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The Scoopp

 

परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में आज पंजाब बंद, पिता की भावुक अपील, न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष

पंजाब के मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद राज्य में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इस घटना के विरोध में आज पंजाब बंद का आह्वान किया गया है। झोटा के परिवार और विभिन्न संगठनों ने लोगों से बंद को समर्थन देने की अपील की है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो और राज्य में नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जाए। संघर्ष कमेटी ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। परिजनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक झोटा का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। इस घटनाक्रम ने न केवल मानसा बल्कि पूरे पंजाब में कानून-व्यवस्था और नशे के कारोबार को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

पिता भीमा सिंह ने पंजाब के लोगों से मांगा साथ

अपने बेटे की हत्या से दुखी पिता भीमा सिंह ने प्रदेशवासियों से एकजुट होकर न्याय की मांग उठाने की अपील की है। उनका कहना है कि यह लड़ाई केवल उनके परिवार की नहीं है, बल्कि उन सभी लोगों की है जो पंजाब में नशे के कारोबार को खत्म होते देखना चाहते हैं। परिवार चाहता है कि घटना की तह तक पहुंचकर यह पता लगाया जाए कि गोली चलने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं और यदि इस मामले में अन्य लोगों की कोई भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। परिवार ने केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री और डीजीपी की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है। परिजनों का रुख है कि मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी भर से उनकी सभी चिंताएं दूर नहीं हो जातीं। वे चाहते हैं कि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े और किसी भी संभावित पहलू को नजरअंदाज न किया जाए।

भीमा सिंह ने लोगों से आंदोलन में शांतिपूर्ण तरीके से भाग लेने की अपील भी की है। प्रदर्शनकारियों की ओर से बंद के दौरान आम जनता से सहयोग मांगा गया है, ताकि उनकी आवाज सरकार और प्रशासन तक पहुंच सके। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, बंद का आह्वान सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक के लिए किया गया है। आंदोलन से जुड़े लोगों ने आपातकालीन सेवाओं को चलने देने की बात कही है। हालांकि, अलग-अलग जिलों में बाजार, परिवहन और अन्य सेवाओं पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह स्थानीय परिस्थितियों और संगठनों के फैसलों पर निर्भर करेगा।

स्कूल बस ऑपरेटरों ने भी किया बंद का समर्थन

झोटा हत्याकांड के विरोध में स्कूल बस ऑपरेटरों ने भी अपना समर्थन जताया है। स्कूल-कॉलेज बस ऑपरेटर यूनियन पंजाब के प्रधान गुरप्रीत सिंह के मुताबिक, बंद के दौरान स्कूल बसें नहीं चलाई जाएंगी। इस फैसले के चलते अभिभावकों और विद्यार्थियों को अपनी दिनचर्या में बदलाव करना पड़ सकता है। जिन परिवारों के बच्चे स्कूल बस से आते-जाते हैं, उन्हें संबंधित स्कूल प्रबंधन से परिवहन और कक्षाओं के बारे में जानकारी लेनी चाहिए। राज्यव्यापी बंद के आह्वान के बीच अलग-अलग संस्थानों की व्यवस्था एक जैसी होना जरूरी नहीं है, इसलिए स्कूलों की ओर से जारी सूचना को प्राथमिकता देना उचित होगा।

बंद का समर्थन केवल परिवहन क्षेत्र तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। विभिन्न किसान संगठनों, कर्मचारी संगठनों, व्यापारिक समूहों और राजनीतिक दलों ने भी इस आह्वान को समर्थन दिया है। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने भी बंद के समर्थन में अपने कार्यालयों और संस्थानों को बंद रखने की घोषणा की थी। इस व्यापक समर्थन से स्पष्ट है कि झोटा की हत्या का मामला अब एक स्थानीय आपराधिक घटना से आगे बढ़कर राज्यव्यापी विरोध का मुद्दा बन गया है। हालांकि, किसी भी संस्थान या सेवा की वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित प्रबंधन की आधिकारिक सूचना देखना जरूरी है।

सुबह छह बजे से शाम पांच बजे तक बंद का आह्वान

परविंदर सिंह झोटा को न्याय दिलाने की मांग के साथ गठित संघर्ष कमेटी ने 15 अक्टूबर को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है। इस दौरान कई स्थानों पर बाजार बंद रखने, प्रदर्शन करने और सड़कों पर विरोध दर्ज कराने की तैयारी की गई है। मानसा इस आंदोलन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है, क्योंकि हत्या की वारदात यहीं हुई थी। दूसरे जिलों में भी संगठनों से लोगों को एकजुट करने और आंदोलन को समर्थन देने की अपील की गई है। कुछ इलाकों में यातायात प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए यात्रियों को घर से निकलने से पहले बस और सड़क मार्ग की स्थिति की जानकारी लेने की सलाह दी जा रही है।

दूसरी ओर, बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती है। हत्या के बाद मानसा में तनाव की स्थिति बनी थी और प्रदर्शनकारियों की भीड़ को देखते हुए पुलिस ने संवेदनशील रास्तों पर बैरिकेडिंग की थी। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रशासन ने मानसा और आसपास के मार्गों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी की थी। ऐसे हालात में यात्रियों को पुलिस के निर्देशों का पालन करना चाहिए और किसी भी संवेदनशील स्थान पर अनावश्यक रूप से भीड़ जमा करने से बचना चाहिए। आंदोलनकारियों की मांग है कि उनका विरोध शांतिपूर्ण ढंग से सुना जाए और सरकार मामले में स्पष्ट कार्रवाई करे।

फेसबुक लाइव के दौरान हुई थी गोलीबारी

परविंदर सिंह झोटा की हत्या मंगलवार, 13 अक्टूबर को मानसा में हुई थी। शुरुआती मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, झोटा एक मेडिकल स्टोर पर नशीले पदार्थों की कथित बिक्री को लेकर दुकानदार से सवाल-जवाब कर रहे थे। इसी दौरान विवाद बढ़ गया और गोलीबारी हुई। झोटा फेसबुक पर लाइव थे, इसलिए घटना का कुछ हिस्सा लाइव प्रसारण में दर्ज हो गया। इस वारदात में झोटा की मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद कुछ अन्य लोग भी घायल हुए। घटना के बाद इलाके में गुस्सा फैल गया और लोगों ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध शुरू कर दिया।

मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार को मुख्य आरोपी बताया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वारदात के बाद वह मौके से फरार हो गया था। बाद में पंजाब और राजस्थान पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में उसे राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किए जाने की खबर आई। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा यह निर्धारित करना है कि गोलीबारी किन परिस्थितियों में हुई, विवाद की पृष्ठभूमि क्या थी और घटना से संबंधित सभी तथ्यों की पुष्टि कैसे की जाए। आरोपों और जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर करना जरूरी है; किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।

हत्या के बाद मानसा में बढ़ा तनाव, मेडिकल स्टोर पर भी हुआ विरोध

झोटा की हत्या के बाद मानसा में लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग विरोध जताने के लिए जुटे और आरोपी से जुड़े मेडिकल स्टोर को नुकसान पहुंचाया गया। दुकान में आग लगाए जाने की खबरें भी सामने आईं। इसके अलावा, प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को गिराने की कार्रवाई की। अधिकारियों की ओर से इस कार्रवाई के संबंध में निर्माण से जुड़े नियमों का हवाला दिए जाने की रिपोर्ट है। इन घटनाओं ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

हालांकि, हत्या के विरोध और न्याय की मांग के बीच यह भी महत्वपूर्ण है कि कानून अपने हाथ में लेने की घटनाओं को बढ़ावा न मिले। किसी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई पुलिस, प्रशासन और अदालत की प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से स्थिति और बिगड़ सकती है तथा आम लोगों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। आंदोलन से जुड़े लोगों की मुख्य मांग है कि मामले में तेजी से और निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की जाए, ताकि परिवार को न्याय मिल सके और लोगों का भरोसा कायम रहे।

सीबीआई जांच और वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे की मांग

झोटा के परिवार और संघर्ष कमेटी ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है। उनका कहना है कि घटना की निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र एजेंसी की भूमिका जरूरी है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री भगवंत मान और डीजीपी गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बन गई है। प्रदर्शनकारी राज्य में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार से जवाब मांग रहे हैं। उनका आरोप है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए और अवैध कारोबार से जुड़े मामलों में प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।

राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की प्रतिक्रिया ने भी इस मुद्दे को व्यापक बना दिया है। विपक्षी नेताओं ने घटना को लेकर राज्य सरकार की आलोचना की है, जबकि बंद का समर्थन करने वाले संगठन न्याय की मांग पर एकजुट होने की बात कह रहे हैं। दूसरी तरफ, पुलिस और प्रशासन के सामने जांच को तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ाने, सुरक्षा बनाए रखने और विरोध के दौरान किसी अप्रिय घटना को रोकने की जिम्मेदारी है। परिवार की मांगों पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।

पंजाब में नशे की समस्या फिर चर्चा के केंद्र में

परविंदर सिंह झोटा की हत्या ने पंजाब में नशे के खिलाफ चल रहे अभियानों और इस समस्या से निपटने के तरीकों पर फिर सवाल खड़े किए हैं। झोटा नशे के विरोध में सक्रिय थे और कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री के खिलाफ आवाज उठाते थे। उनकी हत्या के बाद लोगों के बीच यह चिंता बढ़ी है कि नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ अभियान चलाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। यह मामला केवल एक हत्या की जांच तक सीमित नहीं रह गया है; इससे नशे की उपलब्धता, अवैध बिक्री पर निगरानी और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे विषय भी चर्चा में आ गए हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राज्य सरकार ने मेडिकल स्टोरों पर जांच तेज करने और नशीली दवाओं की अवैध बिक्री के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने 16 अक्टूबर को नशा विरोधी अभियान और कानून-व्यवस्था की समीक्षा के लिए बैठक बुलाने की बात भी रिपोर्टों में सामने आई है। ऐसी बैठकों में अभियान की प्रगति, संवेदनशील इलाकों की स्थिति और विभिन्न विभागों के बीच तालमेल जैसे मुद्दों की समीक्षा की जानी है। हालांकि, इन कदमों का वास्तविक असर इस बात से तय होगा कि नियमों का पालन कितनी प्रभावी तरह से कराया जाता है और अवैध बिक्री के मामलों में कितनी ठोस कार्रवाई होती है।

पिता भीमा सिंह की अपील है कि लोग न्याय की मांग में साथ दें। आंदोलनकारियों की प्रमुख अपेक्षा है कि जांच पारदर्शी हो, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो और नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। आने वाले दिनों में पुलिस जांच, सरकार की प्रतिक्रिया और बंद के प्रभाव से यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में आगे क्या दिशा बनती है।