पंजाब के संगरूर जिले में गुलजार सिंह की मौत का मामला लगातार राजनीतिक तकरार का केंद्र बना हुआ है। इसी बीच भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और राज्यसभा सांसद तरुण चुघ ने तूरबंजारा गांव पहुंचकर गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों से घटना की जानकारी ली और उन्हें हर संभव कानूनी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
परिवार से मुलाकात के बाद चुघ ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि राज्य में आम लोगों की आवाज दबाई जा रही है। उन्होंने गुलजार सिंह की मौत को सामान्य आत्महत्या का मामला मानने से इनकार किया और कहा कि उपलब्ध तथ्यों तथा मृतक के कथित अंतिम बयान की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
चुघ ने दावा किया कि गुलजार सिंह ने अपने आखिरी बयान में कुछ लोगों का नाम लिया था। भाजपा नेता की मांग है कि उस बयान को जांच का अहम हिस्सा बनाते हुए तत्काल उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। हालांकि, इस मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
परिवार से मिलने पहुंचे भाजपा सांसद
तरुण चुघ बुधवार को तूरबंजारा गांव पहुंचे। यहां उन्होंने गुलजार सिंह की पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों से बातचीत की। परिवार के सदस्यों ने उन्हें घटना से जुड़ी अपनी बात बताई और कार्रवाई की मांग रखी।
गुलजार सिंह की मौत के बाद से ही उनका परिवार मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है। इससे पहले परिवार की ओर से अंतिम संस्कार को लेकर भी प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। परिवार का कहना था कि अंतिम संस्कार उनकी सहमति के बिना कराया गया। इस दावे को लेकर भी विवाद खड़ा हुआ था।
चुघ ने परिवार को भरोसा दिलाया कि भाजपा इस मामले को उठाती रहेगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी स्तर पर भी सहायता की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
चुघ बोले- ‘यह सिर्फ आत्महत्या का मामला नहीं’
मुलाकात के दौरान तरुण चुघ ने गुलजार सिंह की मौत को लेकर अपनी बात स्पष्ट रूप से रखी। उन्होंने कहा कि उनकी नजर में यह केवल आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे की परिस्थितियों की गंभीर जांच होनी चाहिए।
चुघ ने आरोप लगाया कि गुलजार सिंह ने अपनी मौत से पहले जो बातें कहीं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। भाजपा नेता के मुताबिक, मृतक के बयान में एक कैबिनेट मंत्री का नाम सामने आया है। इसी आधार पर उन्होंने पुलिस से कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने मृत्यु से पहले किसी घटना या व्यक्ति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं तो जांच एजेंसियों को उन आरोपों की पूरी तरह पड़ताल करनी चाहिए। उनके मुताबिक, जांच का उद्देश्य किसी को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना नहीं, बल्कि वास्तविक घटनाक्रम सामने लाना होना चाहिए।
हालांकि, इस मामले में पंजाब की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश बताया है। AAP नेताओं ने गुलजार सिंह की मौत की परिस्थितियों और सामने आए वीडियो की भी जांच की मांग की है।
नशे के मुद्दे से जुड़ा है पूरा विवाद
गुलजार सिंह की मौत का मामला पंजाब में नशे की समस्या को लेकर चल रही राजनीतिक बहस से भी जुड़ गया है। रिपोर्टों के अनुसार, गुलजार सिंह ने 6 सितंबर को दिरबा क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से अपने इलाके में कथित तौर पर नशे की उपलब्धता को लेकर सवाल किया था।
परिवार का आरोप है कि इस घटना के बाद गुलजार सिंह पर दबाव बनाया गया और उन्हें अपमानित किया गया। इसके बाद उन्होंने कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया और उनकी मौत हो गई। इन आरोपों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार को घेर रहा है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब गुलजार सिंह से जुड़े कथित वीडियो सामने आए। विपक्षी दलों ने इन वीडियो का हवाला देते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की। वहीं, AAP की ओर से वीडियो की परिस्थितियों पर ही सवाल उठाए गए और कहा गया कि यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि वीडियो किन परिस्थितियों में बनाए गए थे।
परिवार ने उठाए अंतिम संस्कार पर सवाल
गुलजार सिंह की मौत के बाद अंतिम संस्कार को लेकर भी विवाद सामने आया। परिवार के सदस्यों ने दावा किया कि प्रशासन ने उनकी इच्छा के अनुरूप अंतिम संस्कार नहीं होने दिया। परिवार की ओर से यह भी कहा गया कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, वे परंपरागत भोग की रस्म और अस्थियां एकत्र करने की प्रक्रिया को लेकर आगे नहीं बढ़ेंगे।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, परिवार ने गुलजार सिंह की ओर से मृत्यु से पहले कथित तौर पर लिए गए नामों पर कार्रवाई की मांग की थी। परिवार का कहना था कि जिन लोगों पर उन्होंने आरोप लगाए हैं, उनके खिलाफ निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
दूसरी ओर, प्रशासन और सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से मामले को लेकर अलग दावे सामने आए हैं। इसलिए अंतिम संस्कार से जुड़े घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति भी जांच के दायरे में है।
पांच लोगों पर केस दर्ज होने की बात
इस मामले में पुलिस कार्रवाई भी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, गुलजार सिंह के परिवार की शिकायत के आधार पर पांच लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 108 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके साथ ही अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराएं भी लगाई गई हैं।
धारा 108 आत्महत्या के लिए उकसाने से संबंधित है। ऐसे में पुलिस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गुलजार सिंह की मौत से पहले उनके साथ क्या घटनाक्रम हुआ था और क्या किसी तरह का दबाव या उत्पीड़न उनकी मौत से जुड़ा था।
इसी कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए भाजपा नेता चाहते हैं कि गुलजार सिंह के कथित अंतिम बयान और वीडियो को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाए।
चुघ ने पंजाब सरकार पर साधा निशाना
परिवार से मुलाकात के बाद तरुण चुघ ने पंजाब की कानून-व्यवस्था और नशे की स्थिति को लेकर सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नशे के खिलाफ सरकार की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और आम लोगों को इसके खिलाफ आवाज उठाने पर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
चुघ ने पंजाब सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला करते हुए कहा कि राज्य में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। उन्होंने ऐतिहासिक शासकों का संदर्भ देते हुए सरकार पर अत्याचार का आरोप लगाया और कहा कि मौजूदा हालात चिंता पैदा करने वाले हैं।
भाजपा नेता ने यह भी दावा किया कि पंजाब में नशे की समस्या बढ़ रही है और सरकार का नशा विरोधी अभियान केवल प्रचार तक सीमित है। हालांकि, ये चुघ के राजनीतिक आरोप हैं और सरकार की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है।
AAP ने विपक्ष पर लगाया राजनीति का आरोप
गुलजार सिंह की मौत को लेकर जहां भाजपा और कांग्रेस समेत विपक्षी दल सरकार पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं आम आदमी पार्टी ने विपक्ष पर इस मामले को राजनीतिक मुद्दा बनाने का आरोप लगाया है।
AAP नेताओं ने कहा है कि मृतक के परिवार को इस मुश्किल समय में राजनीतिक गतिविधियों से दूर रखते हुए सम्मान के साथ शोक मनाने दिया जाना चाहिए। पार्टी की ओर से सामने आए कथित वीडियो की परिस्थितियों की जांच की बात भी कही गई है। AAP ने यह भी कहा है कि नशे के कारोबार से जुड़े किसी व्यक्ति को राजनीतिक संरक्षण नहीं दिया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।
इस तरह गुलजार सिंह की मौत अब केवल एक आपराधिक जांच का मामला नहीं रह गई है, बल्कि पंजाब में नशे, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर भी बड़ी बहस का विषय बन गई है।
जांच के नतीजे से साफ होगी तस्वीर
गुलजार सिंह की मौत को लेकर अलग-अलग पक्षों की ओर से अलग दावे सामने आए हैं। परिवार जहां अपने आरोपों और कथित अंतिम बयान के आधार पर कार्रवाई चाहता है, वहीं सत्तारूढ़ दल ने कुछ आरोपों पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की बात कही है।
ऐसे में पूरे मामले में पुलिस जांच, दर्ज FIR, कथित वीडियो, मृतक के अंतिम बयान और परिवार के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी मामले में गुलजार सिंह का कथित dying declaration, इनक्वेस्ट रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं।
तरुण चुघ ने परिवार को कानूनी मदद का भरोसा देते हुए कहा कि मामले को दबने नहीं दिया जाएगा। अब निगाहें जांच की आगे की कार्रवाई पर हैं। यह जांच ही तय करेगी कि गुलजार सिंह की मौत की परिस्थितियां क्या थीं, लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और जिम्मेदारी किन लोगों की बनती है।