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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेशेल्स यात्रा: हिंद महासागर साझेदारी को नई दिशा देने की तैयारी

हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने के उद्देश्य से भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi शनिवार (27 जून, 2026) को तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर सेशेल्स पहुंचे। यह यात्रा भारत और सेशेल्स के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों को और गहरा करने के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा, नीली अर्थव्यवस्था और विकास सहयोग जैसे अहम मुद्दों पर नए आयाम जोड़ने के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

प्रधानमंत्री मोदी का विमान जैसे ही हिंद महासागर में स्थित द्वीप राष्ट्र Seychelles के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरा, वहां उनका भव्य और पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया। सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी और एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने स्वयं मौजूद रहकर प्रधानमंत्री का अभिनंदन किया। स्वागत समारोह के दौरान औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया, जो इस यात्रा के कूटनीतिक महत्व को दर्शाता है।

हवाई अड्डे पर हुए स्वागत से अभिभूत प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए कहा कि उन्हें सेशेल्स में जिस गर्मजोशी और सम्मान के साथ स्वागत मिला, वह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत और सेशेल्स के बीच संबंध विश्वास और आपसी सम्मान पर आधारित हैं।

इस यात्रा को लेकर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने यह भी कहा था कि सेशेल्स भारत के लिए केवल एक पड़ोसी देश नहीं बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार है। उन्होंने इस संबंध को “विजन महासागर” के व्यापक ढांचे से जोड़ते हुए इसे सुरक्षा, स्थिरता और साझा विकास की दिशा में अहम बताया था। उनका कहना था कि भारत और सेशेल्स वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ मिलकर संतुलित और सहयोगात्मक विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं।

यह दौरा विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी को सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के 50वें वर्षगांठ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत की भागीदारी दोनों देशों के संबंधों की गहराई और परस्पर विश्वास को दर्शाती है।

समारोह के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी भी हिस्सा लेगी, जिसमें भारतीय नौसेना के दो युद्धपोत शामिल रहेंगे। यह उपस्थिति न केवल सैन्य सहयोग का प्रतीक है बल्कि हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी उजागर करती है।

यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी के बीच विस्तृत द्विपक्षीय वार्ता प्रस्तावित है। इस बातचीत में दोनों नेता व्यापार, रक्षा, समुद्री सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वास्थ्य, शिक्षा और क्षमता निर्माण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। साथ ही क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में नीली अर्थव्यवस्था यानी ब्लू इकोनॉमी को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी, क्योंकि सेशेल्स और भारत दोनों ही समुद्री संसाधनों पर आधारित विकास मॉडल को आगे बढ़ाने में रुचि रखते हैं। इसके अलावा समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी एजेंडे में शामिल हैं।

प्रधानमंत्री मोदी इस यात्रा के दौरान सेशेल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित करेंगे। यह संबोधन भारत की विदेश नीति और हिंद महासागर क्षेत्र में उसकी भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश देने वाला माना जा रहा है। इसके अलावा वे वहां रहने वाले भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे, जिसमें भारत से जुड़े सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों पर चर्चा होगी।

सेशेल्स सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी मित्रता और मजबूत साझेदारी का प्रतीक है। बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि 1976 में सेशेल्स की स्वतंत्रता के बाद से ही भारत और सेशेल्स के बीच राजनयिक संबंध लगातार मजबूत होते रहे हैं।

पिछले कई वर्षों में दोनों देशों ने कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाया है। इनमें समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, मानव संसाधन विकास, जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति और सतत विकास जैसे विषय प्रमुख हैं। विशेष रूप से हिंद महासागर में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए दोनों देशों ने मिलकर कई पहल की हैं।

गौरतलब है कि इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी वर्ष 2015 में भी सेशेल्स का दौरा कर चुके हैं। वहीं सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. हर्मिनी ने इस वर्ष की शुरुआत में भारत की आधिकारिक यात्रा की थी, जिसमें दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति बनी थी।

इस बार की यात्रा को उस निरंतर संवाद और सहयोग की अगली कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जो पिछले कई वर्षों से भारत और सेशेल्स के बीच विकसित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर में बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच यह दौरा भारत की रणनीतिक उपस्थिति को और मजबूत करेगा। साथ ही यह छोटे द्वीपीय देशों के साथ भारत की साझेदारी को भी नई दिशा देगा, जो जलवायु परिवर्तन और समुद्री संसाधनों पर अत्यधिक निर्भर हैं।

यात्रा के दौरान कई समझौतों और समझदारी पत्रों (MoUs) पर भी हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिनमें डिजिटल सहयोग, समुद्री निगरानी, आपदा प्रबंधन और प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हो सकते हैं।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की यह तीन दिवसीय यात्रा केवल एक औपचारिक राजकीय दौरा नहीं बल्कि भारत की हिंद महासागर नीति और वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ उसकी साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।