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तुर्की की Baykar कंपनी का भारत को ड्रोन देने से इनकार, पाकिस्तान के साथ रक्षा साझेदारी को बताया प्राथमिकता; नई दिल्ली का फोकस स्वदेशी तकनीक पर

तुर्की की मशहूर ड्रोन निर्माता कंपनी Baykar ने भारत को मानव रहित लड़ाकू विमान (UAV) या ड्रोन उपलब्ध कराने से इनकार करने का संकेत दिया है। कंपनी के शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि Baykar अपनी ड्रोन तकनीक उन देशों के साथ साझा करने को प्राथमिकता देती है, जिनके साथ उसके रणनीतिक और रक्षा संबंध मजबूत हैं। इस सूची में पाकिस्तान, अजरबैजान और यूक्रेन जैसे देश शामिल हैं।

कंपनी के प्रमुख Haluk Bayraktar ने एक बयान में कहा कि Baykar अपने मित्र देशों और रणनीतिक साझेदारों के साथ रक्षा क्षमताओं को साझा करने की नीति पर काम करती है। उन्होंने पाकिस्तान को लेकर कहा कि तुर्की और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मजबूत संबंध हैं और इसी वजह से इस्लामाबाद को प्राथमिकता दी जाती है।

Baykar के इस रुख को भारत और तुर्की के बीच मौजूद कूटनीतिक मतभेदों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। तुर्की कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के करीब रहा है और कश्मीर जैसे मुद्दों पर भी उसके रुख को लेकर भारत पहले आपत्ति जता चुका है। वहीं पाकिस्तान तुर्की की रक्षा कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बनकर उभरा है।

हालांकि इस पूरे मामले में एक अहम बात यह भी है कि भारत ने कभी आधिकारिक तौर पर Baykar से ड्रोन खरीदने की कोई बड़ी पहल नहीं की थी। ऐसे में कंपनी का भारत को ड्रोन नहीं बेचने का बयान ज्यादा राजनीतिक और रणनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

Baykar CEO ने पाकिस्तान को बताया अहम साझेदार

Baykar के प्रमुख हलूक बायराक्तार ने कहा कि कंपनी अपने करीबी देशों के साथ रक्षा तकनीक साझा करने में विश्वास रखती है। उन्होंने पाकिस्तान को “भाई जैसा देश” बताते हुए कहा कि जिन देशों के साथ रणनीतिक संबंध हैं, उनके साथ सहयोग करना कंपनी की नीति का हिस्सा है।

उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऐसे देशों को ड्रोन तकनीक उपलब्ध नहीं कराई जाएगी जिनके साथ पाकिस्तान के गंभीर सुरक्षा मतभेद हैं। इसी संदर्भ में भारत का नाम सामने आया। तुर्की की Baykar कंपनी अपने Bayraktar TB2 जैसे ड्रोन के कारण दुनियाभर में चर्चा में आई थी। इन ड्रोन का इस्तेमाल कई संघर्ष क्षेत्रों में किया गया है और इन्हें आधुनिक युद्ध में प्रभावी हथियार प्रणाली के तौर पर प्रचारित किया गया है।

पाकिस्तान और तुर्की के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ा है। दोनों देशों के बीच सैन्य प्रशिक्षण, नौसैनिक सहयोग और रक्षा उपकरणों को लेकर कई समझौते हुए हैं। Baykar के ड्रोन भी इसी बढ़ते रक्षा संबंध का हिस्सा रहे हैं।

भारत को लेकर कंपनी का रुख नया नहीं

Baykar का भारत के प्रति यह रुख अचानक सामने नहीं आया है। भारत और तुर्की के संबंधों में पिछले कुछ समय से तनाव देखने को मिला है। खासतौर पर पाकिस्तान को लेकर तुर्की की नीतियों पर भारत ने कई बार असहमति जताई है। भारत की रक्षा नीति अब बड़ी तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही है। ऐसे में विदेशी ड्रोन कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए देश में कई स्वदेशी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।

भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने ड्रोन क्षेत्र में काफी निवेश किया है। सरकारी संस्थानों के साथ-साथ निजी कंपनियां भी निगरानी ड्रोन, हमला करने वाले ड्रोन, छोटे युद्धक ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ड्रोन सिस्टम तैयार कर रही हैं। इस वजह से विशेषज्ञों का मानना है कि Baykar के फैसले का भारत की रक्षा तैयारियों पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

भारत का अपना ड्रोन नेटवर्क तेजी से बढ़ रहा

भारत ने रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। इनमें Innovations for Defence Excellence (iDEX), टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड और आत्मनिर्भर भारत अभियान जैसी पहल शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स को ड्रोन और आधुनिक रक्षा तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

देश में अब कई तरह के UAV सिस्टम तैयार किए जा रहे हैं। इनमें सीमा निगरानी के लिए सर्विलांस ड्रोन, दुश्मन के ठिकानों पर हमला करने वाले लॉइटरिंग म्यूनिशन, स्वार्म ड्रोन तकनीक और लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन DRDO भी कई एडवांस ड्रोन परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें स्टील्थ तकनीक से लैस अनमैन्ड कॉम्बैट एयर व्हीकल और भविष्य के युद्ध के लिए नए कॉम्बैट सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं।

भारत विदेशी ड्रोन तकनीक में भी मजबूत स्थिति में

भारत ने जरूरत के हिसाब से कुछ अत्याधुनिक विदेशी ड्रोन तकनीकों को भी अपनाया है। इनमें अमेरिका से मिलने वाले MQ-9B Predator ड्रोन शामिल हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे उन्नत निगरानी और लंबी दूरी तक काम करने वाले ड्रोन में गिना जाता है।

इन ड्रोन की मदद से भारतीय सेनाओं की समुद्री निगरानी और सीमा सुरक्षा क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है।

इसके अलावा भारत अपनी खुद की लंबी दूरी और हाई-एल्टीट्यूड ड्रोन क्षमता विकसित करने पर भी ध्यान दे रहा है। आने वाले समय में भारतीय रक्षा उद्योग में ड्रोन तकनीक की भूमिका और बढ़ने वाली है।

मई संघर्ष के बाद Bayraktar ड्रोन चर्चा में रहे

भारत और पाकिस्तान के बीच मई में हुए सैन्य तनाव के दौरान तुर्की के ड्रोन सिस्टम को लेकर काफी चर्चा हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान ने Baykar के ड्रोन का इस्तेमाल किया था, लेकिन भारत ने अपनी वायु रक्षा प्रणालियों के जरिए कई ड्रोन को निष्क्रिय करने का दावा किया। इसके बाद Baykar के ड्रोन की क्षमता और वास्तविक युद्ध में उनकी प्रभावशीलता को लेकर बहस शुरू हुई।

भारत ने इस पूरे मामले में अपनी रक्षा क्षमताओं पर भरोसा जताया और यह संदेश दिया कि देश अब आधुनिक युद्ध तकनीक के लिए पूरी तरह विदेशी आपूर्ति पर निर्भर नहीं है।

विशेषज्ञों की नजर में बयान ज्यादा राजनीतिक

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि Baykar का भारत को ड्रोन नहीं बेचने वाला बयान सैन्य जरूरत से ज्यादा राजनीतिक संदेश है। भारत के पास पहले से कई विकल्प मौजूद हैं और वह लगातार अपनी घरेलू रक्षा तकनीक को मजबूत कर रहा है। भारत दुनिया के बड़े रक्षा बाजारों में शामिल है और कई देशों की कंपनियां यहां अपने उत्पादों के लिए अवसर तलाशती हैं। लेकिन नई दिल्ली की प्राथमिकता अब घरेलू निर्माण और रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर ज्यादा केंद्रित है।

Baykar के बयान से भले ही भारत और तुर्की के रक्षा संबंधों पर चर्चा तेज हुई हो, लेकिन भारतीय रक्षा क्षेत्र पर इसका प्रभाव सीमित माना जा रहा है। फिलहाल भारत अपने स्वदेशी ड्रोन कार्यक्रमों, आधुनिक हथियार प्रणालियों और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।