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पीएम मोदी के तोहफों की फिर होगी नीलामी, 1498 उपहारों पर लगा सकते हैं बोली; जानिए क्या-क्या है शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग-अलग मौकों पर मिले स्मृति चिह्न अब आम लोगों, कला प्रेमियों और संग्रहकर्ताओं के लिए ई-नीलामी के जरिए उपलब्ध हैं। प्रधानमंत्री मेमेंटोज ई-ऑक्शन के आठवें संस्करण में कुल 1,498 वस्तुओं को शामिल किया गया है। इनमें देश की अलग-अलग क्षेत्रीय कलाओं, पारंपरिक शिल्प, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत और खेल जगत से जुड़ी यादगार वस्तुएं शामिल हैं। इस बार संग्रह में 50 ऐसी चुनिंदा वस्तुओं को भी अलग से चिन्हित किया गया है, जिन्हें ‘हीरो ऑब्जेक्ट्स’ के तौर पर पेश किया गया है।

ई-नीलामी 17 सितंबर 2026 से शुरू हो चुकी है और 31 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। इसमें हिस्सा लेने के लिए इच्छुक लोग आधिकारिक पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं। नीलामी के लिए रखी गई वस्तुओं को दिल्ली स्थित नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट (NGMA) में भी प्रदर्शित किया गया है, जहां लोग इन्हें प्रत्यक्ष रूप से देख सकते हैं। नीलामी से मिलने वाली पूरी राशि ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के लिए इस्तेमाल की जाएगी।

सबसे ज्यादा शुरुआती कीमत वाली वस्तुओं में चांदी की राम प्रतिमा

इस बार की नीलामी में कुछ वस्तुओं की शुरुआती कीमत लाखों रुपये रखी गई है। संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक, कर्नाटक से मिला भगवान राम का चांदी का स्मृति चिह्न प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। इसका बेस प्राइस 13.50 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा काकतीय कला तोरणम की चांदी की प्रतिकृति की शुरुआती कीमत 9 लाख रुपये और ‘ट्री ऑफ लाइफ’ गोंड कला की फ्रेम की गई पेंटिंग का बेस प्राइस 7.50 लाख रुपये रखा गया है।

इन वस्तुओं की खासियत केवल इनकी कीमत नहीं है, बल्कि इनके पीछे जुड़ी भारतीय कला और सांस्कृतिक परंपराएं भी इन्हें खास बनाती हैं। काकतीय कला तोरणम तेलंगाना के वारंगल क्षेत्र की ऐतिहासिक स्थापत्य परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि गोंड कला देश की प्रमुख लोक एवं जनजातीय चित्रकला परंपराओं में गिनी जाती है।

50 ‘हीरो ऑब्जेक्ट्स’ पर रहेगी खास नजर

आठवें संस्करण में 50 वस्तुओं को ‘हीरो ऑब्जेक्ट्स’ के तौर पर चुना गया है। मंत्रालय के अनुसार, ये संग्रह की कुछ विशिष्ट और उल्लेखनीय वस्तुएं हैं। भगवान राम के चांदी के स्मृति चिह्न के अलावा इनमें काकतीय कला तोरणम की सिल्वर रेप्लिका और गोंड आर्ट की ‘ट्री ऑफ लाइफ’ पेंटिंग शामिल हैं।

इस सूची में रथ पर जगन्नाथ परिवार भी शामिल है, जिसका बेस प्राइस 6 लाख रुपये है। वहीं 99.99 फाइन गोल्ड-प्लेटेड फ्रेम्ड राधा-कृष्ण आर्टवर्क की शुरुआती कीमत 5.40 लाख रुपये रखी गई है। इस तरह इस बार की सूची में धार्मिक, आध्यात्मिक और पारंपरिक कलाकृतियों के साथ-साथ विभिन्न इलाकों की हस्तशिल्प परंपराओं को भी जगह दी गई है।

देश के अलग-अलग राज्यों की कला का दिखेगा रंग

संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक, नीलामी में शामिल स्मृति चिह्न किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इन्हें देश के विभिन्न हिस्सों से प्राप्त किया गया है और संग्रह में कई राज्यों की सांस्कृतिक पहचान दिखाई देती है। मंत्रालय ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, बिहार और ओडिशा की वस्तुओं की बड़ी हिस्सेदारी का उल्लेख किया है।

संग्रह में पारंपरिक हस्तशिल्प और कलाकृतियों के अलावा भारत की आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को दर्शाने वाली वस्तुएं भी हैं। खेल जगत से जुड़े स्मृति चिह्न भी इस संस्करण का हिस्सा हैं। इस वजह से नीलामी की सूची केवल महंगी कलाकृतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें भारत की विविध सामाजिक और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की झलक दिखाई देती है।

प्रधानमंत्री को मिले उपहार कैसे बनते हैं नीलामी का हिस्सा?

प्रधानमंत्री को विभिन्न अवसरों पर देश-विदेश से मिलने वाले स्मृति चिह्नों में से कई वस्तुएं बाद में सार्वजनिक नीलामी के लिए रखी जाती हैं। प्रधानमंत्री मेमेंटोज ई-ऑक्शन इसी व्यवस्था का हिस्सा है। संस्कृति मंत्रालय और नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट की देखरेख में इन वस्तुओं का दस्तावेजीकरण, प्रदर्शनी और नीलामी से जुड़ी प्रक्रिया संचालित की जाती है।

इस पूरी व्यवस्था में मूल्यांकन और वैल्यूएशन से जुड़े संबंधित संस्थानों के साथ समन्वय किया जाता है। तकनीकी और पोर्टल से जुड़े काम में नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर यानी NIC की भूमिका है। भुगतान से संबंधित व्यवस्था के लिए SBI का सहयोग लिया जाता है, जबकि सफल बोली के बाद वस्तुओं की पैकिंग और डिलीवरी के लिए निर्धारित एजेंसी जिम्मेदारी संभालती है।

दिल्ली में प्रदर्शनी, ऑनलाइन लगानी होगी बोली

नीलामी में भाग लेने से पहले लोग इन वस्तुओं को देखने के लिए नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट, नई दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में जा सकते हैं। प्रदर्शनी का उद्देश्य केवल नीलामी की वस्तुओं को दिखाना ही नहीं है, बल्कि इनके कलात्मक और सांस्कृतिक महत्व से लोगों को परिचित कराना भी है।

नीलामी में भाग लेने की प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। इच्छुक नागरिक, संग्रहकर्ता, संस्थान, कॉरपोरेट और कला प्रेमी आधिकारिक पोर्टल पर जाकर पंजीकरण कर सकते हैं। इसके बाद उपलब्ध वस्तुओं को देखकर अपनी पसंद की वस्तु के लिए बोली लगाई जा सकती है।

आधिकारिक पोर्टल: pmmementos.gov.in

नीलामी की रकम कहां जाएगी?

इस पूरी पहल की एक अहम विशेषता यह है कि इससे मिलने वाली रकम को ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम में लगाया जाता है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मेमेंटोज ई-ऑक्शन को भारत की सांस्कृतिक विरासत और गंगा नदी के संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है।

यानी प्रधानमंत्री को मिले उपहारों की बिक्री से प्राप्त राशि किसी निजी उपयोग में जाने के बजाय गंगा के कायाकल्प और संरक्षण से जुड़े सरकारी कार्यक्रम में सहयोग करती है। यही व्यवस्था इस ई-नीलामी को सामान्य स्मृति चिह्नों की बिक्री से अलग स्वरूप देती है।

सात संस्करणों में 52 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जुटी

प्रधानमंत्री मेमेंटोज की नीलामी का यह आठवां संस्करण है। संस्कृति मंत्रालय की ओर से अगस्त 2026 में लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, 2021 से 2025 के बीच आयोजित पिछले सात संस्करणों से सरकार को कुल 52.19 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। आधिकारिक आंकड़ों में पहले संस्करण से 3.1 करोड़, दूसरे से 3.6 करोड़, तीसरे से 15.8 करोड़, चौथे से 14.4 करोड़, पांचवें से 11.16 करोड़, छठे से 2.24 करोड़ और सातवें संस्करण से 1.89 करोड़ रुपये की राशि दर्ज है।

संस्कृति मंत्रालय के मुताबिक, पिछले सात संस्करणों में कुल 7,441 स्मृति चिह्नों की नीलामी हुई। इस प्रक्रिया में नागरिकों, संग्रहकर्ताओं और संस्थानों ने भाग लिया है। मंत्रालय इसे भारतीय कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ सार्वजनिक भागीदारी का माध्यम भी मानता है।

इस बार खेल और कला से जुड़ी चीजें भी आकर्षण का केंद्र

इस संस्करण के संग्रह में पारंपरिक कलाकृतियों के साथ खेल उपलब्धियों से जुड़ी वस्तुओं को भी शामिल किया गया है। इससे नीलामी में रुचि रखने वाले लोगों के लिए संग्रह का दायरा और व्यापक हो गया है। संस्कृति मंत्रालय ने बताया है कि पूरी सूची में भारत की कला परंपरा, पारंपरिक कारीगरी, सांस्कृतिक प्रथाओं, आध्यात्मिक परंपराओं और खेल उपलब्धियों का प्रतिनिधित्व देखने को मिलता है।

पिछले संस्करणों में भी खेल जगत से जुड़ी यादगार वस्तुओं को जगह मिलती रही है। 2025 के सातवें संस्करण में पेंटिंग, मूर्तियां, धार्मिक प्रतिमाएं, हस्तशिल्प और खेल स्मृति चिह्नों का संग्रह शामिल था। उस संस्करण में 1,300 से ज्यादा वस्तुएं नीलामी के लिए रखी गई थीं और उससे पहले के संस्करणों से कुल राशि 50 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी थी।

31 अक्टूबर तक चलेगी प्रक्रिया

आठवें संस्करण की ई-नीलामी 17 सितंबर से 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी। यानी इच्छुक बोलीदाताओं के पास वस्तुओं को देखने, पंजीकरण करने और अपनी पसंद की वस्तुओं के लिए बोली लगाने के लिए निर्धारित अवधि उपलब्ध है। मंत्रालय ने नागरिकों, संस्थानों, कला प्रेमियों और संग्रहकर्ताओं से इस पहल में भाग लेने की अपील की है।

कुल मिलाकर, इस बार की पीएम मेमेंटोज ई-नीलामी में करीब 1,500 के आसपास स्मृति चिह्न शामिल हैं, जिनमें भारत के अलग-अलग राज्यों की कला, संस्कृति और शिल्प परंपराओं की झलक मिलती है। लाखों रुपये की शुरुआती कीमत वाली चांदी और गोल्ड-प्लेटेड कलाकृतियों से लेकर पारंपरिक कला और खेल से जुड़ी वस्तुओं तक, संग्रह को कई अलग-अलग श्रेणियों में देखा जा सकता है। नीलामी से जुटाई जाने वाली रकम को नमामि गंगे कार्यक्रम में लगाने की व्यवस्था के कारण यह प्रक्रिया सांस्कृतिक विरासत को सार्वजनिक भागीदारी और नदी संरक्षण के उद्देश्य से जोड़ती है।