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पंजाब में नशा तस्करों पर कार्रवाई का नया रास्ता खुला, PIT-NDPS कानून के तहत एक साल तक हिरासत का प्रावधान

पंजाब में नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने कानूनी कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है। भगवंत मान सरकार ने प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1988 यानी PIT-NDPS एक्ट को लागू करने के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इस फैसले के बाद प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ निवारक हिरासत की कार्रवाई करने का रास्ता साफ हो गया है। सरकार की ओर से जारी आदेश के तहत निर्धारित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अपने अधिकार क्षेत्र में इस कानून के इस्तेमाल से जुड़े फैसले लेने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य उन लोगों की गतिविधियों पर रोक लगाना है, जिनके नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में लगातार शामिल रहने की आशंका हो। अब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी कानून में तय शर्तों और प्रक्रिया के अनुसार ऐसे व्यक्तियों को निवारक हिरासत में रखने की कार्रवाई पर निर्णय ले सकेंगे। पहले इस प्रक्रिया में गृह सचिव की मंजूरी की आवश्यकता होती थी, लेकिन नई व्यवस्था के तहत संबंधित अधिकार वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सौंपे गए हैं। इससे इस कानून के अंतर्गत कार्रवाई की प्रक्रिया में प्रशासनिक स्तर पर होने वाली देरी कम करने में मदद मिल सकती है।

पुलिस कमिश्नरों और वरिष्ठ अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी

पंजाब के गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना में पुलिस कमिश्नरों और पुलिस रेंज के प्रभारी आईजी रैंक या उससे ऊपर के अधिकारियों को उनके निर्धारित क्षेत्र में कार्रवाई करने के अधिकार दिए गए हैं। इसका अर्थ है कि संबंधित अधिकारी अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों की परिस्थितियों का आकलन करते हुए PIT-NDPS एक्ट के तहत निवारक हिरासत से जुड़े निर्णय ले सकेंगे।

राज्य सरकार ने उन पुलिस इकाइयों के लिए भी वैकल्पिक व्यवस्था की है, जहां आईजी रैंक का अधिकारी उपलब्ध नहीं है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि ऐसी कमिश्नरेट, रेंज और मुख्यालय इकाइयों में छह वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को विशेष रूप से अधिकृत किया गया है। इन अधिकारियों को उनके लिए निर्धारित क्षेत्र में कानून के तहत कार्रवाई करने की जिम्मेदारी दी गई है।

विशेष रूप से अधिकृत किए गए अधिकारियों में विशेष डीजीपी एएस राय, एडीजीपी गौतम चीमा, शिव वर्मा, कौस्तुभ शर्मा, नौनिहाल सिंह और आईजीपी एस. भूपति के नाम शामिल हैं। इन सभी अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र का निर्धारण पंजाब के पुलिस महानिदेशक यानी डीजीपी की ओर से किया जाएगा। इस व्यवस्था के जरिए सरकार ने उन क्षेत्रों में भी कार्रवाई की प्रशासनिक जिम्मेदारी तय की है, जहां सामान्य रूप से निर्धारित रैंक का अधिकारी उपलब्ध नहीं है।

अमित शाह ने उठाया था कानून के इस्तेमाल का सवाल

पंजाब में इस कानून को लागू करने का फैसला ऐसे समय आया है, जब राज्य में नशे की समस्या और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 20 अक्टूबर को पंजाब दौरे के दौरान PIT-NDPS एक्ट के इस्तेमाल का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने सवाल किया था कि देशभर में इस कानून के तहत 929 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, लेकिन पंजाब में एक भी मामला दर्ज नहीं होने की स्थिति क्यों बनी हुई थी।

शाह के इस सवाल ने राज्य में कानून के उपयोग और नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित किया। उनके मुताबिक, जब इस कानून का इस्तेमाल देश के अन्य हिस्सों में किया जा रहा था, तब पंजाब में इसके तहत कार्रवाई नहीं होने का कारण स्पष्ट होना चाहिए था। अब राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी किए जाने के बाद संबंधित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को इस कानून के अंतर्गत कार्रवाई करने की जिम्मेदारी मिल गई है।

इस घटनाक्रम को पंजाब में नशे के खिलाफ चल रही कार्रवाई के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अधिसूचना जारी होने का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक संदिग्ध व्यक्ति को स्वतः हिरासत में रखा जाएगा। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ निवारक हिरासत का निर्णय कानून में निर्धारित आधारों, आवश्यक तथ्यों और लागू प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाना होगा।

क्या है PIT-NDPS एक्ट और कैसे काम करता है?

PIT-NDPS एक्ट का पूरा नाम प्रिवेंशन ऑफ इलिसिट ट्रैफिक इन नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1988 है। इसे नशीले पदार्थों और मन को प्रभावित करने वाले प्रतिबंधित पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था। इस कानून का मकसद केवल किसी अपराध के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि ऐसी गतिविधियों को आगे जारी रहने से रोकना भी है, जिनसे अवैध नशीले पदार्थों के कारोबार को बढ़ावा मिलने की आशंका हो।

इस कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी निर्धारित परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में रखने का आदेश दे सकता है। इसका उद्देश्य संबंधित व्यक्ति को ऐसी अवैध गतिविधियों को जारी रखने से रोकना होता है। कानून के प्रावधानों और आवश्यक प्रक्रिया के अधीन हिरासत की अवधि एक वर्ष तक हो सकती है। हालांकि, इसका इस्तेमाल निर्धारित कानूनी शर्तों के अनुसार ही किया जा सकता है और इसे सामान्य आपराधिक कार्रवाई के समान नहीं समझना चाहिए।

PIT-NDPS एक्ट और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 यानी NDPS एक्ट के बीच अंतर भी समझना जरूरी है। NDPS एक्ट के तहत नशीले पदार्थों से संबंधित अपराधों की जांच, गिरफ्तारी और अभियोजन जैसी आपराधिक कार्रवाई की जाती है। इसके विपरीत PIT-NDPS एक्ट नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार को रोकने के लिए निवारक हिरासत का प्रावधान करता है। दोनों कानूनों का उद्देश्य नशीले पदार्थों के अवैध व्यापार पर नियंत्रण स्थापित करना है, लेकिन उनकी प्रकृति और कार्रवाई की प्रक्रिया अलग-अलग है।

इसलिए PIT-NDPS एक्ट के तहत हिरासत को सामान्य गिरफ्तारी या सजा नहीं माना जा सकता। यह एक अलग कानूनी व्यवस्था है, जिसमें सक्षम प्राधिकारी को निर्धारित आधारों पर निर्णय लेना होता है। ऐसे मामलों में लागू कानूनी सुरक्षा उपायों और निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन भी आवश्यक है।

गृह सचिव की मंजूरी की जगह वरिष्ठ पुलिस अधिकारी करेंगे फैसला

पंजाब सरकार की ओर से जारी अधिसूचना का एक अहम पहलू निर्णय लेने की प्रक्रिया में बदलाव है। पहले निवारक हिरासत से संबंधित इस प्रकार की कार्रवाई के लिए गृह सचिव की मंजूरी की जरूरत पड़ती थी। नई व्यवस्था के अनुसार, संबंधित क्षेत्र के अधिकृत वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अब अपने निर्धारित अधिकार क्षेत्र में इस विषय पर निर्णय ले सकेंगे।

सरकार की ओर से किए गए इस बदलाव का उद्देश्य कार्रवाई से जुड़ी जिम्मेदारी को संबंधित पुलिस नेतृत्व के स्तर पर स्पष्ट करना है। पुलिस कमिश्नर और रेंज के प्रभारी वरिष्ठ अधिकारी अपने क्षेत्रों की परिस्थितियों तथा उपलब्ध तथ्यों के आधार पर कानून के इस्तेमाल पर विचार कर सकेंगे। जहां आईजी रैंक के अधिकारी उपलब्ध नहीं हैं, वहां विशेष रूप से अधिकृत आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति से यह जिम्मेदारी पूरी करने की व्यवस्था की गई है।

हालांकि, इस बदलाव के वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि कानून के तहत पात्र मामलों की पहचान कैसे होती है, आवश्यक साक्ष्य किस प्रकार प्रस्तुत किए जाते हैं और निर्धारित प्रक्रिया का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाता है। केवल अधिकार सौंप देना अपने आप में नशे की तस्करी समाप्त होने की गारंटी नहीं है, लेकिन इससे निवारक कार्रवाई के लिए प्रशासनिक व्यवस्था तैयार होती है।

भाजपा ने सरकार पर साधा निशाना

PIT-NDPS एक्ट के इस्तेमाल को लेकर भाजपा ने पंजाब सरकार पर राजनीतिक हमला भी बोला है। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से मुद्दा उठाए जाने के बाद ही इस कानून के इस्तेमाल की दिशा में कदम बढ़ाया।

ढिल्लों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री ने दो बार इस विषय पर सवाल उठाए, जिसके बाद राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी की। उन्होंने इसे नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई में पहले हुई देरी से जोड़ते हुए सरकार की आलोचना की। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि इस कानून के तहत निर्धारित परिस्थितियों में नशे के अवैध कारोबार में शामिल लोगों को एक साल तक निवारक हिरासत में रखा जा सकता है।

भाजपा ने पंजाब को वर्ष 2029 तक नशामुक्त बनाने का दावा भी किया है। पार्टी की ओर से इस लक्ष्य को नशे के खिलाफ सख्त कार्रवाई और प्रभावी व्यवस्था से जोड़कर पेश किया गया है। हालांकि, यह भाजपा का राजनीतिक दावा है और इसे राज्य सरकार की ओर से घोषित लक्ष्य या हासिल हो चुकी उपलब्धि के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अब कार्रवाई के नतीजों पर रहेगी नजर

पंजाब में नशे की तस्करी लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक चिंता का विषय रही है। ऐसे में PIT-NDPS एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को अधिकृत करने के फैसले को राज्य की नशा विरोधी रणनीति के एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कदम के रूप में देखा जा सकता है।

आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित पुलिस इकाइयां इस कानून के तहत कितने मामलों की पहचान करती हैं और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार कितनी कार्रवाई की जाती है। साथ ही, निवारक हिरासत के मामलों में कानून के प्रावधानों का पालन, निर्णयों के लिए पर्याप्त आधार और आवश्यक कानूनी सुरक्षा उपाय भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

फिलहाल अधिसूचना जारी होने से पंजाब पुलिस के अधिकृत वरिष्ठ अधिकारियों को अपने निर्धारित क्षेत्र में PIT-NDPS एक्ट के इस्तेमाल से संबंधित निर्णय लेने का अधिकार मिल गया है। सरकार की इस पहल से नशे के अवैध कारोबार को रोकने के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल बढ़ने की संभावना है। लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव कार्रवाई की निरंतरता, कानून के निष्पक्ष इस्तेमाल और नशे की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने की क्षमता से तय होगा।