कनाडा में पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति यानी पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) को लेकर भारतीय विद्यार्थियों की परेशानी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। खासतौर पर पंजाबी छात्रों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि जिन पाठ्यक्रमों को उन्होंने कनाडा में पढ़ाई और भविष्य में नौकरी के अवसरों को ध्यान में रखकर चुना था, उन्हें पूरा करने के बाद उनके वर्क परमिट आवेदन अस्वीकार किए जा रहे हैं। अब यह मामला केवल आवेदन खारिज होने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कुछ शहरों में विद्यार्थियों से उनकी इमिग्रेशन स्थिति को लेकर पूछताछ किए जाने से भी तनाव बढ़ गया है।
कैलगरी के बाद एडमिंटन में भी कनाडा सीमा सेवा एजेंसी यानी कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) के अधिकारियों के विद्यार्थियों के बीच पहुंचने की खबर सामने आई है। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, एडमिंटन में प्रदर्शन कर रहे कम से कम सात पंजाबी युवाओं से अधिकारियों ने कनाडा में उनके रहने और इमिग्रेशन स्टेटस से जुड़े सवाल किए। इस घटना ने उन विद्यार्थियों की चिंता और बढ़ा दी है, जो पहले ही अपने वर्क परमिट आवेदनों के भविष्य को लेकर परेशान हैं।
पूरा विवाद पोर्टेज कॉलेज से जुड़े छात्रों के मामलों के बीच सामने आया है। पिछले कई सप्ताह से विद्यार्थी यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि उनके चुने गए कोर्स पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट के लिए योग्य नहीं थे, तो दाखिले के समय उन्हें इस बारे में स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी गई। उनका कहना है कि उन्होंने कॉलेज में प्रवेश लेने से पहले उपलब्ध जानकारी और भविष्य में काम की संभावना को ध्यान में रखकर अपना कोर्स चुना था।
वर्क परमिट नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी
कनाडा आने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए पढ़ाई के बाद काम करने की अनुमति एक महत्वपूर्ण विकल्प होती है। कई विद्यार्थी पढ़ाई के दौरान और उसके बाद की योजनाएं इसी उम्मीद के साथ बनाते हैं कि कोर्स पूरा करने के बाद उन्हें कुछ समय के लिए कनाडा में काम करने का अवसर मिलेगा। इसी अवधि में वे नौकरी का अनुभव हासिल करने, आर्थिक रूप से खुद को संभालने और आगे की इमिग्रेशन प्रक्रिया के विकल्प तलाशने की कोशिश करते हैं।
पोर्टेज कॉलेज से जुड़े विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने भी इसी तरह की उम्मीद के साथ अपने पाठ्यक्रमों में प्रवेश लिया था। पढ़ाई पूरी होने के बाद जब उन्होंने वर्क परमिट के लिए आवेदन किया, तो कई आवेदन अस्वीकार कर दिए गए। छात्रों के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि उनके संबंधित पाठ्यक्रम निर्धारित पात्रता वाली प्रमाणपत्र श्रेणी में नहीं आते।
यही बात विद्यार्थियों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गई है। उनका तर्क है कि अगर संबंधित कोर्स वर्क परमिट के लिए योग्य नहीं थे, तो उन्हें प्रवेश के समय इसकी जानकारी मिलनी चाहिए थी। विद्यार्थियों ने अपनी फीस, रहने, खाने और अन्य खर्चों पर बड़ी रकम लगाई है। ऐसे में पढ़ाई पूरी होने के बाद वर्क परमिट का विकल्प बंद हो जाने से उनके सामने आर्थिक और कानूनी दोनों तरह की मुश्किलें पैदा हो रही हैं।
छात्र यह भी सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्होंने दाखिला लिया था, उस समय उन्हें जो जानकारी उपलब्ध कराई गई थी, उसके आधार पर उन्होंने अपना भविष्य तय किया। अब पढ़ाई पूरी होने के बाद पात्रता से जुड़ी स्थिति सामने आने पर उन्हें नुकसान क्यों उठाना पड़ रहा है।
कनाडा सरकार का क्या कहना है?
दूसरी तरफ कनाडा के आव्रजन विभाग का कहना है कि वर्क परमिट की पात्रता से जुड़े नियमों में इस मामले को लेकर कोई अचानक बदलाव नहीं किया गया है। विभाग ने गैर-प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों से संबंधित मौजूदा पात्रता नियमों की ओर ध्यान दिलाया है।
सरकारी पक्ष के अनुसार, पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट हर पाठ्यक्रम या हर प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम के लिए स्वतः उपलब्ध नहीं होता। इसके लिए निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करना जरूरी है। इसी आधार पर विभाग ने विद्यार्थियों के आवेदन पर निर्णय लिए हैं।
पोर्टेज कॉलेज की ओर से भी मामले को लेकर आव्रजन अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। कॉलेज ने प्रभावित विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे अपनी स्थिति को समझने के लिए अधिकृत इमिग्रेशन विशेषज्ञों से सलाह लें। इससे यह संकेत मिलता है कि कॉलेज और विद्यार्थियों के बीच भी इस मामले को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
कैलगरी में प्रदर्शन के दौरान पहुंची CBSA
वर्क परमिट विवाद ने अगस्त में उस समय नया मोड़ लिया, जब कैलगरी में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के बीच CBSA के अधिकारी पहुंचे। 12 अगस्त को सैडलटाउन इलाके में चल रहे प्रदर्शन के दौरान सीमा सेवा एजेंसी के अधिकारियों ने कुछ प्रदर्शनकारियों की इमिग्रेशन स्थिति की जांच की।
एजेंसी के मुताबिक, शुरुआत में पुलिस के अनुरोध पर चार लोगों की इमिग्रेशन स्थिति की जांच की गई थी। इसके बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद कुल 20 लोगों की स्थिति की भी जांच की गई। इनमें से 12 लोगों की स्थिति ऐसी पाई गई, जिनके कनाडा में रहने के अधिकार को लेकर आगे जांच की जरूरत बताई गई।
इन लोगों को CBSA कार्यालय में आगे की पूछताछ के लिए उपस्थित होने को कहा गया। अधिकारियों की इस कार्रवाई के बाद वहां चल रहा प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया। हालांकि, विद्यार्थियों के बीच इस घटना को लेकर चिंता बनी रही और उनका कहना था कि वर्क परमिट की मांग को लेकर किए जा रहे प्रदर्शन के बीच इमिग्रेशन अधिकारियों की मौजूदगी ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया।
अब एडमिंटन में भी सामने आया मामला
कैलगरी की घटना के कुछ ही दिनों बाद एडमिंटन में भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली। मिल वुड्स इलाके में विद्यार्थी वर्क परमिट से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान सीमा अधिकारियों के वहां पहुंचने की खबर सामने आई।
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, अधिकारियों ने प्रदर्शन में शामिल विद्यार्थियों से उनके इमिग्रेशन स्टेटस और कनाडा में रहने की वैधता से संबंधित सवाल किए। कम से कम सात पंजाबी युवाओं से पूछताछ किए जाने की बात सामने आई है।
एडमिंटन में छात्र जुलाई के आखिरी दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। खराब मौसम और भारी बारिश के बावजूद कई विद्यार्थियों ने अपना धरना जारी रखा। उनका कहना है कि वे कनाडा में अपनी शिक्षा पूरी करने के लिए पहले ही बड़ी रकम खर्च कर चुके हैं। अब अगर पढ़ाई के बाद उन्हें काम करने का अधिकार नहीं मिलता, तो उनके लिए आगे की जिंदगी और आर्थिक स्थिति दोनों मुश्किल हो सकती हैं।
कई छात्रों को देश छोड़ने की चिंता
विद्यार्थियों की परेशानी केवल नौकरी नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। कुछ छात्रों का कहना है कि वर्क परमिट आवेदन खारिज होने के बाद उन्हें कनाडा में रहने की समय सीमा से संबंधित नोटिस भी मिले हैं। ऐसे में उन्हें यह डर सताने लगा है कि अगर उन्हें राहत नहीं मिली तो उन्हें कनाडा छोड़ना पड़ सकता है।
कई विद्यार्थियों ने कनाडा आने के लिए अपनी बचत खर्च की, जबकि कुछ परिवारों ने बच्चों की पढ़ाई के लिए कर्ज लेकर रकम जुटाई। छात्रों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल पढ़ाई करना नहीं था, बल्कि शिक्षा पूरी करने के बाद कुछ समय काम करके अपने खर्चों को संभालना और भविष्य के लिए अनुभव हासिल करना भी था।
उनका दावा है कि यदि उन्हें शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया जाता कि संबंधित पाठ्यक्रम के बाद वर्क परमिट मिलने की संभावना नहीं है, तो वे अलग विकल्प चुन सकते थे। इसी वजह से विद्यार्थी केवल अपने व्यक्तिगत मामलों में राहत नहीं चाहते, बल्कि कॉलेज और इमिग्रेशन सिस्टम के बीच जानकारी की पारदर्शिता पर भी सवाल उठा रहे हैं।
छात्रों की क्या हैं मांगें?
प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों की सबसे बड़ी मांग है कि उनके वर्क परमिट आवेदनों की दोबारा समीक्षा की जाए। उनका कहना है कि जिन छात्रों ने दाखिले के समय उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपना कोर्स चुना और पूरी पढ़ाई की, उनके मामलों को अलग तरीके से देखा जाना चाहिए।
विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने कनाडा आने से पहले अपने कोर्स, फीस और भविष्य की संभावनाओं के बारे में जानकारी हासिल की थी। अगर बाद में उन्हें यह पता चलता है कि उनका कार्यक्रम वर्क परमिट के लिए पात्र नहीं है, तो इसका पूरा आर्थिक नुकसान छात्रों पर डालना उचित नहीं है।
वे सरकार और आव्रजन अधिकारियों से स्पष्ट जवाब चाहते हैं कि उनके आवेदन क्यों अस्वीकार हुए और क्या प्रभावित विद्यार्थियों के मामलों में किसी तरह की समीक्षा या राहत की व्यवस्था की जा सकती है।
विवाद के बीच बढ़ी असुरक्षा
कैलगरी और एडमिंटन की घटनाओं ने भारतीय छात्रों के बीच असुरक्षा की भावना को और बढ़ाया है। खासकर पंजाब से बड़ी संख्या में विद्यार्थी कनाडा में पढ़ाई करने जाते हैं। ऐसे में वर्क परमिट से जुड़ा यह विवाद वहां मौजूद पंजाबी समुदाय के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।
विद्यार्थियों का कहना है कि वे नियमों का पालन करते हुए अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं और कानूनी तरीके से काम करने का अवसर चाहते हैं। उनका विरोध मुख्य रूप से इस बात को लेकर है कि जिस विकल्प की उम्मीद में उन्होंने शिक्षा पर बड़ी रकम खर्च की, वह पढ़ाई पूरी होने के बाद उनके लिए उपलब्ध नहीं रह गया।
फिलहाल, एक तरफ विद्यार्थी अपने आवेदन पर पुनर्विचार और स्पष्ट समाधान की मांग कर रहे हैं, वहीं कनाडाई आव्रजन विभाग मौजूदा पात्रता नियमों को आधार बनाकर फैसलों का बचाव कर रहा है। पोर्टेज कॉलेज की ओर से अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगे जाने के बाद अब छात्रों की नजर इस बात पर है कि आगे सरकार और संबंधित विभाग इस विवाद का क्या समाधान निकालते हैं।
जब तक इस मामले में स्पष्टता नहीं आती, प्रभावित विद्यार्थियों के लिए वर्क परमिट, कनाडा में रहने की वैधता और उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। प्रदर्शन कर रहे छात्र चाहते हैं कि सरकार उनकी स्थिति को केवल नियमों के आधार पर नहीं, बल्कि उन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए भी देखे, जिनमें उन्होंने कनाडा में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी की।