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The Scoopp

 

कच्चे तेल की महंगाई से तेल कंपनियां दबाव में, रोजाना हजारों करोड़ का झटका

पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 50% तक उछाल आ चुका है, लेकिन देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें अभी भी पुराने स्तर पर बनी हुई हैं। ऐसे में इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल जैसी कंपनियों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है।

सूत्रों के अनुसार, बीते करीब 10 हफ्तों में सरकारी तेल कंपनियों का कुल घाटा ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच गया है। रोजाना पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की बिक्री पर इन कंपनियों को लगभग ₹1,700 करोड़ तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके बावजूद आम लोगों को राहत देने के लिए कंपनियों ने कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की है।

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। देश लगभग 40% कच्चा तेल, 90% एलपीजी और 65% प्राकृतिक गैस बाहर से खरीदता है। युद्ध और सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण आयात महंगा हो गया है, जिससे कंपनियों की लागत तेजी से बढ़ी है।

हालांकि कई देशों ने ईंधन की कीमतों में भारी इजाफा कर दिया है, लेकिन भारत में सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर जनता पर बोझ कम रखने की कोशिश की है। पेट्रोल पर टैक्स ₹13 से घटाकर ₹3 प्रति लीटर कर दिया गया, जबकि डीजल पर एक्साइज ड्यूटी लगभग खत्म कर दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार नुकसान की वजह से तेल कंपनियों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो सकती है। आगे चलकर इन्हें वर्किंग कैपिटल के लिए ज्यादा कर्ज लेना पड़ सकता है। साथ ही रिफाइनरी विस्तार और क्लीन एनर्जी से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ाने को लेकर अंतिम फैसला केंद्र सरकार के पास है। माना जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम इसी तरह ऊंचे बने रहे, तो आने वाले समय में ईंधन महंगा हो सकता है। वहीं सरकार भी टैक्स में कटौती के जरिए हर महीने करीब ₹14,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ उठा रही है।