भारत अब सिर्फ हथियार खरीदने वाला देश नहीं रहा, बल्कि तेजी से रक्षा उपकरण बेचने वाले देशों की सूची में भी अपनी मजबूत जगह बना रहा है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने हाल ही में कहा कि आने वाले 25 से 30 वर्षों में भारत दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक बनने की क्षमता रखता है। शिरडी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने भरोसा जताया कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता को अब कोई नहीं रोक सकता।
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश का डिफेंस एक्सपोर्ट लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है। पिछले वित्तीय वर्ष में भारत ने करीब 38,424 करोड़ रुपये के रक्षा उत्पाद विदेशों को बेचे, जो इससे पिछले साल की तुलना में लगभग 62 फीसदी ज्यादा है। साल 2024-25 में यह आंकड़ा करीब 23,622 करोड़ रुपये था। अगर एक दशक पहले की बात करें तो 2014-15 में भारत का रक्षा निर्यात बेहद सीमित था, लेकिन अब इसमें करीब 30 गुना तक की बढ़ोतरी दर्ज की जा चुकी है।
भारत के बढ़ते रक्षा कारोबार में सरकारी कंपनियों की बड़ी भूमिका रही है। कुल निर्यात में लगभग 55 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों की रही, जबकि निजी कंपनियों ने भी लगभग 45 प्रतिशत योगदान दिया। अब कई भारतीय स्टार्टअप्स भी आधुनिक सैन्य तकनीक और हाईटेक डिफेंस सिस्टम तैयार कर रहे हैं, जिनकी विदेशी बाजारों में मांग तेजी से बढ़ रही है।
किन हथियारों की सबसे ज्यादा मांग?
भारत की सबसे चर्चित रक्षा तकनीकों में BrahMos Missile का नाम सबसे ऊपर आता है। भारत और रूस की साझेदारी में विकसित यह सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल दुनिया की सबसे तेज ऑपरेशनल मिसाइलों में गिनी जाती है। इसकी गति आवाज की रफ्तार से लगभग तीन गुना तक पहुंच जाती है। इसे जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और लड़ाकू विमान से लॉन्च किया जा सकता है।
इसके अलावा Akash Missile System भी विदेशों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यह स्वदेशी एयर डिफेंस सिस्टम एक साथ कई टारगेट ट्रैक और लॉक करने की क्षमता रखता है। वहीं Pinaka Rocket System मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर को भी कई देशों ने पसंद किया है।
भारत की नई पीढ़ी की भारी तोप ATAGS भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में चर्चा में है। यह लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम आधुनिक आर्टिलरी सिस्टम है, जिसमें डिजिटल फायर कंट्रोल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। SWATI Radar जैसे वेपन लोकेटिंग रडार दुश्मन की फायरिंग की सटीक लोकेशन पकड़ सकते हैं। इसके अलावा नाइट विजन सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण, सैन्य कम्युनिकेशन सिस्टम और डेटा मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी की भी वैश्विक बाजार में अच्छी मांग है।
नौसेना और हेलीकॉप्टरों की भी बढ़ रही डिमांड
भारत अब पेट्रोल वेसल, सपोर्ट शिप और छोटे युद्धपोत भी तैयार कर रहा है। हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों ने भारतीय नौसैनिक प्लेटफॉर्म में दिलचस्पी दिखाई है। इसके साथ ही भारत में बने हल्के और मध्यम श्रेणी के हेलीकॉप्टरों का उपयोग सैनिकों की आवाजाही, मेडिकल रेस्क्यू और पहाड़ी इलाकों में ऑपरेशन के लिए किया जा रहा है।
भारतीय गोला-बारूद, ड्रोन, निगरानी उपकरण और स्पेयर पार्ट्स भी कई देशों तक पहुंच रहे हैं। खासकर Defence Research and Development Organisation यानी DRDO द्वारा विकसित तकनीकों को विदेशी बाजार में अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
कौन-कौन से देश खरीद रहे भारतीय हथियार?
भारत से रक्षा उपकरण खरीदने वाले देशों की सूची लगातार लंबी हो रही है। Armenia ने भारत से आकाश मिसाइल, पिनाका सिस्टम और ATAGS तोपों की बड़ी खेप खरीदी है। वहीं Philippines ने ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम का सौदा किया है।
दिलचस्प बात यह है कि United States जैसे बड़े रक्षा निर्यातक देश भी भारत से एयरक्राफ्ट पार्ट्स और कुछ सैन्य कंपोनेंट खरीद रहे हैं। इसके अलावा France, Nepal, Sri Lanka, Maldives, Saudi Arabia, Vietnam और Indonesia जैसे देश भी भारत से रक्षा उपकरण और सैन्य तकनीक खरीद रहे हैं।
भारत कैसे बन रहा बड़ा रक्षा निर्यातक?
सरकार की आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत हजारों रक्षा उत्पादों को स्वदेशी बनाया जा चुका है। निजी कंपनियों को प्रोत्साहन, FDI में राहत और निर्यात को बढ़ावा देने वाली योजनाओं का फायदा भी भारत को मिल रहा है। कई देश अब अमेरिका, रूस और चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं और ऐसे में भारत एक भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।
इसी वजह से सरकार ने 2029-30 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है।
(Photo : AI Generated)