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The Scoopp

 

जानिए क्या है बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट और क्यों यह पूरी दुनिया के लिए इतना अहम समुद्री रास्ता है

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच एक अहम समुद्री मार्ग ‘बाब-अल-मंडेब’ अचानक चर्चा में आ गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अमेरिका को साफ संकेत दिया है कि यदि उसके खार्ग आइलैंड पर दोबारा हमला हुआ, तो वह इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को बंद करने जैसा बड़ा कदम उठा सकता है। इस चेतावनी ने वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।

क्या है बाब-अल-मंडेब और क्यों है इतना अहम?

बाब-अल-मंडेब एक संकीर्ण समुद्री मार्ग है जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे अरब सागर से जोड़ता है। यह यमन और अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र (जिबूती और इरिट्रिया) के बीच स्थित है। यह रास्ता यूरोप, एशिया और अफ्रीका के बीच व्यापार का एक प्रमुख कनेक्शन है, ठीक वैसे ही जैसे होर्मुज जलडमरूमध्य।

तेल और गैस सप्लाई के लिए कितना महत्वपूर्ण?

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से यह रूट बेहद अहम है। आंकड़ों के मुताबिक, दुनिया में समुद्री रास्तों से जाने वाले तेल और LNG का करीब 12% इसी रास्ते से गुजरता है। साल 2023 में रोजाना लगभग 8.8 मिलियन बैरल तेल इस मार्ग से ट्रांसपोर्ट किया गया। स्वेज नहर जाने वाले जहाजों के लिए भी यह एक जरूरी कड़ी है।

अगर रास्ता बंद हुआ तो क्या होगा असर?

अगर बाब-अल-मंडेब को ब्लॉक कर दिया जाता है, तो जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी सिरे केप ऑफ गुड होप से होकर लंबा रास्ता लेना पड़ेगा। इससे यात्रा 10-15 दिन तक और बढ़ सकती है। इसका सीधा असर माल ढुलाई की लागत पर पड़ेगा, जिससे दुनियाभर में सामान महंगा हो सकता है और सप्लाई चेन भी प्रभावित होगी।

हूती विद्रोहियों की भूमिका भी अहम

यमन में सक्रिय हूती विद्रोही पहले ही लाल सागर में जहाजों को निशाना बना चुके हैं। इन्हें ईरान का सहयोगी माना जाता है। ऐसे में अगर ईरान कोई बड़ा कदम उठाता है, तो हूती विद्रोही भी इस मार्ग को बाधित करने में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं।

वैश्विक व्यापार पर कितना बड़ा असर?

हर साल करीब 1 ट्रिलियन डॉलर का व्यापार इस समुद्री मार्ग से होता है। अगर यह रूट बाधित होता है, तो न केवल तेल की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि दुनिया भर में व्यापारिक गतिविधियों पर भी गहरा असर पड़ेगा।

आगे क्या?

मौजूदा हालात में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान अपनी चेतावनी को अमल में लाएगा। यदि ऐसा होता है, तो यह संकट केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक झटके में बदल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस रणनीतिक समुद्री रास्ते और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हैं।