पंजाब पुलिस के बर्खास्त AIG राजजीत सिंह हुंदल की गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियों ने पूछताछ तेज कर दी है। शुक्रवार को उन्हें मोहाली की अदालत में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) ने अदालत से 10 दिन की पुलिस हिरासत मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने पांच दिन का पुलिस रिमांड मंजूर किया। जांच एजेंसी का कहना है कि पूछताछ के दौरान कई बिंदुओं पर जानकारी जुटानी है और करीब पांच लाख रुपये की रिकवरी भी की जानी है।
राजजीत सिंह हुंदल को ANTF ने गुरुवार सुबह पटियाला से गिरफ्तार किया था। पुलिस के मुताबिक वह लंबे समय से गिरफ्तारी से बच रहे थे। उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई जब सुप्रीम कोर्ट में उनके वकील ने आत्मसमर्पण की इच्छा जताई थी और अदालत ने उन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई एक अक्टूबर को प्रस्तावित है।
5 लाख रुपये की रिकवरी पर जांच एजेंसी का जोर
कोर्ट में सुनवाई के दौरान ANTF ने राजजीत सिंह की हिरासत की जरूरत बताते हुए कहा कि मामले की जांच के लिए उनसे पूछताछ जरूरी है। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान करीब पांच लाख रुपये की रकम की रिकवरी की जानी है। इसके अलावा मामले से जुड़े दूसरे तथ्यों और लेन-देन की जानकारी भी जुटाई जानी है।
जांच एजेंसी ने 10 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन अदालत ने पांच दिन की पुलिस हिरासत दी। अब इस अवधि में ANTF उनसे मामले से जुड़े आरोपों, कथित लेन-देन और अन्य संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पूछताछ करेगी।
इस मामले में पहले आरोपी बनाए गए एक DSP के सरकारी गवाह बनने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी के लिए उसके बयान महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पुलिस इस बयान को दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों के साथ मिलाकर मामले की कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है।
पटियाला के मकान से पकड़े गए थे हुंदल
राजजीत सिंह हुंदल को पटियाला के दर्शन सिंह नगर स्थित एक मकान से पकड़ा गया था। पंजाब के DGP गौरव यादव के अनुसार, ANTF की टीम ने लगातार तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक वह अनाज मंडी थाना क्षेत्र में स्थित मकान में मिले थे।
हुंदल के खिलाफ अलग-अलग मामलों में NDPS एक्ट, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई चल रही है। उन्हें पहले घोषित अपराधी भी घोषित किया जा चुका था। उनके खिलाफ पंजाब पुलिस की ANTF के अलावा विजिलेंस ब्यूरो से जुड़े मामले भी दर्ज हैं।
क्या है पूरा मामला?
राजजीत सिंह हुंदल का नाम पंजाब पुलिस के बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत सिंह से जुड़े मामले की जांच के दौरान प्रमुखता से सामने आया था। इंद्रजीत सिंह पर ड्रग से जुड़े मामलों की जांच और बरामदगी में कथित अनियमितताओं समेत गंभीर आरोप लगे थे।
उस समय राजजीत सिंह तरनतारन के SSP के पद पर तैनात थे, जबकि इंद्रजीत सिंह CIA प्रभारी के तौर पर काम कर रहे थे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इस पूरे मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT का गठन किया गया था।
SIT की जांच में दोनों अधिकारियों के बीच कथित संबंधों और ड्रग मामलों की जांच में अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की पड़ताल की गई। रिपोर्ट में ड्रग तस्करों को कथित संरक्षण देने, निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाने और वसूली से जुड़े आरोपों का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि ये सभी आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और इन्हें अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया जाना बाकी है।
50 से ज्यादा NDPS सैंपल पर भी उठे थे सवाल
SIT की जांच में उस अवधि के दौरान 50 से अधिक NDPS मामलों के सैंपल फेल होने का मुद्दा भी सामने आया था, जब राजजीत सिंह तरनतारन के SSP और इंद्रजीत सिंह CIA प्रभारी के पद पर थे।
जांच रिपोर्टों में इन मामलों की परिस्थितियों और पुलिस अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की गई। इसी जांच के आधार पर पंजाब सरकार ने अप्रैल 2023 में राजजीत सिंह के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
SIT की रिपोर्टों में यह भी आरोप लगाया गया था कि आधिकारिक पद का कथित तौर पर इस्तेमाल ड्रग से जुड़े मामलों को प्रभावित करने के लिए किया गया। इन आरोपों के आधार पर आगे की आपराधिक जांच शुरू हुई।
2023 में सेवा से बर्खास्त किए गए थे
राजजीत सिंह हुंदल को पंजाब सरकार ने 17 अप्रैल 2023 को पुलिस सेवा से बर्खास्त किया था। यह कार्रवाई हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित SIT की रिपोर्टों के बाद हुई थी। हाईकोर्ट ने SIT द्वारा जमा की गई रिपोर्टों पर विचार करने के बाद सरकार को आगे की कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
बर्खास्तगी के बाद उनके खिलाफ आपराधिक मामलों की जांच आगे बढ़ी। ANTF के एक मामले में उन पर NDPS एक्ट और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई हुई। इसके अलावा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत भी अलग मामला दर्ज किया गया था।
विजिलेंस ब्यूरो के मामले में उन पर आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति रखने से जुड़े आरोपों की जांच की गई। इस जांच में कथित वित्तीय लेन-देन और संपत्ति से जुड़े पहलुओं को भी देखा गया।
बचाव पक्ष ने उठाए जांच पर सवाल
कोर्ट में राजजीत सिंह हुंदल की तरफ से उनके वकील सरबजोत सिंह ढिल्लों ने पुलिस की कार्रवाई पर कई सवाल उठाए। बचाव पक्ष का कहना है कि जिस FIR नंबर 138/2023 में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं 7 और 13 तथा NDPS एक्ट की धारा 59 लगाई गई है, उसमें हुंदल से किसी मादक पदार्थ की बरामदगी नहीं दिखाई गई है।
वकील ने अदालत के सामने तर्क दिया कि इस FIR में लगाए गए आरोप मुख्य रूप से अधिकारी की भूमिका और उसके कर्तव्य से संबंधित हैं। उन्होंने यह भी कहा कि समान तथ्यों से जुड़े भ्रष्टाचार के पहलुओं की जांच पहले 2019 में विजिलेंस ब्यूरो द्वारा की जा चुकी थी।
बचाव पक्ष के अनुसार, उस समय की जांच में राजजीत सिंह को भ्रष्टाचार के आरोपों के संबंध में राहत मिली थी। इसलिए वकील ने सवाल उठाया कि समान तथ्यों के आधार पर दोबारा जांच और कार्रवाई का कानूनी आधार क्या है।
इन दलीलों पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। मामले में अभियोजन और बचाव पक्ष दोनों की दलीलें न्यायिक प्रक्रिया के दौरान जांची जाएंगी।
धारा 17 की मंजूरी का भी मुद्दा
बचाव पक्ष ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17 से संबंधित मंजूरी का मुद्दा भी उठाया। वकील का तर्क है कि जांच शुरू करने से पहले जरूरी कानूनी अनुमति की प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं, यह भी अदालत के सामने स्पष्ट किया जाना चाहिए।
इसके अलावा NDPS एक्ट की धारा 59 से जुड़ी कार्रवाई में भी आवश्यक स्वीकृति के सवाल को बचाव पक्ष ने उठाया है। वकील के मुताबिक इन कानूनी बिंदुओं को आगे की सुनवाई में विस्तार से रखा जाएगा।
हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
राजजीत सिंह हुंदल अप्रैल 2023 के बाद से गिरफ्तारी से बच रहे थे। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में उन्हें राहत नहीं मिलने के बाद वह जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर रहे। उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट और बाद में लुकआउट सर्कुलर जैसी कार्रवाई भी हुई।
मामला आगे सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सितंबर 2026 में सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अदालत को बताया कि हुंदल आत्मसमर्पण करने के लिए तैयार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें संबंधित अधिकारियों के समक्ष सरेंडर करने को कहा और मामले की आगे की सुनवाई के लिए तारीख तय की। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई।
अब पांच दिन की हिरासत में होगी पूछताछ
अदालत से पांच दिन का पुलिस रिमांड मिलने के बाद ANTF के सामने अब जांच को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है। एजेंसी राजजीत सिंह से कथित वित्तीय लेन-देन, पांच लाख रुपये की रिकवरी, अन्य आरोपियों से संबंध और पुराने मामलों से जुड़े तथ्यों पर पूछताछ कर सकती है।
साथ ही सरकारी गवाह बने DSP के बयानों और SIT की पुरानी रिपोर्टों को भी जांच के मौजूदा चरण में देखा जाएगा। पुलिस की कार्रवाई का अगला महत्वपूर्ण चरण यह होगा कि रिमांड अवधि में जांच एजेंसी को कौन-कौन से दस्तावेज, रकम या अन्य साक्ष्य मिलते हैं।
फिलहाल अदालत ने पांच दिन की पुलिस हिरासत मंजूर की है। दूसरी ओर, बचाव पक्ष लगातार मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवाल अदालत के सामने रख रहा है। ऐसे में आने वाली सुनवाई में यह मामला फिर चर्चा में रहेगा।