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पठानकोट में पर्यटन को नई उड़ान, क्रूज और वाटर स्पोर्ट्स बढ़ाएंगे रोमांच

पठानकोट अब केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि रोमांचक जल एवं एडवेंचर गतिविधियों के लिए भी अपनी अलग पहचान बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। जिले के चमरोड़ पत्तन, जिसे लंबे समय से ‘मिनी गोवा’ के नाम से जाना जाता है, में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के लिए पैरासेलिंग और विभिन्न वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियां शुरू हो चुकी हैं। आने वाले दिनों में रंजीत सागर बांध की विशाल झील भी एडवेंचर टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनने जा रही है।

रंजीत सागर बांध की झील और चमरोड़ पत्तन का प्राकृतिक वातावरण पहले से ही पर्यटकों को आकर्षित करता रहा है। अब इस खूबसूरती के साथ आधुनिक पर्यटन सुविधाओं और रोमांचक गतिविधियों को जोड़ा जा रहा है। इससे पठानकोट में आने वाले पर्यटकों को एक ही क्षेत्र में प्राकृतिक नजारों के साथ एडवेंचर का अनुभव भी मिल सकेगा।

फिलहाल चमरोड़ पत्तन में पैरासेलिंग की सुविधा पर्यटकों के लिए उपलब्ध हो गई है। वहीं रंजीत सागर झील में पैरासेलिंग शुरू करने से पहले इसका ट्रायल किया जा चुका है, जो सफल रहा है। प्रशासन और संबंधित संचालक अब बाकी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। योजना के अनुसार अगस्त के अंतिम सप्ताह तक जेट स्की, एयर बैलून समेत कई अन्य मनोरंजक गतिविधियों को भी शुरू करने की तैयारी है।

पर्यटन परियोजना से जुड़े परीक्षित वाटर एडवेंचर के प्रोपराइटर पुनीत पिंटा के अनुसार, चमरोड़ पत्तन और रंजीत सागर झील की खूबसूरती ऐसी है कि यहां आने वाला पर्यटक लंबे समय तक इस प्राकृतिक वातावरण को याद रख सकता है। उनका मानना है कि यदि प्राकृतिक पर्यटन के साथ एडवेंचर गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से विकसित किया जाए तो यह क्षेत्र पंजाब ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का बड़ा केंद्र बन सकता है।

इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रंजीत सागर झील में प्रस्तावित क्रूज सेवा है। यहां पंजाब में पहली बार दो अलग-अलग क्षमता वाले क्रूज चलाने की योजना तैयार की गई है। पर्यटक इन क्रूज के माध्यम से बांध क्षेत्र से मुक्तेश्वर धाम तक करीब आठ किलोमीटर की जलयात्रा कर सकेंगे। इस सफर में झील के चारों ओर फैले पहाड़, हरियाली और शांत जलराशि पर्यटकों के अनुभव को और खास बनाएंगे।

जल सफर के लिए 95 सीटों की क्षमता वाला बड़ा क्रूज और 45 यात्रियों के लिए छोटा क्रूज उपलब्ध कराया जाएगा। इस सुविधा से परिवारों, दोस्तों और पर्यटकों के समूहों को झील के बीच घूमने का नया विकल्प मिलेगा। करीब आठ किलोमीटर लंबे इस सफर का किराया 850 रुपये निर्धारित किया गया है, जिसमें जीएसटी भी शामिल रहेगा।

क्रूज सेवा को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को भी ध्यान में रखा गया है। क्रूज में यात्रियों के लिए भोजन की व्यवस्था होगी। इसके अलावा शौचालय जैसी जरूरी सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। प्रत्येक यात्री के लिए 10 लाख रुपये के बीमा की व्यवस्था किए जाने की बात कही गई है। इससे जल सफर के दौरान पर्यटकों को सुविधाजनक और सुरक्षित यात्रा का अनुभव देने का प्रयास किया जाएगा।

रंजीत सागर झील में क्रूज सेवा शुरू होने से इस इलाके में पर्यटन गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में जो पर्यटक केवल झील और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को देखने आते हैं, उनके लिए अब जलयात्रा भी आकर्षण का हिस्सा होगी। यदि यह सेवा पर्यटकों के बीच लोकप्रिय होती है तो भविष्य में इस क्षेत्र में पर्यटन से जुड़ी अन्य सुविधाओं के विकसित होने की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।

चमरोड़ पत्तन यानी ‘मिनी गोवा’ में पहले से ही कई एडवेंचर गतिविधियां संचालित हो रही हैं। यहां आने वाले पर्यटक जिप लाइन, एटीवी राइड, निशानेबाजी और घुड़सवारी जैसी गतिविधियों का आनंद ले सकते हैं। गर्म हवा के गुब्बारे यानी हॉट एयर बैलून को भी पर्यटन आकर्षण के तौर पर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा पर्यटकों के ठहरने के लिए आठ इको हट बनाए गए हैं, जिससे बाहर से आने वाले लोगों को प्राकृतिक वातावरण के बीच रुकने का विकल्प मिल रहा है।

नई वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के जुड़ने से चमरोड़ पत्तन और रंजीत सागर झील के बीच पर्यटन का एक व्यापक सर्किट विकसित होने की संभावना है। पर्यटक एक ही यात्रा में एडवेंचर स्पोर्ट्स, झील की सैर, प्राकृतिक दृश्यों और धार्मिक स्थल का अनुभव ले सकेंगे। विशेष रूप से मुक्तेश्वर धाम तक प्रस्तावित क्रूज सफर धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों को एक-दूसरे से जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकता है।

इस पर्यटन विस्तार का असर केवल पर्यटकों की संख्या तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि होने पर आसपास के होटल, रेस्तरां, टैक्सी सेवाओं, स्थानीय दुकानों और अन्य छोटे कारोबारों को भी फायदा मिल सकता है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। एडवेंचर गतिविधियों के संचालन, क्रूज सेवा, खानपान, परिवहन और पर्यटकों की अन्य जरूरतों से जुड़े कामों में स्थानीय लोगों को रोजगार मिल सकता है।

परियोजना से जुड़े लोगों को उम्मीद है कि पंजाब के अलावा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर से भी बड़ी संख्या में पर्यटक इस क्षेत्र की ओर आकर्षित होंगे। पठानकोट की भौगोलिक स्थिति भी इस लिहाज से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह कई प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों के संपर्क मार्ग पर स्थित है। यदि पर्यटकों को यहां मनोरंजन और ठहरने के पर्याप्त विकल्प मिलते हैं तो वे केवल रास्ते से गुजरने के बजाय पठानकोट में रुककर समय बिताना पसंद कर सकते हैं।

चमरोड़ पत्तन और रंजीत सागर झील को विकसित करने के लिए अलग-अलग स्तर पर ठेके भी तय किए गए हैं। जानकारी के अनुसार मिनी गोवा क्षेत्र का एक साल का ठेका 70 लाख रुपये में निर्धारित किया गया है, जबकि झील की ओर की गतिविधियों के लिए 40 लाख रुपये का ठेका तय हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को व्यवस्थित और व्यावसायिक रूप से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

हालांकि रंजीत सागर झील में सभी प्रस्तावित गतिविधियां एक साथ शुरू नहीं होंगी। पैरासेलिंग का ट्रायल सफल होने के बाद अब अन्य तैयारियां पूरी की जा रही हैं। जेट स्की और एयर बैलून जैसी गतिविधियों को अगस्त के अंतिम सप्ताह तक शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इन सुविधाओं के शुरू होने के बाद झील में आने वाले पर्यटकों के लिए मनोरंजन के विकल्प काफी बढ़ जाएंगे।

पठानकोट के पर्यटन मानचित्र पर यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अब तक क्षेत्र की पहचान मुख्य रूप से प्राकृतिक, धार्मिक और सीमावर्ती पर्यटन से जुड़ी रही है। एडवेंचर टूरिज्म के विस्तार से जिले को युवाओं और परिवारों के बीच एक नए पर्यटन गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।

विशेषज्ञों और पर्यटन कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार किसी भी नए पर्यटन केंद्र की सफलता केवल सुविधाएं शुरू करने से नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, गुणवत्ता, स्वच्छता और नियमित संचालन पर निर्भर करती है। ऐसे में वाटर स्पोर्ट्स और क्रूज जैसी गतिविधियों के साथ सुरक्षा मानकों का पालन, प्रशिक्षित कर्मचारियों की उपलब्धता और पर्यटकों को बेहतर सेवाएं देना भी महत्वपूर्ण होगा।

यदि प्रस्तावित सभी गतिविधियां निर्धारित समय के अनुसार शुरू होती हैं और पर्यटकों को अच्छा अनुभव मिलता है, तो चमरोड़ पत्तन और रंजीत सागर झील आने वाले समय में पठानकोट के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकते हैं। एक तरफ जहां ‘मिनी गोवा’ एडवेंचर गतिविधियों का केंद्र बनेगा, वहीं दूसरी ओर झील में क्रूज और वाटर स्पोर्ट्स पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव देंगे।

कुल मिलाकर पठानकोट में पर्यटन विकास की यह पहल प्राकृतिक सौंदर्य को आधुनिक मनोरंजन सुविधाओं से जोड़ने की कोशिश है। 95 और 45 सीटों वाले क्रूज से लेकर पैरासेलिंग, जेट स्की, हॉट एयर बैलून, जिप लाइन और एटीवी जैसी गतिविधियां इस क्षेत्र को एक संपूर्ण एडवेंचर डेस्टिनेशन का रूप दे सकती हैं। अगर योजनाएं सफल रहती हैं, तो आने वाले समय में पठानकोट केवल गुजरने वाला शहर नहीं, बल्कि पर्यटकों के ठहरने और रोमांच का आनंद लेने वाला प्रमुख पर्यटन हब बन सकता है।