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The Scoopp

 

एक फ्लैट के लिए पूरे समाज से टकराए मनोज बाजपेयी, ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ का ट्रेलर देख खड़े होंगे कई सवाल, जानें कब और कहां होगी रिलीज

बॉलीवुड में अपनी दमदार अदाकारी और अलग-अलग तरह के किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी एक बार फिर दर्शकों के सामने एक दिलचस्प कहानी लेकर आ रहे हैं। उनकी आगामी फिल्म ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ (Last Man in Tower) का ट्रेलर रिलीज कर दिया गया है। फिल्म की कहानी एक ऐसे व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने घर को बचाने के लिए पूरी दुनिया से लड़ने को तैयार है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार उसके सामने कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि उसके अपने पड़ोसी खड़े हैं। एक ही इमारत में वर्षों से साथ रह रहे लोग अचानक एक-दूसरे के खिलाफ हो जाते हैं और इसकी वजह बनता है एक घर छोड़ने से किया गया इनकार।

फिल्म का ट्रेलर 3 नवंबर को सामने आया, जिसके बाद इसकी कहानी को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ गई है। इसमें मनोज बाजपेयी के साथ दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी भी अहम भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। कहानी में मकान, पैसों, बेहतर भविष्य और पुरानी यादों के बीच होने वाली खींचतान को दिखाया गया है। फिल्म का विषय आम जिंदगी से जुड़ा हुआ है, क्योंकि बड़े शहरों में पुराने मकानों का पुनर्विकास और वहां रहने वाले लोगों के हितों का टकराव अक्सर चर्चा में रहता है।

एक इमारत, अलग-अलग सपने और आमने-सामने खड़े पड़ोसी

‘लास्ट मैन इन टॉवर’ की कहानी मुंबई की एक हाउसिंग सोसाइटी के आसपास बुनी गई है। यहां रहने वाले लोगों के सामने अपनी पुरानी इमारत को पुनर्विकास के लिए देने का प्रस्ताव आता है। इस योजना के तहत उन्हें बेहतर और नए घर मिलने की उम्मीद दिखाई जाती है। सोसाइटी के अधिकतर लोग इसे अपनी जिंदगी बदलने का अच्छा अवसर मानते हैं। उनके लिए यह केवल पुरानी इमारत से बाहर निकलने का फैसला नहीं, बल्कि सुविधाजनक भविष्य की ओर बढ़ने का रास्ता है।

हालांकि, इस प्रस्ताव पर सभी की राय एक जैसी नहीं होती। इमारत में रहने वाले योगेश मिश्रा को अपना घर छोड़ने का विचार मंजूर नहीं है। वह अपने फैसले पर अड़े रहते हैं, जबकि बाकी निवासी चाहते हैं कि पुनर्विकास की प्रक्रिया बिना किसी रुकावट के आगे बढ़े। यहीं से कहानी में तनाव पैदा होना शुरू होता है।

फिल्म का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि एक ही जगह रहने वाले लोगों के लिए घर का अर्थ बिल्कुल अलग है। कुछ लोगों के लिए यह आर्थिक तरक्की और नई शुरुआत का माध्यम है, तो किसी के लिए यह बीते हुए समय, रिश्तों और जिंदगीभर की यादों से जुड़ी जगह है। इसी अंतर के कारण एक साधारण-सा दिखने वाला मामला धीरे-धीरे गंभीर विवाद का रूप ले लेता है।

मनोज बाजपेयी बने रिटायर्ड शिक्षक योगेश मिश्रा

इस फिल्म में मनोज बाजपेयी ने योगेश मिश्रा नाम के रिटायर्ड फिजिक्स टीचर की भूमिका निभाई है। उनका किरदार उम्र के उस पड़ाव पर है, जहां इंसान अपनी जिंदगी में स्थिरता और सुकून चाहता है। योगेश के लिए उनका मुंबई वाला अपार्टमेंट महज चार दीवारों और एक छत का नाम नहीं है। यह वह जगह है जहां उन्होंने अपनी जिंदगी के कई साल बिताए हैं और अनगिनत यादें संजोई हैं।

यही कारण है कि जब सोसाइटी के दूसरे सदस्य पुनर्विकास की योजना को स्वीकार कर लेते हैं, तब भी योगेश अपने घर से अलग होने के लिए तैयार नहीं होते। उनके लिए नए घर का प्रस्ताव कितना भी आकर्षक क्यों न हो, वह अपनी पुरानी जगह को छोड़ने का फैसला नहीं कर पाते।

योगेश का यह रवैया दूसरे निवासियों के लिए परेशानी बन जाता है। उन्हें लगता है कि एक व्यक्ति की वजह से सभी का काम रुक रहा है। लेकिन योगेश की नजर में यह किसी योजना को रोकने का मामला नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी और उससे जुड़े अधिकारों को बचाने की लड़ाई है।

मनोज बाजपेयी के किरदार के जरिए फिल्म यह सवाल भी उठाती है कि क्या विकास के नाम पर किसी व्यक्ति की भावनाओं और उसकी पसंद को नजरअंदाज किया जा सकता है? क्या बेहतर सुविधाओं वाला नया घर हमेशा पुराने मकान से ज्यादा कीमती होता है? कहानी इन सवालों को एक पारिवारिक और सामाजिक टकराव के रूप में सामने लाती है।

दिव्या दत्ता के किरदार की अपनी मजबूरियां

फिल्म में दिव्या दत्ता संगीता पुरी की भूमिका निभा रही हैं। वह एक गृहिणी हैं और अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपने बेटे का भविष्य बेहतर बनाने की उम्मीद रखती हैं। संगीता के लिए इमारत का पुनर्विकास एक बड़ा अवसर है। वह इस बदलाव को अपने परिवार के लिए आर्थिक और सामाजिक रूप से फायदेमंद मानती हैं।

ऐसे में योगेश मिश्रा का विरोध उनके लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। वह चाहती हैं कि पूरी सोसाइटी इस योजना के पक्ष में खड़ी हो और प्रस्ताव को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। दूसरी ओर, योगेश किसी भी कीमत पर अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं।

दोनों किरदारों के बीच होने वाला टकराव केवल विचारों की लड़ाई नहीं है। इसके पीछे उनकी अलग-अलग परिस्थितियां, जरूरतें और भविष्य को लेकर उम्मीदें हैं। एक तरफ योगेश अपने बीते जीवन से जुड़े स्थान को बचाना चाहते हैं, वहीं संगीता अपने परिवार के आने वाले कल को बेहतर बनाने का सपना देख रही हैं।

इस तरह फिल्म किसी एक किरदार को पूरी तरह सही या गलत साबित करने के बजाय दो अलग-अलग सोच के बीच पैदा होने वाली मुश्किलों को सामने लाती है।

बोमन ईरानी का किरदार बढ़ाएगा कहानी का तनाव

इस कहानी में बोमन ईरानी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह डेवलपर धर्मेन शाह के किरदार में दिखाई देंगे। धर्मेन शाह की कोशिश है कि इमारत के पुनर्विकास से जुड़ा प्रोजेक्ट आगे बढ़े। लेकिन योगेश मिश्रा के विरोध के कारण योजना में बाधा आने लगती है।

जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ता है, विवाद का दायरा भी बढ़ता जाता है। अब यह केवल योगेश और संगीता के बीच की असहमति नहीं रह जाती, बल्कि इसमें डेवलपर और पूरी हाउसिंग सोसाइटी की भूमिका अहम हो जाती है।

धर्मेन शाह इस परियोजना को आगे ले जाने के लिए दबाव बनाते हैं। दूसरी तरफ, योगेश अपनी जिद पर कायम रहते हैं। इस खींचतान के बीच सोसाइटी के लोगों के संबंध भी प्रभावित होने लगते हैं। जिन पड़ोसियों ने सालों तक एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ दिया था, वे अब एक-दूसरे के विरोध में खड़े दिखाई देते हैं।

फिल्म का ट्रेलर इस बात की झलक देता है कि जब व्यक्तिगत फायदे, सामूहिक फैसले और भावनात्मक लगाव एक साथ टकराते हैं, तो हालात कितने जटिल हो सकते हैं।

बुकर पुरस्कार विजेता के उपन्यास पर बनी है फिल्म

‘लास्ट मैन इन टॉवर’ की कहानी की एक खास बात यह भी है कि इसकी पृष्ठभूमि मशहूर लेखक अरविंद अडिगा के उपन्यास से ली गई है। अरविंद अडिगा को उनके साहित्यिक लेखन के लिए जाना जाता है और उन्हें बुकर पुरस्कार भी मिल चुका है। यह फिल्म उनके साल 2011 में प्रकाशित बेस्टसेलिंग उपन्यास ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ पर आधारित है।

उपन्यास में मुंबई के शहरी जीवन, रियल एस्टेट, आर्थिक महत्वाकांक्षाओं और आम लोगों के आपसी रिश्तों को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। फिल्म भी इसी मूल विचार को पर्दे पर प्रस्तुत करती नजर आएगी। एक इमारत में रहने वाले अलग-अलग लोगों की सोच और उनके हित किस तरह एक-दूसरे से टकराते हैं, यही कहानी का प्रमुख आधार है।

इस फिल्म का निर्देशन बेन रेखी ने किया है। वहीं, इसे राणा दग्गुबाती की प्रोडक्शन कंपनी स्पिरिट मीडिया का समर्थन प्राप्त है। मनोज बाजपेयी, दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी जैसे अनुभवी कलाकारों की मौजूदगी ने इस प्रोजेक्ट को और खास बना दिया है।

केवल घर की लड़ाई नहीं, इंसानी रिश्तों की कहानी

फिल्म का विषय इसलिए भी दिलचस्प है, क्योंकि यह केवल मकान के मालिकाना हक या पुनर्विकास के प्रस्ताव तक सीमित नहीं दिखाई देता। इसके केंद्र में इंसानी भावनाएं और बदलते रिश्ते हैं। किसी व्यक्ति के लिए घर उसकी पहचान हो सकता है, तो किसी दूसरे के लिए वही घर बेहतर भविष्य हासिल करने का साधन बन सकता है।

बड़े शहरों में तेजी से बदलते माहौल के बीच पुराने मकानों और इमारतों को तोड़कर नई सुविधाओं वाली इमारतें बनाने की योजनाएं सामने आती रहती हैं। ऐसी परिस्थितियों में वहां रहने वाले सभी लोगों की जरूरतें और इच्छाएं एक जैसी नहीं होतीं। कुछ लोग बदलाव का स्वागत करते हैं, जबकि कुछ अपनी पुरानी दुनिया को छोड़ना नहीं चाहते।

‘लास्ट मैन इन टॉवर’ इसी वास्तविकता को एक रोमांचक कहानी के माध्यम से दिखाने की कोशिश करती है। ट्रेलर में नजर आने वाला तनाव दर्शाता है कि योगेश का फैसला किस तरह पूरी सोसाइटी के माहौल को बदल देता है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म में इस संघर्ष का अंत किस तरह होता है और क्या योगेश अपने घर को बचाने में सफल हो पाते हैं।

कब और कहां देख सकेंगे मनोज बाजपेयी की फिल्म?

अगर आप मनोज बाजपेयी की दमदार अदाकारी और सामाजिक मुद्दों पर आधारित कहानियां देखना पसंद करते हैं, तो ‘लास्ट मैन इन टॉवर’ आपके लिए दिलचस्प फिल्म हो सकती है। इस फिल्म में मनोज बाजपेयी के साथ दिव्या दत्ता और बोमन ईरानी की मौजूदगी भी कहानी को खास बनाती है।

फिल्म का प्रीमियर 6 नवंबर 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 (ZEE5) पर किया जाएगा। यानी दर्शकों को इसे देखने के लिए सिनेमाघरों में जाने की जरूरत नहीं होगी। वे रिलीज के बाद घर बैठे इस कहानी का आनंद ले सकेंगे।

फिलहाल ट्रेलर ने फिल्म की कहानी को लेकर उत्सुकता पैदा कर दी है। अब दर्शकों की नजर इसकी रिलीज पर है। खास बात यह होगी कि पर्दे पर योगेश मिश्रा की अपने घर को बचाने की जंग किस मोड़ पर पहुंचती है और एक व्यक्ति के फैसले से पूरी सोसाइटी की जिंदगी में आए बदलाव का क्या नतीजा निकलता है।