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The Scoopp

 

कनाडा में फंसे सैकड़ों पंजाबी छात्र, वर्क परमिट रिजेक्ट होने पर सड़कों पर उतरे

कनाडा के अल्बर्टा प्रांत में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) को लेकर हजारों भारतीय छात्रों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। वर्क परमिट के लिए किए गए कई आवेदन खारिज होने के बाद छात्र पिछले कई सप्ताह से कैलगरी में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या पंजाब से गए छात्रों की है। कई छात्र बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद सड़कों पर डटे हुए हैं, जबकि कुछ छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल भी शुरू कर दी है।

छात्रों का कहना है कि उन्होंने कनाडा जाने से पहले कॉलेज और एजेंटों की ओर से मिली जानकारी पर भरोसा किया था। उन्हें बताया गया था कि निर्धारित समय सीमा के भीतर दाखिला लेने और पढ़ाई पूरी करने के बाद वे पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट के लिए पात्र होंगे। इसी भरोसे पर परिवारों ने लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन अब पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके आवेदन यह कहकर अस्वीकार किए जा रहे हैं कि संबंधित कोर्स वर्क परमिट के लिए मान्य नहीं है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि नियमों की व्याख्या बदलने के कारण उनका भविष्य अधर में लटक गया है। उनका कहना है कि जब उन्होंने प्रवेश लिया था, उस समय किसी भी प्रकार की ऐसी जानकारी नहीं दी गई थी कि आगे चलकर उनका कोर्स अमान्य माना जा सकता है। अब अचानक आवेदन खारिज होने से वे न तो नौकरी कर पा रहे हैं और न ही अपने भविष्य की कोई स्पष्ट योजना बना पा रहे हैं।

कई छात्राओं ने अपनी आपबीती साझा करते हुए बताया कि वे वर्ष 2024 में कनाडा पहुंचीं और पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई पूरी की। किसी विषय में असफल न होने के बावजूद उनका वर्क परमिट आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। कुछ मामलों में इमिग्रेशन विभाग ने रिकॉर्ड में प्रवेश तिथि अलग दर्ज होने का हवाला देकर आवेदन खारिज कर दिया। छात्रों का कहना है कि उनके साथ पढ़ने वाले कई अन्य विद्यार्थियों को वर्क परमिट मिल गया, जबकि समान परिस्थितियों में उनके आवेदन अस्वीकार कर दिए गए।

इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) की ओर से भेजे गए रिजेक्शन लेटर ने छात्रों की चिंता और बढ़ा दी है। छात्रों का कहना है कि उन्हें पहले विश्वास दिलाया गया था कि पढ़ाई पूरी होने के बाद वे कनाडा में काम करने के पात्र होंगे। लेकिन आवेदन खारिज होने के बाद वे रोजगार के अवसरों से भी वंचित हो गए हैं।

मानसिक तनाव भी इस पूरे मामले का बड़ा पहलू बनकर सामने आया है। प्रभावित छात्रों का कहना है कि उनके परिवारों ने कर्ज लेकर उन्हें विदेश भेजा था। अब न नौकरी मिल रही है और न ही भविष्य सुरक्षित दिखाई दे रहा है। कई छात्र मानसिक दबाव और अवसाद से जूझ रहे हैं। उनका दावा है कि केवल कुछ ही दिनों में सैकड़ों छात्रों के आवेदन एक साथ अस्वीकार कर दिए गए, जबकि आने वाले समय में प्रभावित छात्रों की संख्या और बढ़ सकती है।

छात्रों के अनुसार उन्होंने लगभग 32 हजार कनाडाई डॉलर यानी करीब 20 लाख रुपये या उससे अधिक की फीस जमा कर अपनी पढ़ाई पूरी की। उनका कहना है कि उनके कई सहपाठियों को तीन-तीन वर्ष का वर्क परमिट मिला, लेकिन बाद में उसी प्रकार के कोर्स को गैर-मान्य बताते हुए अन्य छात्रों के आवेदन अस्वीकार किए जाने लगे। इसी बात को लेकर वे सरकार से पारदर्शिता और समान व्यवहार की मांग कर रहे हैं।

वर्क परमिट न मिलने का असर केवल रोजगार तक सीमित नहीं है। छात्रों का कहना है कि आवेदन खारिज होने के बाद उनका कानूनी स्टेटस भी प्रभावित हो गया। पढ़ाई पूरी होने के कारण कई छात्रों के हेल्थ कार्ड की अवधि समाप्त हो गई है, जिससे इलाज कराना मुश्किल हो गया है। जिन छात्रों के ड्राइविंग लाइसेंस समाप्त हो चुके हैं, उन्हें पहचान और दैनिक जीवन से जुड़ी कई अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है।

डर और अनिश्चितता के कारण कई छात्र सार्वजनिक स्थानों पर जाने से भी बच रहे हैं। कुछ छात्रों ने बताया कि उन्होंने अपने माता-पिता को पूरी स्थिति नहीं बताई है क्योंकि वे पहले से ही भारी आर्थिक बोझ झेल रहे हैं। कई परिवारों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए जमीन बेची या कर्ज लिया था, इसलिए छात्र उन्हें और अधिक चिंता में नहीं डालना चाहते।

इस बीच कैलगरी के स्थानीय गुरुद्वारा प्रबंधन ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों के समर्थन में आगे आकर मदद की पेशकश की है। गुरुद्वारा कमेटी ने कहा कि किसी भी छात्र को भोजन, रहने या अन्य आवश्यक सुविधाओं की चिंता करने की जरूरत नहीं है। जरूरतमंद छात्र गुरुद्वारा पहुंच सकते हैं, जहां उनके लिए लंगर और अन्य आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही छात्रों से अपील की गई कि वे किसी भी तरह का गलत कदम न उठाएं और अपनी परेशानी परिवार तथा समुदाय के साथ साझा करें।

कानूनी विशेषज्ञ भी छात्रों को अलग-अलग विकल्पों की जानकारी दे रहे हैं। उनका कहना है कि जिन छात्रों का वर्क परमिट आवेदन अस्वीकार हुआ है, वे पहले इमिग्रेशन विभाग से पुनर्विचार की मांग कर सकते हैं। यदि निर्धारित समय के भीतर समाधान नहीं मिलता तो फेडरल कोर्ट में याचिका दायर करने का भी विकल्प मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना उचित कानूनी सलाह के दोबारा वही आवेदन करना कई मामलों में नुकसानदायक साबित हो सकता है।

कानूनी सलाहकारों ने छात्रों को यह भी सुझाव दिया है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर किसी मान्यता प्राप्त सार्वजनिक कॉलेज में नया कोर्स लेकर अपने स्टूडेंट स्टेटस को बनाए रखने की कोशिश करें। ऐसा करने से वे कानूनी रूप से कनाडा में रह सकेंगे और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए उनके पास समय रहेगा।

इस पूरे विवाद का सबसे अधिक असर पंजाब के परिवारों पर दिखाई दे रहा है। कनाडा जाने वाले भारतीय छात्रों में पंजाब की हिस्सेदारी काफी अधिक मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रभावित छात्रों में बड़ी संख्या पंजाब के जालंधर, लुधियाना, अमृतसर और आसपास के क्षेत्रों से संबंध रखने वाले युवाओं की है। इनमें से कई परिवारों ने बच्चों को विदेश भेजने के लिए भारी कर्ज लिया या अपनी संपत्ति तक बेच दी।

इसी दौरान कनाडा सरकार और अल्बर्टा की प्रीमियर डेनियल स्मिथ ने कहा कि वे संबंधित कॉलेज को सीधे तौर पर फर्जी डिग्री देने वाला संस्थान नहीं कह रही हैं, लेकिन उनका मानना है कि स्थायी निवास (PR) से जुड़ी संभावनाओं को लेकर छात्रों के सामने बढ़ा-चढ़ाकर बातें रखी गई होंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास वैध स्टूडेंट स्टेटस, अंतरराष्ट्रीय वीजा या स्थायी निवास का अधिकार नहीं होगा, उन्हें कनाडा के नियमों का पालन करना होगा और आवश्यक होने पर देश छोड़ना पड़ेगा।

इस बीच 15 जुलाई 2026 से लागू नए नियमों के तहत इमिग्रेशन कंसल्टेंट्स से जुड़े विवादों में प्रभावित लोगों के लिए मुआवजा फंड की व्यवस्था भी की गई है। हालांकि वर्तमान में वर्क परमिट विवाद का सामना कर रहे छात्रों को इस योजना का लाभ मिलेगा या नहीं, यह प्रत्येक मामले की कानूनी जांच और पात्रता पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन मामलों की निष्पक्ष समीक्षा होती है तो भविष्य में छात्रों को राहत मिलने की संभावना बन सकती है। फिलहाल सभी की नजर सरकार और अदालतों की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।