पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा की हत्या का मामला अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के हवाले होने जा रहा है। पीड़ित परिवार की मांग और मामले को लेकर बढ़ते दबाव के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पीड़ित परिजनों से मुलाकात कर उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। शाह ने परिवार को बताया कि सीबीआई की टीम अगले दिन सुबह मानसा पहुंचकर जांच की प्रक्रिया शुरू करेगी। साथ ही जांच को 120 दिनों के भीतर पूरा करके रिपोर्ट सौंपने की बात कही गई है। इस घटनाक्रम के बाद मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे परिवार को राहत मिली है।
अमित शाह पंजाब दौरे के दौरान संगरूर जिले के गांव तूर बंजारा भी पहुंचे, जहां उन्होंने गुलजार सिंह के परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद मानसा में झोटा के परिवार के साथ उनकी बातचीत हुई। दोनों परिवारों ने अपनी पीड़ा और न्याय से जुड़ी मांगें गृह मंत्री के सामने रखीं। वहीं, इस पूरे मामले ने पंजाब में नशे की समस्या, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है।
परिवार से मुलाकात के बाद CBI जांच को लेकर भरोसा
मानसा में गृह मंत्री अमित शाह ने परविंदर झोटा के पिता भीम सिंह और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ लगभग 25 मिनट तक बातचीत की। इस दौरान परिजनों ने घटना से जुड़ी अपनी चिंताओं और अब तक न्याय के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। परिवार की मुख्य मांग थी कि मामले की जांच ऐसी एजेंसी से कराई जाए, जिस पर उन्हें भरोसा हो और जो बिना किसी दबाव के सच्चाई सामने ला सके।
परिवार को आश्वासन दिया गया कि सीबीआई की टीम अगले दिन सुबह मानसा पहुंचेगी और जांच को आगे बढ़ाएगी। इसके साथ ही 120 दिनों के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने की बात कही गई। परिजनों को उम्मीद है कि केंद्रीय एजेंसी की जांच से घटना के पीछे की परिस्थितियों का खुलासा होगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई हो सकेगी।
झोटा के परिवार ने न्याय की मांग के साथ कुछ अन्य प्रस्ताव भी रखे। इनमें परविंदर झोटा की याद में स्मृति स्थल बनाने और इलाके में ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की मांग शामिल है। परिवार चाहता है कि इस घटना को केवल एक आपराधिक मामले तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इससे जुड़े सामाजिक मुद्दों पर भी ठोस कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री भगवंत मान इससे पहले झोटा हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपने का ऐलान कर चुके थे। परिवार की ओर से केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने की मांग लगातार उठाई जा रही थी। अब गृह मंत्री के आश्वासन के बाद सभी की नजरें जांच शुरू होने और आगे सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं।
13 अक्टूबर को मेडिकल स्टोर पर हुई थी झोटा की हत्या
परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर पर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद इलाके में चिंता और आक्रोश का माहौल बना। परिवार और उनके समर्थकों ने मामले में निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषियों को सजा दिलाने की मांग उठाई।
इस हत्याकांड को लेकर लोगों के बीच कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े सवाल भी उठे। पीड़ित परिवार का कहना रहा कि मामले की तह तक पहुंचने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। इसी मांग के मद्देनजर सीबीआई जांच का मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
गृह मंत्री के साथ बैठक में परिवार ने अपनी अपेक्षाएं रखीं और मामले में कार्रवाई को लेकर स्पष्ट आश्वासन मांगा। मुलाकात के बाद जांच की समयसीमा और सीबीआई टीम के मानसा पहुंचने की जानकारी ने मामले को नया मोड़ दिया है। हालांकि, जांच के नतीजे आने तक हत्या के कारणों, संभावित साजिश या अन्य पहलुओं को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
गुलजार सिंह के परिवार से भी मिले अमित शाह
पंजाब दौरे के दौरान अमित शाह संगरूर जिले के गांव तूर बंजारा पहुंचे। यहां उन्होंने गुलजार सिंह के परिवार से मुलाकात कर उनकी बात सुनी। परिजनों ने गृह मंत्री के सामने अपनी परेशानियां रखीं और मामले में न्याय की मांग की।
परिवार के मुताबिक, बातचीत करीब 20 मिनट तक चली। इस दौरान गृह मंत्री ने उनकी बातों को सुना और भरोसा दिलाया कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। परिजनों की प्रमुख मांग थी कि मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए, क्योंकि उन्हें पंजाब सरकार की जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है।
परिवार ने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक गुलजार सिंह की अस्थियों को विसर्जित नहीं किया जाएगा। उनके लिए यह केवल जांच का सवाल नहीं, बल्कि अपने प्रियजन की मौत से जुड़े सवालों के जवाब पाने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने का मामला है।
परिजनों के अनुसार, अमित शाह ने कहा कि न्याय मिलने के बाद ही वह गुलजार के भोग में शामिल होंगे। परिवार ने बातचीत के दौरान अपनी मांगों और चिंताओं को विस्तार से सामने रखा। इस मुलाकात को भी पीड़ित परिवारों की शिकायतों और न्याय की मांग के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मोहनजीत सिंह शेरों और सनमदीप सिंह के मामले का भी जिक्र
गांव तूर बंजारा में मुलाकात के दौरान मोहनजीत सिंह शेरों से भी अमित शाह ने बातचीत की। उन्हें कथित तौर पर झेलने पड़े अत्याचारों के बारे में जानकारी ली गई। इसके अलावा कनोई गांव के सनमदीप सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले की जानकारी भी गृह मंत्री के सामने रखी गई।
इन मामलों का जिक्र ऐसे समय में हुआ है, जब पंजाब में नशे, अपराध और युवाओं की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। पीड़ित परिवारों की मांग है कि संबंधित मामलों की गंभीरता से जांच की जाए और यदि किसी की जिम्मेदारी सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई हो।
गृह मंत्री की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद परिवारों को उम्मीद है कि उनकी शिकायतों पर आगे ठोस कार्रवाई होगी। हालांकि, अलग-अलग मामलों की जांच और उनके निष्कर्ष संबंधित एजेंसियों की प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे।
भाजपा नेताओं ने भी झोटा के परिजनों से की मुलाकात
मानसा में परविंदर झोटा के परिवार से मिलने के लिए भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी पहुंचे। इनमें परनीत कौर, सुनील जाखड़, मनप्रीत बादल और बिक्रमजीत साहनी के नाम शामिल हैं। नेताओं ने परिवार के प्रति संवेदना जताई और मामले को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी।
मीडिया से बातचीत के दौरान परनीत कौर ने पंजाब में नशे की समस्या पर चिंता जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व वाली सरकार के समय नशे की स्थिति मौजूदा आम आदमी पार्टी सरकार की तुलना में बेहतर थी। उनके मुताबिक, राज्य में अब नशे से जुड़ी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
परनीत कौर ने कहा कि झोटा मामले में सीबीआई जांच गृह मंत्री अमित शाह के निर्देशों के तहत आगे बढ़ेगी। भाजपा नेताओं ने इस मुद्दे को राज्य में नशे के खिलाफ कार्रवाई और सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए पंजाब सरकार पर सवाल उठाए।
हालांकि, नशे की समस्या को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के दावों और आरोपों का आकलन आधिकारिक आंकड़ों तथा स्वतंत्र जांच के आधार पर किया जाना जरूरी है। फिलहाल, झोटा हत्याकांड में परिवार की प्राथमिकता जांच पूरी होने और दोषियों को सजा मिलने की है।
अमित शाह ने पंजाब में नशे के कारोबार पर साधा निशाना
पीड़ित परिवारों से मुलाकात के बाद अमित शाह ने पंजाब में नशे के मुद्दे को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में नशे का कारोबार बेकाबू हो गया है और इसके कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि भगवंत मान सरकार के कार्यकाल में युवा नशे की चपेट में आ रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग भी सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे। शाह ने पंजाब समेत पूरे देश को नशामुक्त बनाने और युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
नशे का मुद्दा पंजाब की राजनीति में लंबे समय से प्रमुख रहा है। विभिन्न दल इस समस्या को लेकर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में झोटा हत्याकांड और अन्य पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान नशे का सवाल भी राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया।
भगवंत मान ने केंद्र से पूछे सवाल
अमित शाह के पंजाब दौरे पर मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल उठाया कि केंद्रीय गृह मंत्री पहले उन परिवारों से मिलने क्यों नहीं आए, जिन्होंने नशे के कारण अपने परिजनों को खोया है। मान ने आरोप लगाया कि पंजाब में नशे की समस्या को लेकर केंद्र सरकार की ओर से समय रहते पर्याप्त चिंता नहीं दिखाई गई।
मुख्यमंत्री ने अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए पूछा कि उस समय नशे के खिलाफ कार्रवाई को लेकर इतनी गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई। उन्होंने गृह मंत्री से शहीद किसानों के परिवारों से मुलाकात नहीं करने को लेकर भी सवाल किए।
मान ने अपने बयान में कहा कि नशे की समस्या केवल पंजाब तक सीमित नहीं है। उन्होंने राजस्थान में नशे की स्थिति और हरियाणा में गैंगस्टरों की गतिविधियों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान से आने वाले नशे को रोकने और सीमा पर एंटी-ड्रोन सिस्टम मजबूत करने के लिए केंद्र से पर्याप्त मदद नहीं मिलने का आरोप भी लगाया।
इस तरह झोटा हत्याकांड को लेकर पंजाब में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। एक ओर भाजपा राज्य सरकार को नशे और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर घेर रही है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री भगवंत मान केंद्र की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
अब जांच की प्रगति पर टिकी निगाहें
परविंदर झोटा हत्याकांड में सीबीआई जांच शुरू होने की घोषणा के बाद परिवार और समर्थकों की सबसे बड़ी उम्मीद समय पर न्याय मिलने की है। 120 दिनों में जांच पूरी करने का आश्वासन महत्वपूर्ण है, लेकिन वास्तविक स्थिति जांच की प्रगति और सामने आने वाले साक्ष्यों से स्पष्ट होगी।
परिवार की मांग है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। वहीं, स्मृति स्थल और ट्रॉमा सेंटर जैसी मांगें इस घटना से जुड़े सामाजिक पहलुओं को भी सामने लाती हैं।
आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सीबीआई जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, किन तथ्यों का खुलासा होता है और संबंधित अधिकारियों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल, पीड़ित परिवारों को दिए गए आश्वासनों को अमल में लाना और जांच को निष्पक्ष तरीके से पूरा करना ही सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है।