भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement-FTA) की प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्पेन की राजधानी मैड्रिड में आयोजित भारत-स्पेन बिजनेस फोरम के दौरान कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौते से जुड़ी औपचारिकताएं लगभग पूरी हो चुकी हैं और आने वाले कुछ महीनों में इसे लागू किए जाने की उम्मीद है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह समझौता केवल भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार को नई ऊंचाई नहीं देगा, बल्कि भारत और स्पेन के आर्थिक रिश्तों को भी पहले से कहीं अधिक मजबूत बनाएगा।
मैड्रिड में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत और स्पेन के बीच सहयोग का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने इसे भविष्य की एक बड़ी आर्थिक साझेदारी बताया, जिसमें निवेश, तकनीक, नवाचार और औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। उनके अनुसार, आने वाले वर्षों में दोनों देशों के कारोबारी संबंध नई गति पकड़ेंगे और एफटीए इस दिशा में एक महत्वपूर्ण आधार साबित होगा।
उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच समझौते का मसौदा पहले ही अंतिम रूप ले चुका है। फिलहाल दस्तावेजों की कानूनी समीक्षा यानी लीगल स्क्रबिंग का अंतिम चरण चल रहा है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौते को लागू करने की औपचारिक कार्रवाई शुरू होगी। मंत्री ने कहा कि कानूनी जांच अगले एक-दो सप्ताह में पूरी होने की संभावना है और इसके बाद आगे की प्रशासनिक प्रक्रियाएं तेजी से आगे बढ़ेंगी।
पीयूष गोयल ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के कुछ समय बाद भारत-ईयू एफटीए को भी प्रभावी बनाया जाएगा। उनका कहना था कि भारत लगातार दुनिया के प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। इससे भारतीय उद्योगों को नए बाजार मिलेंगे और विदेशी निवेशकों के लिए भी भारत अधिक आकर्षक गंतव्य बनकर उभरेगा।
उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि वर्ष 2026 की पहली तिमाही तक यह समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा। यदि तय समयसीमा के अनुसार सभी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं तो यह यूरोपीय संघ के इतिहास में सबसे तेज गति से स्वीकृत और लागू होने वाले व्यापार समझौतों में शामिल हो सकता है। इससे दोनों पक्षों के बीच व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने इस समझौते के राजनीतिक महत्व पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ के सभी 27 सदस्य देशों ने बिना किसी विरोध के इस समझौते को समर्थन दिया है। वहीं भारत में भी इसे लेकर व्यापक सहमति बनी हुई है। उनके अनुसार, किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते के लिए राजनीतिक समर्थन बेहद महत्वपूर्ण होता है और इस मामले में भारत तथा यूरोपीय संघ दोनों ही सकारात्मक स्थिति में हैं।
गोयल ने कहा कि यह समझौता केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसके जरिए निवेश, शिक्षा, अनुसंधान, विज्ञान, नवाचार, पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, डिजिटल तकनीक, हरित ऊर्जा, अंतरिक्ष सहयोग और रक्षा जैसे कई क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच व्यापक सहयोग का यह ढांचा आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित करेगा।
उन्होंने बताया कि भारत और यूरोपीय संघ मिलकर दुनिया की आर्थिक गतिविधियों और वैश्विक व्यापार का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में यदि दोनों के बीच व्यापारिक सहयोग और मजबूत होता है तो इसका असर वैश्विक सप्लाई चेन, निवेश प्रवाह और आर्थिक विकास पर भी देखने को मिलेगा। इससे कंपनियों को नए अवसर मिलेंगे और रोजगार के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।
स्पेन के साथ भारत के संबंधों का उल्लेख करते हुए पीयूष गोयल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को भी साझा किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत और स्पेन की साझेदारी को एक बहुआयामी और जीवंत संबंध बताया है, जिसमें आर्थिक, सांस्कृतिक और सामाजिक सहयोग की मजबूत नींव मौजूद है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपर्क लंबे समय से रहे हैं और अब इन्हें आधुनिक आर्थिक सहयोग के साथ जोड़ने का समय है।
गोयल ने कहा कि भारत और स्पेन दोनों ही लोकतांत्रिक मूल्य साझा करते हैं और नियम आधारित वैश्विक व्यापार प्रणाली में विश्वास रखते हैं। यही कारण है कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर बदलते आर्थिक माहौल में ऐसे साझेदार देशों के साथ संबंध मजबूत करना भारत की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि लंबे समय बाद भारत से एक बड़ा व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल स्पेन पहुंचा है। खास बात यह रही कि इस यात्रा की तैयारियों के लिए बहुत कम समय मिला था, इसके बावजूद बड़ी संख्या में भारतीय उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया। उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि भारतीय कंपनियां स्पेन और यूरोप के बाजारों में नए अवसर तलाशने के लिए उत्साहित हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत सरकार लगातार ऐसे प्रयास कर रही है जिससे भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजारों तक आसान पहुंच मिल सके। मुक्त व्यापार समझौते इसी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उनका मानना है कि टैरिफ में कमी, व्यापारिक प्रक्रियाओं में सरलता और निवेश के बेहतर माहौल से उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। मजबूत घरेलू बाजार, तेजी से विकसित हो रहा विनिर्माण क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और आधारभूत ढांचे में हो रहे निवेश ने भारत को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया है। ऐसे समय में यूरोपीय संघ के साथ एफटीए लागू होना दोनों पक्षों के लिए लाभदायक साबित होगा।
अपने संबोधन के दौरान गोयल ने भारत और स्पेन के उद्योग संगठनों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के उद्योग निकाय लगातार व्यापारिक संवाद को मजबूत बनाने का काम कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में स्पेन के सीईओई (CEOE), आईसीईएक्स (ICEX), कैमारा डी कोमर्सियो के साथ भारत के प्रमुख उद्योग संगठन भारतीय उद्योग परिसंघ (CII), फिक्की (FICCI) और एसोचैम (ASSOCHAM) सहित कई बड़े कारोबारी प्रतिनिधि शामिल हुए।
उन्होंने इन संस्थाओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि उद्योग संगठनों की सक्रिय भागीदारी से दोनों देशों के व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे। निजी क्षेत्र के सहयोग के बिना किसी भी अंतरराष्ट्रीय आर्थिक साझेदारी को सफल बनाना संभव नहीं है। इसलिए सरकार और उद्योग जगत को मिलकर आगे बढ़ना होगा।
पीयूष गोयल ने कहा कि आने वाले समय में भारत और स्पेन के बीच निवेश, तकनीकी सहयोग, स्टार्टअप, नवाचार, हरित ऊर्जा, उन्नत विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्रों में कई नई परियोजनाएं देखने को मिल सकती हैं। उन्होंने भारतीय और स्पेनिश कंपनियों से इस अवसर का लाभ उठाने और दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने का आह्वान किया।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता लागू होने के बाद दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग नई ऊंचाइयों पर पहुंचेगा। इससे न केवल व्यापार बढ़ेगा बल्कि निवेश, रोजगार, तकनीकी विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। भारत और यूरोपीय संघ के बीच यह समझौता आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।