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The Scoopp

 

पाकिस्तान ने भारत से बातचीत की लगाई गुहार, एक्सपर्ट बोले- रिश्ते सुधारने का यही सही वक्त

ईरान और अमेरिका के बीच हुए हालिया समझौते के बाद पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच पाकिस्तान के एक प्रमुख अखबार और वहां के विशेषज्ञों ने सरकार को सलाह दी है कि अब उसे अपनी विदेश नीति में बड़ा बदलाव करते हुए भारत और अफगानिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की दिशा में कदम उठाना चाहिए।

पाकिस्तानी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस्लामाबाद ने ईरान-अमेरिका तनाव कम करने में अपनी भूमिका निभाई है तो उसे इसी रणनीति का इस्तेमाल अपने पड़ोसी देशों के साथ संबंध सामान्य करने के लिए भी करना चाहिए। उनका कहना है कि पाकिस्तान को पहल करते हुए भारत और अफगानिस्तान के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखना चाहिए और लंबे समय से चले आ रहे विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश करनी चाहिए।

ईरान-अमेरिका समझौते के बाद पाकिस्तान की बढ़ी चर्चा

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने वाली बातचीत में पाकिस्तान की भूमिका की चर्चा हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने इस प्रक्रिया के दौरान कई स्तरों पर संपर्क बनाए रखने की कोशिश की। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी स्विटजरलैंड में हुई घटनाओं के बाद पाकिस्तान की भूमिका और असीम मुनीर की तारीफ की थी।

हालांकि इस पूरे घटनाक्रम में अंतिम समय पर कतर को मध्यस्थता का ज्यादा श्रेय मिला। इसके बावजूद पाकिस्तान में इसे अपनी कूटनीतिक वापसी के तौर पर देखा जा रहा है।

पाकिस्तानी अखबार डॉन ने अपने संपादकीय में लिखा कि अगर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति प्रयासों में योगदान दे सकता है तो उसे दक्षिण एशिया में भी इसी तरह की पहल करनी चाहिए। अखबार ने पाकिस्तान की तुलना उस दौर से की जब उसने अमेरिका और चीन के बीच शुरुआती संपर्क स्थापित कराने में भूमिका निभाई थी।

भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंध सुधारने की सलाह

डॉन ने शहबाज शरीफ सरकार को सुझाव दिया है कि पाकिस्तान को अब भारत और अफगानिस्तान के साथ तनाव कम करने पर ध्यान देना चाहिए। अखबार के मुताबिक, देश की आर्थिक स्थिति और सुरक्षा हितों को देखते हुए पड़ोसी देशों के साथ बेहतर रिश्ते जरूरी हैं।

संपादकीय में कहा गया कि पाकिस्तान को अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए भारत और अफगानिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाना चाहिए। साथ ही दोनों देशों के साथ लंबित मुद्दों को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश करनी चाहिए।

डॉन का कहना है कि अगर पाकिस्तान बातचीत का प्रस्ताव रखता है और सामने से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि क्षेत्र में शांति की राह में बाधा कौन बन रहा है।

भारत-पाकिस्तान के बीच फिर बातचीत की कोशिश

भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में पिछले कुछ समय से तनाव बना हुआ है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों के बीच ट्रैक-2 स्तर की बातचीत के कई दौर हो चुके हैं। इन बैठकों का मकसद विवादों का समाधान निकालना नहीं बल्कि तनाव कम करने और संवाद बनाए रखने पर केंद्रित रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, आने वाले समय में भारत और पाकिस्तान के बीच ट्रैक-2 बातचीत के कुछ और दौर हो सकते हैं। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं में दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और तनाव कम करने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।

सिंधु जल समझौते को लेकर भी तनाव

फिलहाल भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि को लेकर भी मतभेद बने हुए हैं। पाकिस्तान की ओर से लगातार बयान दिए जा रहे हैं कि भारत के फैसलों का असर उसके जल संसाधनों पर पड़ सकता है।

ऐसे माहौल में पाकिस्तान के विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों देशों को टकराव की जगह बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए। उनका मानना है कि क्षेत्रीय शांति और आर्थिक विकास के लिए भारत-पाकिस्तान संबंधों में स्थिरता जरूरी है।

अब देखना होगा कि पाकिस्तान की ओर से दोस्ती और बातचीत की यह पहल केवल बयानबाजी तक सीमित रहती है या वास्तव में दोनों देशों के बीच संवाद का नया रास्ता खुलता है।