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पुरुषोत्तम मास का आज से आरंभ: क्यों खास माना जाता है अधिकमास, जानिए नियम, पूजा और दान का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार आज से पवित्र अधिकमास की शुरुआत हो गई है, जिसका समापन 15 जून को होगा। इस बार यह दुर्लभ ज्येष्ठ अधिकमास माना जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं में इस महीने को “पुरुषोत्तम मास” कहा जाता है और इसे भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान पूजा-पाठ, दान और भक्ति करने से सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य फल मिलता है।

आखिर कैसे आता है अधिकमास?

हिंदू कैलेंडर सूर्य और चंद्रमा दोनों की गणना पर आधारित होता है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का माना जाता है, जबकि सूर्य वर्ष 365 दिनों का होता है। दोनों के बीच हर साल करीब 11 दिनों का अंतर पैदा होता है। यही अंतर लगभग तीन साल में एक अतिरिक्त महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए पंचांग में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिकमास कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार भगवान विष्णु ने इस माह को अपना नाम देकर “पुरुषोत्तम मास” का सम्मान दिया था।

इस महीने में क्या करना शुभ माना गया है?

धर्म शास्त्रों में अधिकमास को भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ समय बताया गया है। इस दौरान भगवान विष्णु, श्रीराम और श्रीकृष्ण की उपासना का विशेष महत्व माना जाता है।

  • रोज सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • गीता, रामचरितमानस और विष्णु सहस्रनाम का पाठ लाभकारी माना गया है।
  • भजन-कीर्तन, सत्संग और व्रत करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
  • तुलसी पूजा और दीपदान करना भी शुभ माना जाता है।
  • जरूरतमंद लोगों की सहायता और सेवा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

किन कार्यों से दूरी रखने की सलाह?

अधिकमास को सांसारिक भोग-विलास से दूर रहकर भक्ति में समय लगाने का महीना माना जाता है। इसलिए कुछ मांगलिक और नकारात्मक कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

  • विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्य नहीं किए जाते।
  • क्रोध, विवाद और अपशब्दों से दूर रहना चाहिए।
  • तामसिक भोजन और नशे का सेवन अशुभ माना गया है।
  • किसी का अपमान या अनादर करने से बचना चाहिए।
  • झूठ और गलत कामों से दूरी बनाए रखना शुभ माना जाता है।

कौन-सा दान माना जाता है फलदायी?

अधिकमास में दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि श्रद्धा से किया गया दान जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा लाता है।

  • गेहूं, चावल और दाल का दान शुभ माना गया है।
  • पीले वस्त्र, घी और फलों का दान लाभकारी बताया गया है।
  • गरीब और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना पुण्यदायी माना गया है।
  • धार्मिक पुस्तकों और जल से भरे पात्र का दान भी शुभ फल देता है।

(Photo : AI Generated)