गाजा पट्टी में इजराइल अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत करने की तैयारी में है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि मौजूदा नियंत्रण क्षेत्र को बढ़ाकर करीब 70 प्रतिशत इलाके तक ले जाया जाएगा। यह बयान उन्होंने वेस्ट बैंक में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया।
नेतन्याहू ने कहा कि इजराइली सेना लगातार हमास पर दबाव बना रही है और अब तक गाजा के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर चुकी है। उन्होंने बताया कि पहले सेना का प्रभाव सीमित क्षेत्र तक था, लेकिन धीरे-धीरे इसका विस्तार किया गया है। इसी दौरान सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने पूरे गाजा पर कब्जे की बात कही, जिस पर नेतन्याहू ने जवाब दिया कि फिलहाल चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा जा रहा है।
इस बीच, इजराइल की यह रणनीति अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम समझौते को लेकर नई बहस खड़ी कर रही है। समझौते के अनुसार सेना को निर्धारित सीमा रेखा के पीछे जाना था, लेकिन हमास का आरोप है कि इजराइल धीरे-धीरे अपने प्रभाव वाले क्षेत्र को और अंदर तक बढ़ा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वर्तमान में गाजा के 60 से 64 प्रतिशत हिस्से पर इजराइली नियंत्रण मौजूद है।
मानवीय संगठनों और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि नियंत्रण का दायरा 70 प्रतिशत तक पहुंच गया, तो गाजा की लगभग 22 लाख आबादी को बेहद सीमित क्षेत्र में रहने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। पहले से ही युद्ध और लगातार विस्थापन के कारण अधिकांश इलाके प्रभावित हैं और राहत शिविरों में भीड़ बढ़ती जा रही है।
यूरोपियन काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस से जुड़े विश्लेषक मुहम्मद शेहादा के अनुसार, गाजा में खाली स्थान लगभग समाप्त हो चुके हैं और बड़ी संख्या में विस्थापित परिवार अस्थायी टेंटों में रह रहे हैं। उनका कहना है कि यदि रहने योग्य क्षेत्र और घटा, तो मानवीय संकट और गंभीर हो सकता है।
दूसरी ओर, युद्धविराम लागू होने के कई महीने बाद भी गाजा में हिंसा पूरी तरह नहीं थमी है। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों का दावा है कि सीजफायर के बाद से करीब 900 फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की हालिया रिपोर्टों में भी उत्तरी गाजा के कुछ इलाकों में सैन्य गतिविधियों और ड्रोन निगरानी बढ़ने की बात कही गई है।
फिलहाल इजराइल और हमास के बीच अगले चरण की शांति वार्ता रुकी हुई है। प्रस्तावित योजना में हमास के हथियार छोड़ने और इजराइली सेना की वापसी जैसे मुद्दे शामिल हैं, लेकिन दोनों पक्षों के बीच किसी सहमति के संकेत अभी नजर नहीं आ रहे हैं।