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बांग्लादेश के नए पासपोर्ट में फिर लौटा ‘Except Israel’, ई-पासपोर्ट डिजाइन में मंदिर-मस्जिद समेत कई धार्मिक स्थलों को मिली जगह

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने पासपोर्ट से जुड़ा एक अहम बदलाव किया है, जिसका असर देश की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय रुख पर भी दिखाई दे सकता है। बांग्लादेश ने अपने ई-पासपोर्ट में एक बार फिर ‘Except Israel’ यानी ‘इजरायल को छोड़कर’ वाली शर्त को शामिल कर दिया है। इसका मतलब है कि बांग्लादेशी नागरिकों के पासपोर्ट पर अब दोबारा यह उल्लेख होगा कि यह दस्तावेज इजरायल की यात्रा के लिए मान्य नहीं है।

बांग्लादेश के गृह मंत्रालय की ओर से जारी निर्देश के बाद यह बदलाव लागू किया जा रहा है। मंत्रालय ने आव्रजन और पासपोर्ट विभाग को नए डिजाइन के अनुसार पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है। अधिकारियों के मुताबिक, आगे जारी होने वाले सभी नए ई-पासपोर्ट में यह बदलाव दिखाई देगा।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बांग्लादेश की राजनीति में फिलिस्तीन और इजरायल से जुड़े मुद्दे लगातार चर्चा में बने हुए हैं। सरकार का कहना है कि पासपोर्ट में किए गए बदलाव देश की विदेश नीति, जनता की भावनाओं और फिलिस्तीन को लेकर बांग्लादेश के पुराने रुख को ध्यान में रखते हुए किए गए हैं।

छह साल बाद पासपोर्ट में वापस आया पुराना नियम

बांग्लादेशी पासपोर्ट पर इजरायल को लेकर यह प्रतिबंध पहले से मौजूद था। पुराने पासपोर्ट में लिखा होता था कि यह दस्तावेज दुनिया के सभी देशों में यात्रा के लिए मान्य है, लेकिन इजरायल को छोड़कर। हालांकि, साल 2020 में तत्कालीन अवामी लीग सरकार के कार्यकाल के दौरान इस लाइन को पासपोर्ट से हटा दिया गया था।

उस समय बांग्लादेश ने अपने ई-पासपोर्ट सिस्टम की शुरुआत की थी। लगभग 45 अरब टका की लागत से शुरू की गई इस सेवा के तहत पासपोर्ट का नया डिजाइन तैयार किया गया था। इसी बदलाव के दौरान ‘Except Israel’ वाली लाइन को हटा दिया गया था।

पासपोर्ट से इस वाक्य को हटाने के बाद बांग्लादेश में कई कट्टरपंथी संगठनों और समूहों ने इसका विरोध किया था। इन संगठनों की मांग थी कि सरकार पुराने प्रावधान को फिर से लागू करे और इजरायल के संबंध में देश की नीति को स्पष्ट रखे।

अब करीब छह साल बाद सरकार ने इस शब्द को दोबारा जोड़ने का फैसला लिया है। अधिकारियों के अनुसार, यह बदलाव केवल पासपोर्ट के शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि ई-पासपोर्ट के डिजाइन और वॉटरमार्क में भी कई संशोधन किए गए हैं।

ई-पासपोर्ट के डिजाइन में किए गए कई बड़े बदलाव

गृह मंत्रालय के आदेश के अनुसार, नए ई-पासपोर्ट बुकलेट में मौजूद तस्वीरों और प्रतीकों को दोबारा व्यवस्थित किया गया है। इसके साथ ही पासपोर्ट के डिजाइन, वॉटरमार्क और सुरक्षा फीचर्स में भी बदलाव किया गया है।

सरकारी दस्तावेज के मुताबिक, नए वॉटरमार्क में बांग्लादेश की संस्कृति, इतिहास, धार्मिक विविधता और राष्ट्रीय पहचान को दर्शाने वाली कई तस्वीरें शामिल की गई हैं। इन बदलावों का उद्देश्य बांग्लादेश की पहचान को दर्शाना बताया जा रहा है। नए डिजाइन में देश के प्राकृतिक संसाधनों, ऐतिहासिक स्थलों और धार्मिक विरासत को जगह दी गई है।

पासपोर्ट के वॉटरमार्क में बांग्लादेश के राष्ट्रीय फूल वॉटर लिली, रॉयल बंगाल टाइगर, सुप्रीम कोर्ट की इमारत और कई प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों की तस्वीरें शामिल की गई हैं। इसके अलावा देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों को भी इसमें स्थान दिया गया है। इनमें मंदिर, मस्जिद और चर्च से जुड़ी तस्वीरें शामिल हैं।

मंदिर, मस्जिद और चर्च को मिली जगह

नए ई-पासपोर्ट डिजाइन की खास बात यह है कि इसमें बांग्लादेश की धार्मिक विविधता को दिखाने की कोशिश की गई है। पासपोर्ट में अलग-अलग धर्मों से जुड़े प्रमुख स्थलों की तस्वीरें जोड़ी गई हैं।

इनमें दिनाजपुर का प्रसिद्ध कांतनगर मंदिर, बंदरबन का गोल्डन टेंपल, ढाका स्थित बैतुल मुकर्रम राष्ट्रीय मस्जिद, साठ गुंबद वाली मस्जिद और होली रोजरी चर्च जैसी जगहों को शामिल किया गया है।

इसके अलावा बांग्लादेश की प्राकृतिक और सांस्कृतिक पहचान को दिखाने वाली तस्वीरें भी जोड़ी गई हैं। इनमें सुंदरबन के जंगल, चाय के बागान, आम के बगीचे और अन्य ऐतिहासिक स्थान शामिल हैं।

सरकार का कहना है कि इन तस्वीरों के जरिए देश की विविध संस्कृति और सभी धर्मों के प्रति सम्मान को दर्शाने की कोशिश की गई है।

जुलाई 2024 आंदोलन से जुड़े चेहरों को भी जगह

नए ई-पासपोर्ट में केवल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को ही नहीं बल्कि हालिया घटनाओं से जुड़े कुछ चेहरों को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े छात्र आंदोलन से जुड़े कुछ आंदोलनकारियों की तस्वीरें भी नए वॉटरमार्क डिजाइन में जोड़ी गई हैं।

इनमें रंगपुर की बेगम रोकेया यूनिवर्सिटी के छात्र अबू सईद, मीर महफूजुर रहमान मुग्धो और वसीम अकरम के नाम शामिल हैं। सरकार की ओर से इन तस्वीरों को शामिल करने का उद्देश्य देश के हालिया इतिहास को दर्शाना बताया जा रहा है। इन बदलावों के जरिए ई-पासपोर्ट को बांग्लादेश की वर्तमान राजनीतिक और सामाजिक परिस्थितियों से जोड़ने की कोशिश की गई है।

फिलिस्तीन मुद्दे से जुड़ा फैसला माना जा रहा है

बांग्लादेश लंबे समय से फिलिस्तीन के मुद्दे पर अपना समर्थन जताता रहा है। इजरायल के साथ उसके आधिकारिक संबंध नहीं हैं और वह फिलिस्तीन के लिए अलग राष्ट्र की मांग का समर्थन करता रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पासपोर्ट में ‘Except Israel’ को वापस शामिल करना इसी नीति को दोहराने की कोशिश है।

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह फैसला प्रधानमंत्री तारिक रहमान के निर्देश पर लिया गया है। इसे फिलिस्तीन समर्थक संगठनों और देश के धार्मिक समूहों के दबाव के बीच उठाया गया कदम भी माना जा रहा है।

हालांकि सरकार की ओर से इस फैसले को किसी एक समूह को खुश करने के लिए लिया गया कदम नहीं बताया गया है। आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि यह बदलाव बांग्लादेश की विदेश नीति और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप है।

पासपोर्ट बदलाव से अंतरराष्ट्रीय संदेश देने की कोशिश

किसी भी देश का पासपोर्ट केवल यात्रा दस्तावेज नहीं होता, बल्कि वह देश की नीतियों और पहचान का भी प्रतिनिधित्व करता है। बांग्लादेश द्वारा पासपोर्ट में किए गए इन बदलावों को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।

‘Except Israel’ की वापसी से बांग्लादेश ने एक बार फिर इजरायल को लेकर अपने पुराने रुख को स्पष्ट किया है। वहीं, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक प्रतीकों को शामिल करके सरकार ने देश की बहुधार्मिक पहचान को भी सामने रखने की कोशिश की है।

नए ई-पासपोर्ट में सुरक्षा फीचर्स के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रतीकों और ऐतिहासिक विरासत को महत्व दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे बांग्लादेश की पहचान और संस्कृति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित होगी।

इस पूरे बदलाव के बाद अब जारी होने वाले नए पासपोर्ट में इजरायल को लेकर प्रतिबंध वाली लाइन के साथ-साथ देश की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की झलक भी दिखाई देगी। यह फैसला बांग्लादेश की घरेलू राजनीति और विदेश नीति दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।