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चैत्र नवरात्रि 2026 का शुभारंभ आज: घटस्थापना के 2 मुहूर्त, जानें पहले दिन की पूजा विधि, मंत्र और भोग

आज से पवित्र चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो गई है और पूरे देश में भक्तिभाव का माहौल छा गया है। यह नौ दिनों तक चलने वाला पर्व शक्ति की उपासना का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा की जाती है। हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी इसी पर्व से मानी जाती है, इसलिए इसे नई ऊर्जा, सकारात्मकता और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ देखने को मिल रही है, वहीं घरों में भी श्रद्धालु व्रत रखकर पूजा-अर्चना में जुट गए हैं।

नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है, जिसे पूरे विधि-विधान के साथ करना जरूरी माना जाता है। इस बार घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त बताए गए हैं। पहला शुभ समय सुबह 6:52 बजे से 10:10 बजे तक है, जबकि जो लोग इस समय में स्थापना नहीं कर पाते, वे अभिजीत मुहूर्त यानी लगभग 11:47 बजे से 12:36 बजे के बीच भी कलश स्थापना कर सकते हैं। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में की गई स्थापना से घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है।

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री की पूजा को समर्पित होता है, जिन्हें पर्वतराज हिमालय की पुत्री माना जाता है। पूजा की शुरुआत सुबह स्नान करके साफ और शुद्ध वस्त्र धारण करने से की जाती है। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर एक मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं, जो उन्नति और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। फिर कलश में जल भरकर उसे आम के पत्तों और नारियल से ढककर स्थापित किया जाता है। मां शैलपुत्री की प्रतिमा या चित्र को स्थापित कर उन्हें फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं और पूरे श्रद्धाभाव से पूजा की जाती है।

इस दिन विशेष रूप से घी का भोग लगाने का महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां को शुद्ध घी अर्पित करने से भक्त को रोगों से मुक्ति मिलती है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। साथ ही इस दिन “ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः” मंत्र का जाप अत्यंत फलदायी माना गया है। कई श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं, जिससे घर में सकारात्मकता और शांति बनी रहती है।

चैत्र नवरात्रि का महत्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मशुद्धि, संयम और साधना का भी समय होता है। इन नौ दिनों में लोग सात्विक भोजन करते हैं, मन और विचारों को शुद्ध रखने का प्रयास करते हैं और आध्यात्मिक उन्नति की ओर कदम बढ़ाते हैं। इस बार नवरात्रि खरमास के दौरान पड़ रही है, जिसके चलते विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों से परहेज किया जाता है, लेकिन पूजा-पाठ और भक्ति का महत्व और भी बढ़ जाता है।

देशभर में इस पर्व को लेकर खास उत्साह देखने को मिल रहा है। बाजारों में पूजा सामग्री की खरीदारी तेज हो गई है, मंदिरों को सजाया गया है और भक्ति गीतों से वातावरण भक्तिमय हो उठा है। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा करेंगे और 27 मार्च को राम नवमी के साथ इस पावन पर्व का समापन होगा, जो भगवान राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।