देश के छोटे शहरों और कस्बों में एटीएम सेवाएं प्रभावित होने का खतरा बढ़ता जा रहा है। एटीएम उद्योग से जुड़े संगठनों ने चेतावनी दी है कि नकदी की असमान आपूर्ति के कारण कई मशीनें बंद पड़ सकती हैं। इस मुद्दे को लेकर कन्फेडरेशन ऑफ एटीएम इंडस्ट्री (CATMi) ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सामने अपनी चिंता रखी है।
उद्योग संगठन का आरोप है कि देश का सबसे बड़ा सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), महानगरों और बड़े शहरों के एटीएम में जरूरत से अधिक नकदी उपलब्ध करा रहा है। इसके चलते टियर-2 और टियर-3 शहरों में कैश की उपलब्धता घट रही है, जिससे ग्राहकों को बार-बार खाली एटीएम का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट्स के अनुसार 5 जून को RBI और SBI के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में एटीएम ऑपरेटरों ने इस समस्या को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना है कि SBI का देशभर में करीब 65 हजार एटीएम का विशाल नेटवर्क है और बैंक अपने बड़े हिस्से में खुद नकदी प्रबंधन करता है। हालांकि इसका अधिक लाभ बड़े शहरों को मिल रहा है, जबकि छोटे इलाकों में कैश की कमी महसूस की जा रही है।
एटीएम कंपनियों का दावा है कि मशीनों में नकदी न होने के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। एटीएम बंद रहने से ट्रांजैक्शन कम हो जाते हैं, जिससे इंटरचेंज फीस और अन्य आय के स्रोत प्रभावित होते हैं। उद्योग का अनुमान है कि अब तक 100 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है।
CATMi ने बैंकिंग सेक्टर से इस नुकसान की भरपाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि 20 जून तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो देश के कई छोटे शहरों में बड़ी संख्या में एटीएम सेवाएं ठप हो सकती हैं। पहले से ही कम मार्जिन पर काम कर रहे ऑपरेटरों के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है।
उधर, एटीएम संचालन की लागत भी लगातार बढ़ रही है। न्यूनतम वेतन में वृद्धि और ईंधन की ऊंची कीमतों ने खर्च बढ़ा दिया है। वहीं नकदी निकासी में गिरावट देखने को मिली है। जनवरी 2023 में जहां एटीएम से मासिक निकासी करीब 570 मिलियन थी, वहीं सितंबर 2025 तक यह घटकर 439.5 मिलियन रह गई। इसी दौरान देश में एटीएम की कुल संख्या भी कम हुई है और इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण तथा छोटे शहरी क्षेत्रों में देखने को मिला है।