फीफा वर्ल्ड कप 2026 में फ्रांस ने एक बार फिर अपनी बादशाहत साबित कर दी है। मौजूदा चैंपियन फ्रांस ने क्वार्टर फाइनल मुकाबले में मोरक्को को 2-0 से मात देकर टूर्नामेंट के अंतिम चार में जगह बना ली। इस जीत के साथ फ्रांस ने लगातार तीसरे वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल खेलने का रिकॉर्ड कायम किया है। इससे पहले साल 2018 और 2022 में भी फ्रांस ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया था और दोनों बार टीम फाइनल तक पहुंचने में सफल रही थी।
मोरक्को के खिलाफ मुकाबले में फ्रांस को जीत के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिली, लेकिन कोई भी टीम गोल नहीं कर सकी। दूसरे हाफ में फ्रांस ने अपनी आक्रामक रणनीति को और तेज किया और कुछ ही मिनटों के अंतराल में दो गोल दागकर मैच पूरी तरह अपने पक्ष में कर लिया।
कप्तान किलियन एम्बाप्पे ने इस मुकाबले में एक बार फिर अहम भूमिका निभाई। शुरुआती हाफ में पेनल्टी मिस करने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी और दूसरे हाफ में शानदार गोल करके टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद उस्मान डेम्बेले ने दूसरा गोल कर फ्रांस की जीत पर मुहर लगा दी।
अब सेमीफाइनल में फ्रांस का मुकाबला स्पेन और बेल्जियम के बीच खेले जाने वाले दूसरे क्वार्टर फाइनल मैच के विजेता से होगा। टीम की नजरें अब लगातार दूसरी बार वर्ल्ड कप ट्रॉफी जीतने की ओर हैं।
एम्बाप्पे ने मेसी के बड़े रिकॉर्ड की बराबरी की
मोरक्को के खिलाफ गोल करते ही किलियन एम्बाप्पे ने टूर्नामेंट में अपने गोलों की संख्या 8 पहुंचा दी। इसके साथ ही उन्होंने अर्जेंटीना के महान खिलाड़ी लियोनेल मेसी के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली। इस वर्ल्ड कप में दोनों खिलाड़ियों के खाते में 8-8 गोल दर्ज हैं।
हालांकि गोल्डन बूट की रेस में एम्बाप्पे फिलहाल आगे निकल गए हैं। इसकी वजह उनके तीन असिस्ट हैं, जबकि मेसी ने अब तक एक असिस्ट किया है। यही कारण है कि गोल और योगदान के कुल आंकड़ों के आधार पर एम्बाप्पे शीर्ष दावेदार बने हुए हैं।
अगर सभी वर्ल्ड कप टूर्नामेंटों को मिलाकर देखा जाए तो एम्बाप्पे के नाम अब 20 गोल हो चुके हैं। वह इस सूची में दूसरे नंबर पर हैं। उनसे आगे सिर्फ लियोनेल मेसी हैं, जिन्होंने वर्ल्ड कप इतिहास में 21 गोल किए हैं। एम्बाप्पे के पास अब मेसी के रिकॉर्ड को तोड़ने का शानदार मौका है।
शुरुआत से ही फ्रांस ने बनाया दबाव
मोरक्को के खिलाफ मुकाबले में फ्रांस ने पहले मिनट से ही आक्रामक खेल दिखाया। टीम ने गेंद पर ज्यादा नियंत्रण रखते हुए लगातार विपक्षी गोलपोस्ट पर हमले किए। पांचवें मिनट में एम्बाप्पे ने तेज शॉट लगाकर गोल करने की कोशिश की, लेकिन मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार बचाव करते हुए फ्रांस को शुरुआती बढ़त लेने से रोक दिया।
इसके बाद फ्रांस के डिफेंडर दायो उपामेकानो ने हेडर के जरिए गोल करने का प्रयास किया, लेकिन बूनू ने फिर बेहतरीन प्रतिक्रिया देते हुए गेंद को रोक लिया। डेम्बेले, देजिरे डुए और माइकल ओलीसे जैसे खिलाड़ियों ने भी कई मौके बनाए, मगर मोरक्को की डिफेंस लाइन काफी मजबूत नजर आई।
मोरक्को ने भी जवाबी हमलों की कोशिश की और कई बार फ्रांस की रक्षा पंक्ति को चुनौती दी। अफ्रीकी टीम जानती थी कि फ्रांस जैसी मजबूत टीम के खिलाफ छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है। इसलिए मोरक्को के खिलाड़ियों ने पहले हाफ में बेहद अनुशासित खेल दिखाया।
एम्बाप्पे पेनल्टी से चूके, लेकिन बाद में बने हीरो
मैच के 26वें मिनट में फ्रांस को गोल करने का सुनहरा मौका मिला। मोरक्को के नौसैर मजराउई ने पेनल्टी एरिया के अंदर एम्बाप्पे को गिरा दिया, जिसके बाद रेफरी ने फ्रांस के पक्ष में पेनल्टी दे दी।
पेनल्टी लेने के लिए खुद कप्तान एम्बाप्पे आगे आए, लेकिन उनका शॉट मोरक्को के गोलकीपर यासीन बूनू ने शानदार अंदाज में रोक दिया। बूनू ने सही दिशा में छलांग लगाकर फ्रांस की उम्मीदों को उस समय बड़ा झटका दिया।
पेनल्टी बचने के बाद मोरक्को का आत्मविश्वास बढ़ गया और पहले हाफ के बाकी समय में उसने फ्रांस को गोल करने का कोई मौका नहीं दिया। दोनों टीमें बिना गोल के ब्रेक तक गईं।
दूसरे हाफ में बदला मुकाबले का रुख
दूसरे हाफ की शुरुआत के बाद फ्रांस ने अपना दबाव और बढ़ा दिया। टीम लगातार मोरक्को के डिफेंस को तोड़ने की कोशिश करती रही और आखिरकार 60वें मिनट में उसे सफलता मिल गई।
किलियन एम्बाप्पे ने बॉक्स के बाहर से बेहद शानदार कर्लिंग शॉट लगाया। गेंद इतनी तेजी और सटीकता से गई कि गोलकीपर बूनू पूरी कोशिश के बावजूद उसे रोक नहीं सके। इस गोल के साथ फ्रांस 1-0 से आगे हो गया और एम्बाप्पे ने अपनी पिछली गलती की भरपाई भी कर दी।
फ्रांस यहीं नहीं रुका। सिर्फ छह मिनट बाद टीम ने अपनी बढ़त को दोगुना कर दिया। इस बार उस्मान डेम्बेले ने शानदार फिनिशिंग दिखाते हुए गेंद को गोलपोस्ट में पहुंचा दिया। बूनू ने गेंद रोकने की कोशिश की, लेकिन वह उसे गोललाइन पार करने से नहीं बचा सके।
दो गोल से पीछे होने के बाद मोरक्को ने वापसी के लिए पूरी ताकत लगा दी, लेकिन फ्रांस की मजबूत डिफेंस लाइन ने उसे कोई सफलता नहीं मिलने दी। आखिरकार मुकाबला 2-0 के स्कोर पर समाप्त हुआ और फ्रांस ने सेमीफाइनल का टिकट हासिल कर लिया।
मोरक्को की हार के साथ अफ्रीका का सफर खत्म
इस हार के साथ मोरक्को का ऐतिहासिक अभियान समाप्त हो गया। टूर्नामेंट में बची हुई अफ्रीकी टीम के रूप में मोरक्को से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन फ्रांस की मजबूत टीम के सामने उसे हार का सामना करना पड़ा।
मोरक्को ने पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था और कई बड़ी टीमों को चुनौती दी थी। हालांकि क्वार्टर फाइनल में फ्रांस के अनुभव और स्टार खिलाड़ियों के सामने उसकी चुनौती खत्म हो गई।
पेरिस में जश्न, लंदन में तनाव
फ्रांस की जीत के बाद राजधानी पेरिस में प्रशंसकों ने जमकर जश्न मनाया। बड़ी संख्या में फुटबॉल समर्थक सड़कों पर उतरे और टीम की जीत का उत्सव मनाया। हालांकि दूसरी ओर लंदन में कुछ जगहों पर हालात तनावपूर्ण हो गए।
फ्रांस की जीत के बाद फुटबॉल प्रशंसकों की भारी भीड़ सड़कों पर जमा हो गई। भीड़ को नियंत्रित करने के दौरान मेट्रोपॉलिटन पुलिस का एक अधिकारी घायल हो गया। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को अतिरिक्त बल तैनात करना पड़ा और कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई।
अब फ्रांस की नजरें सेमीफाइनल मुकाबले पर हैं, जहां टीम एक और जीत हासिल कर खिताब की ओर अपना कदम बढ़ाना चाहेगी। एम्बाप्पे की शानदार फॉर्म और टीम के संतुलित प्रदर्शन को देखते हुए फ्रांस को खिताब का बड़ा दावेदार माना जा रहा है।