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The Scoopp

 

बंदी सिंहों की रिहाई को लेकर मोहाली में तनाव, गवर्नर हाउस कूच रोकने पर प्रदर्शनकारियों से भिड़ी पुलिस

पंजाब के मोहाली में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर निकाला गया प्रदर्शन उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब कौमी इंसाफ मोर्चा के समर्थकों ने चंडीगढ़ की ओर बढ़ने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों का मकसद पंजाब के गवर्नर हाउस का घेराव करना था। हालांकि, मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग कर उन्हें आगे जाने से रोक दिया। काफी देर तक प्रदर्शनकारी मौके पर नारेबाजी करते रहे और आगे बढ़ने की कोशिश करते रहे। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया। इसके साथ ही आंसू गैस के गोले छोड़े गए और वाटर कैनन का इस्तेमाल भी किया गया।

कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से जेलों में बंद उन सिख कैदियों की रिहाई की मांग उठा रहा है, जिन्हें समर्थक बंदी सिंहों के नाम से संबोधित करते हैं। मोर्चे का कहना है कि ऐसे कई कैदी अपनी सजा की निर्धारित अवधि पूरी होने के बावजूद लंबे समय से जेलों में बंद हैं। इसी मुद्दे को लेकर संगठन ने स्वतंत्रता दिवस के दिन पंजाब के गवर्नर हाउस का घेराव करने का ऐलान किया था। प्रशासन को पहले से ही इस कार्यक्रम के बड़े रूप लेने की आशंका थी।

चंडीगढ़ की तरफ बढ़ने पर पुलिस ने रोका

15 अगस्त को बड़ी संख्या में कौमी इंसाफ मोर्चा से जुड़े समर्थक मोहाली की तरफ जुटे। प्रदर्शनकारियों ने चंडीगढ़ की ओर कूच करने की कोशिश की। उनका लक्ष्य गवर्नर हाउस तक पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करना था। लेकिन पुलिस ने मोहाली-चंडीगढ़ बॉर्डर पर पहले ही सुरक्षा का व्यापक इंतजाम कर रखा था।

प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए सड़क पर बैरिकेड लगाए गए थे। पुलिस बल की मौजूदगी भी बढ़ा दी गई थी। जैसे-जैसे प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने की कोशिश करते गए, मौके पर तनाव बढ़ता गया। पुलिस ने उन्हें बैरिकेड पार नहीं करने दिया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक बहस, नारेबाजी और धक्का-मुक्की होती रही।

हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए, जब प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा पार कर आगे जाने का प्रयास किया। पुलिस ने पहले भीड़ को पीछे हटने के लिए कहा, लेकिन स्थिति पूरी तरह शांत नहीं हुई। इसके बाद पुलिस की ओर से बल प्रयोग किया गया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस के गोले छोड़े गए। प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का भी सहारा लिया गया।

कई लोगों के घायल होने की सूचना

पुलिस कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारियों के घायल होने की सूचना सामने आई है। वहीं, प्रदर्शनकारियों को रोकने के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के भी चोटिल होने की बात कही गई है। मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग स्थानों पर पीछे हटाया गया।

प्रशासन की प्राथमिकता स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना थी। चंडीगढ़ में उस दिन पहले से ही सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। ऐसे में किसी बड़े समूह के अचानक शहर में प्रवेश करने और संवेदनशील इलाके की तरफ बढ़ने को लेकर पुलिस अतिरिक्त सतर्क थी।

पहले से तैयार था सुरक्षा का पूरा प्लान

कौमी इंसाफ मोर्चा के गवर्नर हाउस घेराव के ऐलान के बाद पुलिस ने चंडीगढ़ से लगती पंजाब की सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी थी। प्रमुख रास्तों और प्रवेश बिंदुओं पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। पंजाब से चंडीगढ़ की ओर आने वाले वाहनों की जांच भी की जा रही थी।

सुरक्षा एजेंसियों की नजर उन रास्तों पर विशेष रूप से थी, जिनका इस्तेमाल प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ पहुंचने के लिए कर सकते थे। संवेदनशील इलाकों में भी अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई थी। गवर्नर हाउस की ओर जाने वाले रास्तों पर निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ बैरिकेडिंग भी की गई थी।

पुलिस की रणनीति यह थी कि प्रदर्शनकारियों की भीड़ को एक साथ चंडीगढ़ में दाखिल होने से रोका जाए। प्रशासन को आशंका थी कि यदि बड़ी संख्या में लोग शहर में प्रवेश कर गए तो यातायात और कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पहले से ही हाई अलर्ट पर था।

लंबे समय से जारी है बंदी सिंहों की रिहाई की मांग

कौमी इंसाफ मोर्चा का मुख्य मुद्दा जेलों में बंद सिख कैदियों की रिहाई है। संगठन का कहना है कि कुछ बंदी सिंह लंबे समय से जेल में हैं और उनकी सजा पूरी होने के बाद भी उन्हें रिहा नहीं किया गया। इसी मांग को लेकर मोर्चा पहले भी अलग-अलग स्तर पर प्रदर्शन और आंदोलन कर चुका है।

मोर्चे से जुड़े समर्थक सरकार और प्रशासन से इन कैदियों के मामलों पर दोबारा विचार करने की मांग करते रहे हैं। उनका तर्क है कि जिन कैदियों ने कानूनी रूप से निर्धारित सजा पूरी कर ली है, उनके मामलों में रिहाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी चाहिए। यही मुद्दा लंबे समय से सिख संगठनों के आंदोलनों का प्रमुख हिस्सा रहा है।

स्वतंत्रता दिवस पर गवर्नर हाउस के घेराव का कार्यक्रम भी इसी मांग को लेकर रखा गया था। प्रदर्शनकारियों का उद्देश्य सरकार तक अपनी बात पहुंचाना और बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को फिर से प्रमुखता से उठाना था।

हाईकोर्ट तक पहुंचा था प्रदर्शन का मामला

कौमी इंसाफ मोर्चा के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में भी मामला पहुंच चुका था। याचिकाकर्ता विवेक सिंगला की ओर से दायर जनहित याचिका में आशंका जताई गई थी कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी चंडीगढ़ में प्रवेश करने की कोशिश कर सकते हैं।

याचिका में कहा गया था कि यदि प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में शहर में पहुंचते हैं और गवर्नर हाउस का घेराव करने का प्रयास करते हैं, तो इससे कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा शहर की यातायात व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी।

याचिका में यह चिंता भी सामने रखी गई थी कि भारी भीड़ के कारण प्रमुख सड़कों पर जाम लग सकता है। इससे आम लोगों के साथ-साथ आपातकालीन सेवाओं के वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होने की संभावना थी। स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रमों के दौरान किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया गया था।

प्रदर्शन के बाद बढ़ी सियासी और प्रशासनिक चर्चा

मोहाली-चंडीगढ़ सीमा पर हुए घटनाक्रम ने एक बार फिर बंदी सिंहों की रिहाई के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपनी मांग को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती है।

स्वतंत्रता दिवस जैसे संवेदनशील अवसर पर किसी बड़े प्रदर्शन को नियंत्रित करना पुलिस के लिए भी चुनौतीपूर्ण था। चंडीगढ़ में पहले से सुरक्षा इंतजाम होने के कारण प्रशासन किसी भी स्थिति में प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों तक पहुंचने से रोकना चाहता था। इसी वजह से सीमा क्षेत्र में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी।

फिलहाल पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मुद्दा यही है कि बंदी सिंहों की रिहाई की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा आगे किस रणनीति के साथ आंदोलन करता है। वहीं, मोहाली में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों के घायल होने और पुलिसकर्मियों के चोटिल होने की बात ने भी घटनाक्रम को गंभीर बना दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सरकार, प्रशासन और सिख संगठनों के बीच बातचीत तथा आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।