितने ठिकानों को निशाना बनाया गया और कितना नुकसान हुआ, इस बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस सैन्य अभियान में ईरान के कई सैन्य प्रतिष्ठानों को लक्ष्य बनाया गया। अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन पहले से तैयार योजना के तहत संचालित किया गया और इसमें आधुनिक हथियारों तथा सटीक हमलों का इस्तेमाल किया गया।
दूसरी ओर, ईरान के सरकारी मीडिया ने पुष्टि की कि देश के दक्षिणी हिस्सों में कई स्थानों पर विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। रिपोर्टों के अनुसार, बंदर अब्बास, अबू मूसा, किश द्वीप और केशम द्वीप के आसपास धमाकों की घटनाएं सामने आईं। इन इलाकों का सामरिक महत्व काफी अधिक माना जाता है क्योंकि ये होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट स्थित हैं, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल परिवहन होता है।
सरकारी प्रसारक IRIB ने बताया कि केशम द्वीप पर एक के बाद एक कई धमाके सुनाई दिए। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, एक रिहायशी इमारत भी प्रभावित हुई, जिसके मलबे में कुछ लोगों के फंसे होने की जानकारी सामने आई। राहत और बचाव दल मौके पर पहुंच गए और प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास शुरू कर दिया गया।
फार्स प्रांत के काजेरून शहर के बाहरी क्षेत्र में भी एक स्थान को निशाना बनाए जाने की सूचना मिली है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने नुकसान के संबंध में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों का आकलन किया जा रहा है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
किश द्वीप से भी तेज धमाकों की खबरें आईं। हालांकि वहां के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि द्वीप का एयरपोर्ट सामान्य रूप से काम कर रहा है और यात्री फेरी सेवाओं पर भी किसी प्रकार का असर नहीं पड़ा है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की।
इस सैन्य कार्रवाई से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकाने पर हुए हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि अब जवाबी कार्रवाई का समय आ गया है और अमेरिका अपने विरोधियों को सख्त संदेश देगा। ट्रंप ने यह भी कहा था कि संबंधित पक्षों को पहले से अंदाजा है कि अमेरिका किस तरह प्रतिक्रिया देगा।
अमेरिका का दावा है कि जॉर्डन में उसके सैन्य अड्डे को निशाना बनाने के लिए कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले ने क्षेत्र में तैनात सैनिकों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती दी। वहीं जॉर्डन की सेना ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने अधिकांश मिसाइलों को रास्ते में ही रोक लिया, जिससे बड़े नुकसान को टाला जा सका।
ईरानी पक्ष की ओर से कहा गया कि क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम के पीछे अमेरिका की नीतियां जिम्मेदार हैं। हालांकि, आधिकारिक स्तर पर दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है और किसी भी पक्ष ने तनाव कम करने के संकेत नहीं दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती सैन्य गतिविधियां पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर असर डाल सकती हैं। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि यदि दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी रहता है तो क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। कई देशों ने पहले भी दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है, लेकिन हालिया घटनाओं से स्थिति और अधिक संवेदनशील होती दिखाई दे रही है।
फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की ओर से सैन्य गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में दोनों देशों की अगली रणनीति और संभावित जवाबी कदम मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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