पंजाब कांग्रेस के नए प्रदेश अध्यक्ष परगट सिंह ने जिम्मेदारी संभालने के बाद पार्टी और पंजाब की राजनीति को लेकर अपने तेवर साफ कर दिए हैं। शनिवार को दिल्ली स्थित गुरुद्वारा बंगला साहिब पहुंचकर माथा टेकने और अरदास करने के बाद परगट सिंह ने पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पंजाब की पहचान उसकी सांझी संस्कृति, आपसी भाईचारे और सभी समुदायों को साथ लेकर चलने की भावना से बनी है। ऐसे में प्रदेश के लोगों को मिलकर उन ताकतों का मुकाबला करना होगा, जो समाज में नफरत या हिंसा का माहौल पैदा करने की कोशिश करती हैं। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद दिल्ली में उनका यह पहला सार्वजनिक कार्यक्रम था। इससे पहले कांग्रेस ने उन्हें अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग की जगह प्रदेश संगठन की कमान सौंपी है।
गुरुद्वारा बंगला साहिब में नतमस्तक होने के बाद परगट सिंह ने पंजाब के लोगों से एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब की धरती गुरु साहिबान की शिक्षाओं से जुड़ी हुई है और यहां सरबत के भले, सांझीवालता तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करना बेहद जरूरी है। उनके मुताबिक पंजाब की असली ताकत लोगों की एकता और साझा संस्कृति में है। इसलिए राजनीतिक या सामाजिक मतभेदों के बावजूद प्रदेश के व्यापक हितों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
परगट सिंह ने अपने संबोधन में पंजाब के अधिकारों और हितों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हकों के लिए राजनीतिक स्तर पर आवाज बुलंद करने के साथ-साथ वैचारिक लड़ाई को भी मजबूत करना जरूरी है। उनका कहना था कि पंजाब की बुनियादी पहचान और सामाजिक ढांचे को किसी भी तरह की कट्टरपंथी सोच से प्रभावित नहीं होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने पंजाबियों से अपील की कि वे एकजुट होकर प्रदेश की सामाजिक संरचना और आपसी भाईचारे को मजबूत करें।
नए कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि पंजाब कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को लेकर जो चर्चाएं होती रही हैं, उन्हें वह किस नजरिए से देखते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस में गुटबाजी नहीं है। उनके अनुसार पार्टी के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर विचार हो सकते हैं, लेकिन कांग्रेस का मूल उद्देश्य देश और पंजाब को आगे ले जाने की राजनीति करना है। परगट सिंह के इस बयान को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के बाद संगठन को एकजुट करने और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चुनौती सामने है।
राजा वड़िंग के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद पार्टी ने परगट सिंह को नई जिम्मेदारी दी है। वड़िंग ने करीब साढ़े चार साल तक पंजाब कांग्रेस की कमान संभाली थी। उनके इस्तीफे के बाद कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं चल रही थीं और अंततः पार्टी ने जालंधर कैंट से विधायक तथा पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह को यह जिम्मेदारी सौंप दी।
नई जिम्मेदारी मिलने के बाद परगट सिंह का फोकस केवल पार्टी संगठन तक सीमित नहीं दिख रहा है। उन्होंने पंजाब के व्यापक सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है। दिल्ली यात्रा के दौरान उनका बंगला साहिब जाना भी इसी क्रम का हिस्सा रहा। उन्होंने गुरु साहिब के प्रति आभार जताते हुए पंजाब और प्रदेश के लोगों के कल्याण के लिए अरदास की। उनकी यात्रा के दौरान पंजाब से जुड़े कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भी उनसे मुलाकात कर उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनने पर बधाई दी।
परगट सिंह ने आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार पर भी सीधा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने AAP सरकार की तुलना रेत की दीवार से करते हुए कहा कि यह दीवार ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं है और जल्द ही ढह जाएगी। यह टिप्पणी उन्होंने पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार और उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए की। हालांकि यह परगट सिंह का राजनीतिक आकलन है, जिसे उन्होंने अपने बयान के तौर पर रखा है।
इसके साथ ही उन्होंने भारतीय जनता पार्टी पर भी निशाना साधा। परगट सिंह ने भाजपा पर नफरत की राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि पंजाब की सामाजिक बनावट को देखते हुए ऐसी राजनीति के खिलाफ लोगों को एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पंजाब की पहचान अलग-अलग समुदायों के बीच सहयोग, भाईचारे और साझा संस्कृति से जुड़ी रही है। ऐसे में प्रदेश के माहौल को किसी भी तरह से विभाजित करने वाली राजनीति से बचना जरूरी है।
परगट सिंह के बयान में पंजाब के अधिकारों का मुद्दा भी प्रमुख रहा। उन्होंने कहा कि राज्य के हितों को लेकर लगातार आवाज उठाने की जरूरत है। उनके अनुसार पंजाब के राजनीतिक हितों की रक्षा केवल चुनावी राजनीति के माध्यम से नहीं की जा सकती, बल्कि इसके लिए वैचारिक स्तर पर भी स्पष्टता और मजबूती जरूरी है। उन्होंने कहा कि पंजाबियों को अपने अधिकारों, संस्कृति और पहचान से जुड़े विषयों पर एकजुट होकर आगे बढ़ना होगा।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में परगट सिंह के सामने संगठन को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी भी है। उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पंजाब की राजनीति में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और भाजपा के बीच लगातार राजनीतिक मुकाबला बना हुआ है। कांग्रेस के लिए संगठन को जमीनी स्तर पर सक्रिय करना और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर लाना अहम चुनौती है। परगट सिंह ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की दिशा में काम करने का संदेश दिया है।
दिल्ली में उनके कार्यक्रम के दौरान पंजाब से पहुंचे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी उनसे मुलाकात की। जालंधर यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों सहित कई नेताओं ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं। रिपोर्ट के मुताबिक परगट सिंह ने पार्टी के जमीनी ढांचे को मजबूत करने और बूथ स्तर तक सक्रियता बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने यूथ कांग्रेस को संगठन की महत्वपूर्ण कड़ी बताते हुए आने वाले समय में युवाओं की भूमिका बढ़ाने की बात कही।
परगट सिंह का राजनीतिक सफर भी पंजाब की राजनीति में अलग पहचान रखता है। हॉकी के मैदान से राजनीति में आए परगट सिंह पहले अकाली दल से जुड़े और बाद में कांग्रेस में शामिल हुए। वह जालंधर कैंट से विधायक रहे हैं और पंजाब सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। अब प्रदेश कांग्रेस की कमान मिलने के बाद उनके सामने पार्टी को नए सिरे से सक्रिय करने और पंजाब में कांग्रेस के राजनीतिक आधार को मजबूत करने की चुनौती है।
उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद दिल्ली में दिया गया बयान यह संकेत देता है कि वह पंजाब कांग्रेस की राजनीति को केवल संगठनात्मक स्तर पर नहीं, बल्कि प्रदेश के अधिकार, सामाजिक सौहार्द और पंजाब की पहचान जैसे मुद्दों के साथ जोड़कर आगे बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके नेतृत्व में कांग्रेस संगठन किस तरह की रणनीति अपनाता है और पार्टी के भीतर अलग-अलग नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय किस तरह स्थापित किया जाता है।
फिलहाल परगट सिंह ने अपने शुरुआती संदेश में पंजाब की एकता और भाईचारे को केंद्र में रखा है। बंगला साहिब में अरदास के बाद उन्होंने जिस तरह पंजाबियों से एकजुट होने की अपील की, उसमें प्रदेश की सांझी संस्कृति और सामाजिक सौहार्द को प्रमुखता दी गई। साथ ही AAP सरकार और भाजपा को लेकर उनके तीखे राजनीतिक बयान ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि नई जिम्मेदारी संभालने के साथ ही वह विपक्षी दलों के खिलाफ कांग्रेस की राजनीतिक लड़ाई को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। आने वाले दिनों में पार्टी की संगठनात्मक बैठकों और जमीनी गतिविधियों के जरिए उनके नेतृत्व की दिशा और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।