भाजपा नेता और पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को एक कथित धमकी भरा वॉयस मैसेज मिलने के बाद सुरक्षा और पुलिस प्रशासन में हलचल मच गई है। बताया जा रहा है कि रविवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे उनके वॉट्सऐप पर पाकिस्तान के कोड वाले नंबर से एक ऑडियो संदेश भेजा गया। इसमें उन्हें अपनी गतिविधियों और बयानों को लेकर चेतावनी दी गई और कथित तौर पर जान से मारने की धमकी भी दी गई।
धमकी देने वाले व्यक्ति ने अपनी पहचान ‘मलिक एलेक्स’ के रूप में बताई। ऑडियो में बिट्टू को सीधे तौर पर निशाना बनाते हुए बेहद आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। संदेश में यह भी कहा गया कि उनके खिलाफ कथित तौर पर एक जानलेवा साजिश तैयार की जा चुकी है और इसे अंजाम देने के लिए संबंधित लोग किसी भी समय पहुंच सकते हैं।
‘किसी भी दिन आ सकती है टीम’ का दावा
वॉयस मैसेज में धमकी देने वाले शख्स ने बिट्टू को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें अपनी ‘हद’ में रहना चाहिए और ऐसे बयान देने से बचना चाहिए, जिन्हें वह आपत्तिजनक मानता है। इसके बाद ऑडियो में एक कथित ‘किलो के डिब्बे’ का जिक्र किया गया। इस शब्द का इस्तेमाल धमकी देने वाले ने एक जानलेवा सरप्राइज के तौर पर किया।
मैसेज में यह दावा भी किया गया कि इस कथित योजना को पूरा करने के लिए उसकी टीम कभी भी बिट्टू तक पहुंच सकती है। धमकी सिर्फ भाजपा नेता तक सीमित नहीं रखी गई, बल्कि उनके आसपास मौजूद लोगों और सुरक्षा में तैनात कर्मचारियों को भी नुकसान पहुंचाने की बात कही गई।
इस तरह की भाषा सामने आने के बाद मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में पाकिस्तान में मौजूद है या उसने किसी ऑनलाइन अथवा वर्चुअल माध्यम से पाकिस्तानी नंबर का इस्तेमाल किया है।
संदेश की शुरुआत धार्मिक अभिवादन से, फिर बदल गया लहजा
रिपोर्ट के मुताबिक, ऑडियो संदेश की शुरुआत ‘सलाम’ और ‘सत श्री अकाल’ जैसे अभिवादन से हुई। इसके बाद संदेश देने वाले व्यक्ति का लहजा अचानक आक्रामक हो गया। उसने बिट्टू को गालियां देने के साथ-साथ कथित तौर पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी।
वॉयस मैसेज में भाजपा और भारत के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लगाए जाने का भी दावा किया गया है। इसके अलावा, संदेश भेजने वाले ने भारत में कथित तौर पर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की बातें कहीं। उसने दावा किया कि देश में दो स्थानों पर पहले ही विस्फोटक लगाए जा चुके हैं।
ऑडियो में आगे कुछ सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाने और वहां बम धमाके किए जाने का कथित दावा भी किया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। जांच एजेंसियों के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि धमकी देने वाला व्यक्ति वास्तव में किसी संगठित आतंकी नेटवर्क से जुड़ा है या सिर्फ डर पैदा करने के उद्देश्य से फर्जी दावे कर रहा है।
खुद को आतंकी संगठन से जोड़ने का दावा
धमकी वाले ऑडियो में व्यक्ति ने खुद को पाकिस्तान के प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-झांगवी के पूर्व प्रमुख मलिक इशाक से जोड़ने का दावा भी किया। इसी दौरान पाकिस्तान और खालिस्तान के समर्थन में नारे लगाए जाने की बात सामने आई है।
ऐसे दावों के कारण जांच का दायरा केवल धमकी तक सीमित नहीं रहेगा। पुलिस और संबंधित सुरक्षा एजेंसियां यह जानने का प्रयास कर सकती हैं कि संदेश भेजने वाले का किसी आतंकी संगठन या दूसरे नेटवर्क से वास्तविक संबंध है या नहीं। किसी व्यक्ति द्वारा किसी संगठन या उसके सदस्य से संबंध होने का दावा अपने आप में उस संबंध का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसलिए जांच एजेंसियों के लिए डिजिटल और तकनीकी सबूत महत्वपूर्ण होंगे।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
धमकी मिलने के बाद बिट्टू की ओर से पुलिस प्रशासन को शिकायत दी गई है। इसके आधार पर अधिकारी संदेश के स्रोत और उसकी विश्वसनीयता की जांच में जुट गए हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि वॉट्सऐप पर इस्तेमाल किया गया नंबर वास्तव में पाकिस्तान में रजिस्टर्ड है या किसी अन्य माध्यम से उसका इस्तेमाल किया गया।
जांच के दौरान मोबाइल नंबर, वॉट्सऐप अकाउंट, वॉयस मैसेज और उससे जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है। अगर नंबर वर्चुअल या इंटरनेट आधारित सेवा से जुड़ा पाया जाता है तो उसके वास्तविक उपयोगकर्ता तक पहुंचना अलग चुनौती होगी। पुलिस इस बात की भी जांच कर सकती है कि क्या इसी नंबर से पहले किसी अन्य व्यक्ति को धमकी दी गई है या यह किसी पुराने मामले से जुड़ा हुआ है।
धमकी की असलियत का पता लगाना अहम
ऐसे मामलों में धमकी भरे संदेश के पीछे वास्तविक खतरा है या किसी व्यक्ति ने सिर्फ भय पैदा करने के लिए ऐसा संदेश भेजा है, यह जांच के बाद ही सामने आता है। इसलिए ऑडियो में किए गए दावों को फिलहाल जांच का विषय माना जा रहा है।
विशेष रूप से विस्फोटक लगाए जाने और सरकारी कार्यालयों को निशाना बनाने जैसे दावों की सत्यता की जांच सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण होगी। यदि किसी स्थान पर वास्तविक खतरे से संबंधित जानकारी मिलती है तो सुरक्षा व्यवस्था के स्तर पर भी आवश्यक कदम उठाए जा सकते हैं।
पुलिस तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि संदेश किस डिवाइस, इंटरनेट कनेक्शन या डिजिटल माध्यम से भेजा गया। साथ ही, आवाज की पहचान और संदेश की भाषा से जुड़े सुराग भी जांच में उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, केवल आवाज या दावे के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान अथवा संगठन से संबंध की पुष्टि नहीं की जा सकती।
बिट्टू को पहले भी मिलती रही है धमकियां
रवनीत सिंह बिट्टू पंजाब की राजनीति में सक्रिय प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और विभिन्न राष्ट्रीय एवं पंजाब से जुड़े मुद्दों पर मुखर बयान देते रहे हैं। ऐसे में उनके बयानों को लेकर विवाद भी सामने आते रहे हैं। ताजा मामले में धमकी देने वाले ने भी कथित तौर पर उनके बयानों को ही निशाना बनाया है।
हालांकि, वर्तमान धमकी और किसी पुराने मामले के बीच सीधा संबंध है या नहीं, इसकी जानकारी जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर सकती है कि धमकी देने वाले को बिट्टू की गतिविधियों, उनके कार्यक्रमों या सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित कोई जानकारी थी या नहीं।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए डिजिटल सुराग अहम
आज के समय में सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए धमकी देना जांच एजेंसियों के लिए एक अलग तरह की चुनौती बन चुका है। कई बार अपराधी अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए दूसरे देशों के नंबर, वर्चुअल नंबर या इंटरनेट आधारित सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में नंबर जिस देश का दिखाई देता है, उससे यह जरूरी नहीं कि संदेश भेजने वाला व्यक्ति उसी देश में मौजूद हो।
इसी वजह से ताजा मामले में भी सिर्फ पाकिस्तानी कोड वाले नंबर को देखकर संदेश भेजने वाले की वास्तविक लोकेशन तय नहीं की जा सकती। पुलिस को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर इसकी पुष्टि करनी होगी।
जांच एजेंसियां यह भी देख सकती हैं कि ऑडियो संदेश किसी पहले से मौजूद रिकॉर्डिंग का हिस्सा है या उसे विशेष रूप से बिट्टू को भेजने के लिए तैयार किया गया। संदेश में इस्तेमाल शब्दों, आवाज, नंबर की गतिविधि और डिजिटल रिकॉर्ड से आगे की जांच को दिशा मिल सकती है।
प्रशासन ने शिकायत को गंभीरता से लिया
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शिकायत के बाद पुलिस प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। एक तरफ बिट्टू को दी गई व्यक्तिगत धमकी की जांच की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ ऑडियो में किए गए कथित विस्फोटक और बम धमाकों से जुड़े दावों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि संदेश के पीछे कौन है और उसका उद्देश्य क्या था। जांच के दौरान यदि किसी संगठित नेटवर्क या आतंकी गतिविधि से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण सामने आता है तो मामले की गंभीरता और बढ़ सकती है। दूसरी ओर, यदि यह किसी व्यक्ति की फर्जी धमकी साबित होती है तो उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
रवनीत सिंह बिट्टू की ओर से शिकायत दर्ज होने के बाद अब जांच का केंद्र धमकी देने वाले की पहचान, नंबर की वास्तविक स्थिति, ऑडियो की प्रामाणिकता और उसमें किए गए दावों की सच्चाई पर रहेगा। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि यह संदेश वास्तविक खतरे का संकेत है या डिजिटल माध्यम से डर फैलाने की कोशिश। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।