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जकार्ता से पीएम मोदी का संदेश: भारत-इंडोनेशिया साझेदारी को मिली नई गति, 20 अहम समझौतों पर बनी सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने का संकेत दिया है। जकार्ता में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया का रिश्ता केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सभ्यताओं, समुद्री संपर्क और आपसी विश्वास की मजबूत नींव पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि जब दोनों देश साथ मिलकर आगे बढ़ते हैं तो उसके परिणाम केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं रहते, बल्कि पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सकारात्मक प्रभाव दिखाई देता है।

अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत की आर्थिक प्रगति, डिजिटल क्रांति, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और वैश्विक स्तर पर बढ़ती भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने कई ऐसे मॉडल विकसित किए हैं, जिन्हें दुनिया के कई देश अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।

इस यात्रा के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच कुल 20 महत्वपूर्ण समझौतों पर सहमति बनी। इन समझौतों में रक्षा, शिक्षा, अंतरिक्ष, तकनीक, समुद्री सहयोग, व्यापार और निवेश जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने भविष्य में रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाने का संकल्प भी दोहराया।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भी प्रधानमंत्री मोदी की खुलकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने कई ऐसी जनकल्याणकारी और विकास योजनाएं लागू की हैं, जिन्होंने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि वे भारत के सफल मॉडलों से प्रेरणा लेकर अपने देश में भी इसी प्रकार के सुधार लागू करना चाहते हैं। उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अच्छा है इन योजनाओं पर कोई कॉपीराइट नहीं है, इसलिए दूसरे देश भी उनसे सीख सकते हैं। उनके इस बयान पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों से स्वागत किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत और इंडोनेशिया के संबंधों की असली ताकत दोनों देशों के लोगों के बीच मौजूद विश्वास है। उन्होंने कहा कि सदियों पहले समुद्री मार्गों से दोनों देशों के बीच केवल व्यापार ही नहीं हुआ, बल्कि संस्कृति, परंपरा और विचारों का भी आदान-प्रदान हुआ। बौद्ध भिक्षुओं, व्यापारियों और यात्रियों ने दोनों देशों को एक-दूसरे के और करीब लाने का कार्य किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी यही विश्वास दोनों देशों की साझेदारी का आधार है। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भारत और इंडोनेशिया एक-दूसरे के विश्वसनीय सहयोगी बनकर उभर रहे हैं। उन्होंने इस साझेदारी को भविष्य की जरूरत बताते हुए कहा कि आर्थिक, सामरिक और तकनीकी क्षेत्रों में दोनों देशों के पास साथ मिलकर आगे बढ़ने की बड़ी संभावनाएं हैं।

रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग को नई मजबूती मिली है। भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की अतिरिक्त यूनिट उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही इंडोनेशिया उन देशों की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने भारत की इस स्वदेशी रक्षा प्रणाली को अपनाया है। इससे पहले फिलीपींस और वियतनाम भी ब्रह्मोस प्रणाली हासिल कर चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रक्षा सहयोग को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने भारत की डिजिटल क्रांति का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया के कुल डिजिटल लेनदेन का लगभग आधा हिस्सा भारत में होता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने आम नागरिकों के जीवन को आसान बनाया है। मोबाइल आधारित भुगतान व्यवस्था के कारण लोगों की बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल हुई है। उन्होंने कहा कि देश में हर महीने करोड़ों डिजिटल ट्रांजैक्शन किए जा रहे हैं और डिजिटल अर्थव्यवस्था लगातार विस्तार कर रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वैश्विक रैंकिंग में भारतीय विश्वविद्यालयों की उपस्थिति लगातार बढ़ रही है। साथ ही सेमीकंडक्टर निर्माण, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में भी देश उल्लेखनीय प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि इंडोनेशिया में भारतीय प्रबंधन शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आईआईएम बेंगलुरु का सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

अंतरिक्ष सहयोग का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया के बीच इस क्षेत्र में पहले से मजबूत संबंध रहे हैं। अब दोनों देशों ने संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी सहयोग और नई परियोजनाओं पर मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। इससे वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के माध्यम से बेहद कम प्रीमियम पर दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे करोड़ों लोग लाभान्वित हुए हैं। इसी तरह प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के जरिए भी बड़ी संख्या में लोगों को जीवन बीमा का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया जा चुका है, जिससे संकट की घड़ी में लाखों परिवारों को सहायता मिली।

उन्होंने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रणाली का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार ने तकनीक का उपयोग कर विभिन्न योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था विकसित की है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और बिचौलियों की भूमिका काफी हद तक समाप्त हुई है।

भारत की आर्थिक स्थिति पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि महामारी और अंतरराष्ट्रीय संकटों के दौरान भी भारत ने विकास की गति बनाए रखी। बुनियादी ढांचे में निवेश, सुधारों और नवाचार ने देश की आर्थिक क्षमता को मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले देशों में शामिल है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पिछले एक दशक में करोड़ों परिवारों को पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं और सामाजिक सुरक्षा का दायरा पहले की तुलना में कई गुना बढ़ा है। सरकार का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाना है।

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री को इंडोनेशिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान से भी सम्मानित किया गया, जिसे दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और मजबूत संबंधों का प्रतीक माना जा रहा है। इसे भारत और इंडोनेशिया की मित्रता के नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

बुधवार को प्रधानमंत्री का इंडोनेशिया के प्रसिद्ध प्रम्बानन हिंदू मंदिर का दौरा भी प्रस्तावित है। एक हजार वर्ष से अधिक पुराने इस ऐतिहासिक मंदिर को दक्षिण-पूर्व एशिया की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करना भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा समय में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र वैश्विक राजनीति और व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है। ऐसे में भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ता सहयोग केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को भी नई मजबूती देगा। रक्षा सहयोग, तकनीकी भागीदारी, शिक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और व्यापार जैसे क्षेत्रों में हुए समझौते आने वाले वर्षों में दोनों देशों के रिश्तों को और गहरा बना सकते हैं।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा केवल औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि इसने यह संदेश दिया कि भारत और इंडोनेशिया भविष्य की चुनौतियों का सामना साझेदारी, विश्वास और साझा विकास के माध्यम से करना चाहते हैं। दोनों देशों के बीच हुए समझौते और नेताओं के सकारात्मक संदेश इस बात का संकेत हैं कि आने वाले समय में यह संबंध और अधिक व्यापक तथा मजबूत रूप ले सकते हैं।