पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर इंसाफ की मांग लगातार तेज होती जा रही है। घटना के कई दिन बीत जाने के बावजूद मृतक का अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। इस मामले को लेकर परिजनों, इंसाफ संघर्ष कमेटी और किसान-मजदूर संगठनों में नाराजगी बनी हुई है। प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की दिशा में कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। इसी कड़ी में एक्शन कमेटी ने विधायकों के आवास के बाहर धरना देने का फैसला किया है। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 20 अक्टूबर को प्रस्तावित मानसा दौरे को लेकर भी विरोध की रणनीति तैयार की गई है।
संघर्ष से जुड़े संगठनों का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की हत्या तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे कथित नशा तस्करी के नेटवर्क और राजनीतिक संरक्षण की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। मृतक के परिवार ने केंद्र सरकार से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के माध्यम से पूरे मामले की जांच कराने की मांग उठाई है। परिवार का मानना है कि जब तक कथित नशा कारोबार और उससे जुड़े लोगों के संबंधों की गहराई से पड़ताल नहीं होगी, तब तक इस तरह के नेटवर्क को खत्म करना मुश्किल रहेगा।
विधायकों के घरों के बाहर धरना देंगे प्रदर्शनकारी
परविंदर सिंह झोटा को इंसाफ दिलाने के लिए मानसा की एक्शन कमेटी ने विरोध प्रदर्शन को और तेज करने का निर्णय लिया है। कमेटी के आह्वान पर सुबह 11 बजे विधायकों के आवास के बाहर रोष धरना लगाया जाएगा। इस प्रदर्शन को किसान और मजदूर संगठनों का समर्थन भी मिला है। आंदोलन से जुड़े लोगों का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों पर मामले में जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दबाव बनाना है।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि घटना के बाद से परिवार न्याय की मांग कर रहा है, लेकिन उनकी प्रमुख मांगों पर अभी तक संतोषजनक कार्रवाई सामने नहीं आई है। इसी कारण अब आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी की जा रही है। किसान-मजदूर संगठनों की भागीदारी से इस विरोध प्रदर्शन में विभिन्न सामाजिक और श्रमिक समूहों के शामिल होने की संभावना है।
एक्शन कमेटी और संघर्ष से जुड़े संगठनों ने संकेत दिया है कि वे इस मामले को केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनकी मांग है कि सरकार इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से ले और ऐसी कार्रवाई करे, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद मजबूत हो सके।
छह दिन बाद भी नहीं हो सका अंतिम संस्कार
झोटा हत्याकांड के बाद मानसा और आसपास के क्षेत्रों में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। घटना के छह दिन बीतने के बाद भी परविंदर सिंह झोटा का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका था। परिवार और संघर्ष कमेटी की ओर से न्याय की मांग उठाए जाने के बीच अंतिम संस्कार का मामला आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है।
परिजनों और प्रदर्शनकारियों की मांग है कि हत्या के मामले की जांच निष्पक्ष तरीके से हो और इसके पीछे जिन लोगों की भूमिका होने का संदेह है, उनकी भी पड़ताल की जाए। उनका कहना है कि केवल कार्रवाई का आश्वासन पर्याप्त नहीं है, बल्कि जांच की दिशा और जवाबदेही को लेकर स्पष्ट कदम उठाए जाने चाहिए।
अंतिम संस्कार नहीं होने के कारण क्षेत्र में इस मामले को लेकर चर्चा और चिंता बनी हुई है। आंदोलनकारी लगातार सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि परिवार की पीड़ा और न्याय की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अंतिम संस्कार को लेकर किसी अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं हुई थी। इसलिए इस संबंध में आगे की स्थिति परिवार और संघर्ष कमेटी के फैसलों तथा सरकार की कार्रवाई पर निर्भर करेगी।
अमित शाह के दौरे पर विरोध की तैयारी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 20 अक्टूबर को मानसा आने के कार्यक्रम को लेकर भी विवाद गहरा गया है। झोटा हत्याकांड के विरोध में गठित एक्शन कमेटी ने घोषणा की है कि वह उनके दौरे के दौरान विरोध दर्ज कराएगी। कमेटी ने परविंदर सिंह झोटा के परिवार की ओर से उठाई जा रही मांगों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है।
संघर्ष कमेटी और मृतक के परिजनों की योजना है कि वे 20 अक्टूबर को अमित शाह से मुलाकात कर मामले की सीबीआई जांच की मांग रखेंगे। परिवार चाहता है कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करे और कथित नशा तस्करी नेटवर्क तथा उसके पीछे काम करने वाले लोगों की भूमिका की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराई जाए।
एक्शन कमेटी की ओर से गृह मंत्री के दौरे के विरोध का फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब स्थानीय स्तर पर आंदोलन लगातार जारी है। कमेटी का मानना है कि मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने से जांच और कार्रवाई की मांग को मजबूती मिलेगी। हालांकि, प्रस्तावित मुलाकात और विरोध कार्यक्रम से जुड़ी आगे की स्थिति संबंधित पक्षों के फैसलों पर निर्भर करेगी।
सीबीआई जांच को लेकर केंद्र सरकार से उम्मीद
परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने कहा है कि उनका परिवार केंद्र सरकार के सामने हत्याकांड की जांच कराने की मांग रखेगा। उनके मुताबिक, मामले में हत्या के साथ-साथ कथित नशा गिरोह, उसके संभावित राजनीतिक संबंधों और लंबे समय से सक्रिय नशा नेटवर्क की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।
भीम सिंह का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई जांच जरूरी है। उनका मानना है कि नशे के कारोबार से जुड़े नेटवर्क को खत्म करने के लिए केवल स्थानीय स्तर पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं होगा। उन्होंने पंजाब सरकार की क्षमता और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
परिवार की मांग है कि जांच का दायरा व्यापक रखा जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के पीछे किन लोगों की भूमिका थी और कथित तौर पर नशा कारोबार से जुड़े लोगों के बीच किस तरह के संबंध मौजूद हैं। परिवार का कहना है कि दोषियों की पहचान और जवाबदेही तय होने से ही न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि नशा तस्करी और राजनीतिक गठजोड़ से जुड़े आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। फिलहाल ये बातें परिवार और आंदोलनकारी संगठनों की ओर से उठाई जा रही मांगों तथा आरोपों का हिस्सा हैं।
मुख्यमंत्री और सत्ताधारी नेताओं से भी जवाब मांग रहा मोर्चा
इंसाफ संघर्ष से जुड़े लोगों ने पंजाब की सत्ताधारी पार्टी के सांसदों, विधायकों और अन्य नेताओं से इस्तीफा देकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है। मोर्चे का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि वास्तव में पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं, तो उन्हें अपनी राजनीतिक जिम्मेदारी निभाते हुए न्याय की मांग का समर्थन करना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को भी निशाने पर लिया है। उनका तर्क है कि यदि प्रशासनिक लापरवाही के आरोप में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ निलंबन जैसी कार्रवाई की जा सकती है, तो सरकार के शीर्ष स्तर पर भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री से पद छोड़ने की मांग उठाई है।
हालांकि, मुख्यमंत्री या सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के इस्तीफे की मांग आंदोलनकारी संगठनों का राजनीतिक रुख है। इस मांग पर सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना बाकी है।
मोर्चे से जुड़े लोगों का कहना है कि मामले में जवाबदेही तय करना केवल पुलिस या जांच एजेंसी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वे चाहते हैं कि प्रशासनिक कार्रवाई के साथ-साथ सरकार भी स्पष्ट करे कि घटना के बाद न्याय सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
आरोपी की संपत्ति जब्त करने की मांग
किसान संगठनों ने मामले में आरोपी बताए जा रहे अश्वनी कुमार की संपत्ति जब्त करने और उसे गरीब लोगों में बांटने की मांग भी उठाई है। किसान जत्थेबंदियों का कहना है कि मामले में कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और कानून के तहत दोषियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
संगठनों की यह मांग आंदोलन के दौरान उठाए जा रहे व्यापक विरोध का हिस्सा है। हालांकि, किसी आरोपी की संपत्ति जब्त करने का निर्णय संबंधित कानूनी प्रक्रिया, उपलब्ध साक्ष्यों और सक्षम अधिकारियों के फैसले के आधार पर ही लिया जा सकता है। आरोप लगने मात्र से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता।
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को मामले में पारदर्शी कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि परिवार और आम लोगों का भरोसा कायम हो सके। वे चाहते हैं कि जांच में किसी भी तरह का राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव नहीं होना चाहिए।
अस्पताल में परिवार की भावनात्मक प्रतिक्रिया, मां ने सरकार पर उठाए सवाल
इस मामले के बीच परविंदर सिंह झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने सिविल अस्पताल में जयकारे लगाए। वहीं, उनकी मां अमरजीत कौर ने मुख्यमंत्री भगवंत मान पर लापरवाही का आरोप लगाया। परिवार की ओर से सामने आई प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि घटना के बाद वे न्याय की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
परिवार का कहना है कि मामले को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और जांच में किसी भी संभावित पहलू को छोड़ा नहीं जाना चाहिए। उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि घटना की पूरी सच्चाई सामने आए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
आगे क्या होगा?
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर अब सबकी नजरें एक्शन कमेटी के धरने, 20 अक्टूबर को अमित शाह के प्रस्तावित मानसा दौरे और परिवार की ओर से उठाई जाने वाली सीबीआई जांच की मांग पर टिकी हैं। आंदोलनकारी संगठनों ने अपने विरोध को जारी रखने का संकेत दिया है, जबकि परिवार कथित नशा नेटवर्क की जांच को न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मान रहा है।
फिलहाल, अंतिम संस्कार को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया था और सीबीआई जांच की मांग पर भी आगे की आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। आने वाले दिनों में सरकार और संबंधित एजेंसियों की प्रतिक्रिया इस मामले की दिशा तय करने में अहम हो सकती है।