आजकल छोटे बच्चों का ज़्यादा समय मोबाइल, टैबलेट या टीवी के सामने बीत रहा है। इसका असर सिर्फ उनकी दिनचर्या पर ही नहीं, बल्कि मानसिक और सामाजिक विकास पर भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम कुछ मामलों में ऑटिज्म से जुड़े शुरुआती संकेतों को बढ़ा सकता है।
बाल तंत्रिका विशेषज्ञ के अनुसार, ऑटिज्म एक जटिल न्यूरो-डेवलपमेंटल स्थिति है, जिसका कोई एक कारण नहीं होता। इसमें आनुवंशिक, पर्यावरण और जीवनशैली से जुड़े कई पहलू शामिल होते हैं। हालांकि, हाल के अध्ययनों में यह देखा गया है कि बहुत कम उम्र में बच्चों का स्क्रीन से ज्यादा जुड़ाव उनके व्यवहार और विकास को प्रभावित कर सकता है।
क्या होता है ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर?
यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चे की सामाजिक बातचीत, कम्युनिकेशन और व्यवहार प्रभावित होता है। ऐसे बच्चे सामान्य तरीके से खेलते नहीं हैं और किसी एक चीज या गतिविधि पर अत्यधिक ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। ‘स्पेक्ट्रम’ शब्द इसलिए इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि हर बच्चे में इसके लक्षण और गंभीरता अलग-अलग हो सकती है।
पहले 1000 दिन क्यों हैं अहम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, बच्चे के जीवन के शुरुआती 1000 दिन उसके मस्तिष्क के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान बच्चे को मानवीय स्पर्श, बातचीत और वास्तविक अनुभवों की जरूरत होती है। यदि इस समय स्क्रीन का उपयोग ज्यादा हो जाए, तो यह उनके सीखने और समझने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
स्क्रीन टाइम पर रखें नियंत्रण
अध्ययन बताते हैं कि 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से दूर रखना चाहिए। इस उम्र में बच्चे को परिवार के साथ समय बिताना, खेलना और वातावरण को महसूस करना ज्यादा जरूरी होता है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
माता-पिता को बच्चों में कुछ संकेतों पर खास ध्यान देना चाहिए, जैसे-
- आंखों में संपर्क न बनाना
- नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना
- बोलने में देरी होना
- सीखी हुई चीजों को भूल जाना
तीन साल की उम्र के बाद बच्चों के व्यवहार में बदलाव करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, इसलिए शुरुआती पहचान बेहद जरूरी है। समय रहते सही कदम उठाकर बच्चे के विकास को बेहतर दिशा दी जा सकती है।
(Photo : AI Generated)