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झारखंड में छात्रों का आंदोलन थमने के बजाय और तेज, CGL पर सरकार से नहीं बनी बात; विधानसभा घेराव का ऐलान

झारखंड में सरकारी परीक्षाओं को लेकर छात्रों और राज्य सरकार के बीच जारी टकराव फिलहाल खत्म होता नजर नहीं आ रहा है। पिछले तीन दिनों से सरकार और JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के प्रतिनिधियों के बीच लगातार बातचीत चल रही थी। सरकार का दावा है कि छात्रों की करीब 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति बन चुकी है और कई अहम फैसले भी लिए गए हैं। इसके बावजूद अभ्यर्थी आंदोलन समाप्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। सबसे बड़ा विवाद CGL परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को रद्द करने की मांग को लेकर बना हुआ है।

छात्रों का कहना है कि जब परीक्षाओं की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं तो केवल जांच का आश्वासन पर्याप्त नहीं है। वहीं सरकार का तर्क है कि CGL परीक्षा की प्रक्रिया पहले ही न्यायिक निगरानी में पूरी हुई है, इसलिए राज्य सरकार अपने स्तर पर इसे पूरी तरह रद्द नहीं कर सकती। इसी मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई।

अब आंदोलनकारी छात्रों ने अपना अगला कदम भी स्पष्ट कर दिया है। अभ्यर्थियों ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा भवन का घेराव करने का ऐलान किया है। इससे आंदोलन के और बड़ा रूप लेने की आशंका बढ़ गई है।

तीन दिनों की बातचीत के बाद भी नहीं निकला समाधान

JPSC-JSSC अभ्यर्थियों के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए सरकार की ओर से लगातार बातचीत की जा रही थी। पिछले तीन दिनों में कई दौर की बैठकें हुईं। इन बैठकों में परीक्षा में कथित गड़बड़ी, विवादित परीक्षाओं को रद्द करने और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

राज्य सरकार की ओर से मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बातचीत की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से लिया है और कई बिंदुओं पर निर्णय भी किया गया है। सरकार का कहना है कि उसने अभ्यर्थियों की लगभग 98 प्रतिशत मांगों को स्वीकार कर लिया है।

हालांकि, छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में से एक CGL परीक्षा को लेकर है। इसी बिंदु पर बातचीत अटक गई। छात्रों की ओर से परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को निरस्त करने की मांग रखी गई, जबकि सरकार ने इस मांग को स्वीकार करने में असमर्थता जताई।

14वीं JPSC परीक्षा को लेकर बड़ा फैसला

सरकार ने 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर कई महत्वपूर्ण कदम उठाने की बात कही है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के अनुसार, परीक्षा में कथित अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद राज्य में विभिन्न स्थानों पर कार्रवाई की गई।

उन्होंने बताया कि छापेमारी के दौरान डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए। संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। सरकार ने अब पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया है।

14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं, गलतियों और घोटाले की जांच झारखंड CID को सौंपने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि आपराधिक साजिश से जुड़े पहलुओं को जांच एजेंसी के जरिए खंगाला जाएगा।

इसके साथ ही सरकार ने जांच के वित्तीय पहलुओं की पड़ताल के लिए प्रवर्तन निदेशालय यानी ED को भी शामिल करने का संकेत दिया है। इसके लिए औपचारिक अनुरोध भेजे जाने की बात कही गई है।

JPSC चेयरमैन और सदस्यों के इस्तीफे का भी जिक्र

मंत्री ने यह भी बताया कि 14वीं JPSC परीक्षा विवाद के बीच आयोग के चेयरमैन और सभी सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया है। सरकार की ओर से इसे मामले में उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों में शामिल किया गया।

सरकार का कहना है कि परीक्षा व्यवस्था में अगर किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो उसके जिम्मेदार लोगों तक पहुंचना जरूरी है। इसी उद्देश्य से जांच को अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।

सरकार ने छात्रों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि जांच को लंबा खींचने के बजाय समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। इसी क्रम में CID को 90 दिनों के भीतर जांच पूरी करने का आश्वासन दिए जाने की बात सामने आई है।

बैकलॉग परीक्षाओं पर भी सरकार की सहमति

14वीं JPSC परीक्षा के साथ बैकलॉग से जुड़ी परीक्षाओं को लेकर भी सरकार ने छात्रों की मांग स्वीकार करने की बात कही है। सरकार के मुताबिक ‘बैकलॉग-23’ और ‘बैकलॉग-25’ परीक्षाओं को रद्द करने पर सहमति बन गई है।

इसके अलावा TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर भी सरकार ने गंभीर रुख अपनाया है। TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को देखते हुए उसकी ओर से आयोजित सभी परीक्षाओं की विस्तृत जांच कराने का निर्णय लिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान यदि व्यापक स्तर पर अनियमितताएं सामने आती हैं तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यानी अभी इन परीक्षाओं के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला जांच के परिणाम के आधार पर किया जाएगा।

CGL बना सबसे बड़ा विवाद

छात्र आंदोलन में CGL परीक्षा अब सबसे बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। मंत्री के अनुसार, आंदोलन की शुरुआत में छात्रों की प्रमुख चिंता JPSC परीक्षा को लेकर थी, लेकिन बाद में CGL की पूरी प्रक्रिया रद्द करने की मांग भी सामने आई।

सरकार ने छात्रों को बताया कि CGL परीक्षा की प्रक्रिया न्यायिक निगरानी में आगे बढ़ी है। राज्य सरकार का तर्क है कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हुई पूरी प्रक्रिया को केवल राज्य सरकार के स्तर पर एकतरफा तरीके से रद्द करना संभव नहीं है।

यही वह मुद्दा है जिस पर छात्रों और सरकार के बीच सहमति नहीं बन सकी। छात्रों का दबाव है कि विवादित परीक्षा प्रक्रिया को खत्म कर दोबारा पारदर्शी तरीके से परीक्षा कराई जाए। दूसरी ओर सरकार फिलहाल पूरी प्रक्रिया रद्द करने के बजाय जांच और निगरानी का विकल्प सामने रख रही है।

रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में समिति का प्रस्ताव

CGL को लेकर सरकार ने छात्रों के सामने एक वैकल्पिक प्रस्ताव रखा है। इसके तहत हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करने की बात कही गई है।

इस समिति का उद्देश्य CGL मामले से जुड़े विवाद और शिकायतों की निगरानी करना होगा। सरकार का मानना है कि इस तरह स्वतंत्र स्तर पर मामले की समीक्षा कराई जा सकती है और अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो उसके अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

लेकिन छात्र इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना है कि सिर्फ समिति बनाना उनकी मूल मांग का समाधान नहीं है। इसी कारण बातचीत के बावजूद आंदोलन खत्म नहीं हुआ।

सरकार ने 90 दिन में जांच का दिया भरोसा

सरकार ने जांच को लेकर समय सीमा तय करने का भी आश्वासन दिया है। मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि मामले की जांच के दो अलग-अलग पहलू हैं।

पहला पहलू आपराधिक साजिश से संबंधित है, जिसकी जांच CID करेगी। दूसरा पहलू वित्तीय प्रभाव से जुड़ा है, जिसके लिए सरकार ED को अधिक उपयुक्त एजेंसी मान रही है।

मंत्री ने पिछली JPSC परीक्षाओं की जांच का उदाहरण देते हुए CBI की भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राज्य की पहली और दूसरी JPSC परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जांच CBI ने की थी, लेकिन दो दशक से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी अपेक्षित निष्कर्ष सामने नहीं आया।

सरकार इसी वजह से मौजूदा मामले में जांच को समयबद्ध रखने पर जोर दे रही है। सरकार ने छात्रों को भरोसा दिया है कि CID अपनी जांच 90 दिनों के भीतर पूरी करेगी और मामले को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए आगे बढ़ाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

16 दिन से ज्यादा समय से प्रदर्शन

JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन अब दो सप्ताह से ज्यादा पुराना हो चुका है। छात्र लगातार अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। सरकार के साथ कई दौर की बातचीत होने के बावजूद आंदोलन समाप्त नहीं हुआ।

सरकार का कहना है कि उसने अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया है और विवादित परीक्षाओं की जांच के लिए कदम उठाए हैं। इसके बावजूद छात्र CGL समेत कुछ अहम मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों का मानना है कि परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम जरूरी हैं। वहीं सरकार का कहना है कि न्यायिक निगरानी में पूरी हुई CGL प्रक्रिया को सीधे रद्द करना कानूनी और प्रशासनिक रूप से संभव नहीं है।

10 अगस्त को विधानसभा घेराव की तैयारी

सरकार और छात्रों के बीच वार्ता विफल रहने के बाद अब आंदोलन का अगला चरण तय हो गया है। छात्र नेताओं ने 10 अगस्त को झारखंड विधानसभा भवन का घेराव करने की चेतावनी दी है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर सरकार ठोस निर्णय नहीं लेती है तो विधानसभा घेराव किया जाएगा। इससे राज्य की राजनीति और प्रशासन के सामने भी नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

फिलहाल सरकार और छात्रों के बीच 98 प्रतिशत मांगों पर सहमति होने का दावा जरूर किया जा रहा है, लेकिन CGL परीक्षा को लेकर बना गतिरोध आंदोलन की सबसे बड़ी वजह बना हुआ है। 14वीं JPSC परीक्षा की CID जांच, बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने और TDPL की परीक्षाओं की जांच जैसे फैसलों के बावजूद छात्र आंदोलन वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं।

अब सभी की नजर 10 अगस्त के विधानसभा घेराव पर है। यदि उससे पहले CGL को लेकर कोई बीच का रास्ता नहीं निकलता है, तो झारखंड में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन और तेज हो सकता है।