पंजाब के मानसा में परविंदर सिंह झोटा और दलजीत सिंह की मौत से जुड़ा विवाद लगातार गंभीर होता जा रहा है। दोनों परिवार अपने-अपने स्तर पर न्याय और कार्रवाई की मांग को लेकर अड़े हुए हैं। हालात ऐसे हैं कि एक तरफ भम्मे कलां निवासी दलजीत सिंह के निधन के छह दिन बीत जाने के बावजूद परिजन उसका अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ परविंदर सिंह झोटा की मौत के 20 दिन बाद भी उसका पार्थिव शरीर अंतिम संस्कार की प्रतीक्षा में है। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में तनावपूर्ण माहौल बना दिया है।
रविवार को भी दोनों मामलों में कोई सहमति नहीं बन पाई। दलजीत के परिजनों ने अपनी मांगों पर समझौता करने से इनकार कर दिया। वहीं झोटा के परिवार और आंदोलन से जुड़े लोगों ने भी सरकार के खिलाफ अपना विरोध जारी रखा। अब दलजीत की बहन की ओर से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किए जाने के बाद सोमवार, 2 नवंबर को इस मामले पर सुनवाई होनी है। परिवार ने अदालत से केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच करवाने और पीजीआई चंडीगढ़ के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से पोस्टमार्टम कराने की मांग की है।
इस विवाद में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजकर मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। उनका आरोप है कि जब वह सांसद के रूप में दलजीत के परिवार से जुड़े मामले में हस्तक्षेप करने पहुंची थीं, तब पुलिस अधिकारियों ने उन्हें अपने संवैधानिक और संसदीय दायित्व निभाने से रोकने की कोशिश की।
दलजीत के परिवार ने अंतिम संस्कार करने से फिर किया इनकार
भम्मे कलां गांव में दलजीत सिंह के परिवार का विरोध रविवार को भी जारी रहा। छह दिन गुजरने के बाद भी परिवार ने अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं किया। रविवार को गांव के सरपंच गुरविंदर सिंह की अगुवाई में पंचायत के सदस्यों और गांव के कुछ प्रमुख लोगों ने परिजनों से मुलाकात की। यह बैठक दलजीत के पिता जरनैल सिंह के कहने पर आयोजित की गई थी। पंचायत प्रतिनिधियों ने परिवार को समझाने की कोशिश की कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाए, लेकिन बातचीत के दौरान कोई रास्ता नहीं निकल पाया।
बैठक में दलजीत की मां शिंदरपाल कौर, पत्नी परमजीत कौर और बहन अमरजीत कौर मौजूद थीं। तीनों ने अपनी मांगें पूरी होने तक अंतिम संस्कार नहीं करने का फैसला दोहराया। परिवार की महिलाओं का कहना है कि उनके साथ हुई कार्रवाई और पुलिस की भूमिका को लेकर अभी तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। ऐसे में वह अपने बेटे के अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हैं।
परिजनों की प्रमुख मांग है कि लक्खा सिधाना, मोहनजीत शेरों और गांव के अन्य युवाओं के खिलाफ दर्ज किए गए मुकदमों को वापस लिया जाए। उनका कहना है कि जब तक इन लोगों पर दर्ज मामले खत्म नहीं किए जाते, तब तक दलजीत का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। परिवार इस पूरे प्रकरण में पुलिस और सरकार की जवाबदेही तय करने पर भी जोर दे रहा है।
परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने दलजीत के शव को उनकी इच्छा के खिलाफ अपने कब्जे में ले लिया था। इससे उन्हें अपने बेटे का अंतिम संस्कार करने के अधिकार से वंचित होना पड़ा। परिजनों का कहना है कि किसी भी परिवार के लिए अपने सदस्य के निधन के बाद अंतिम संस्कार करना बेहद जरूरी होता है, लेकिन इस मामले में उन्हें ऐसा करने का अवसर नहीं दिया गया। अब परिवार चाहता है कि इस पूरी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच हो और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ उचित कदम उठाए जाएं।
पिता और रिश्तेदार परिवार को मनाने में जुटे
दूसरी ओर, दलजीत के पिता जरनैल सिंह अपने रिश्तेदारों के साथ परिवार के सदस्यों को घर वापस लौटने और अंतिम संस्कार के लिए राजी करने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक उनकी कोशिशें सफल नहीं हुई हैं। दलजीत की मां और पत्नी गांव में निर्धारित स्थान पर धरने पर बैठी हैं और अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रही हैं।
परिवार के सदस्यों ने यह भी आरोप लगाया है कि पुलिस ने जरनैल सिंह पर दबाव बनाकर उनसे कुछ ऐसे काम करवाए, जिनके लिए वह खुद तैयार नहीं थे। इस वजह से परिवार के भीतर भी नाराजगी बनी हुई है। परिजनों का कहना है कि उनकी सहमति और इच्छा को नजरअंदाज करके पूरे मामले को संभालने की कोशिश की गई। फिलहाल परिवार का रुख स्पष्ट है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लिया जाता, तब तक अंतिम संस्कार को लेकर कोई कदम नहीं उठाया जाएगा।
आज हाईकोर्ट में होगी सुनवाई, सीबीआई से जांच कराने की मांग
दलजीत सिंह की बहन अमरजीत कौर ने मामले को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। इसमें अदालत से पूरे घटनाक्रम में हस्तक्षेप करने की अपील की गई है। याचिकाकर्ता ने मांग रखी है कि दलजीत की मौत से जुड़े मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए, ताकि घटनाक्रम के सभी पहलुओं की स्वतंत्र रूप से पड़ताल हो सके।
इसके अलावा परिवार ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया भी विशेषज्ञ डॉक्टरों से करवाने की मांग की है। इसके लिए पीजीआई चंडीगढ़ के डॉक्टरों की टीम गठित करने का आग्रह किया गया है। परिवार का मानना है कि पोस्टमार्टम की जांच निष्पक्ष और विशेषज्ञों की निगरानी में होनी चाहिए, जिससे मौत से संबंधित तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके।
याचिका में परिवार को पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी शामिल है। अमरजीत कौर ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने दलजीत के शव को जबरन अपने कब्जे में ले लिया था। इस कार्रवाई के कारण परिवार अपने स्तर पर अंतिम संस्कार नहीं कर पाया। अब परिवार चाहता है कि अदालत इस मामले में जरूरी निर्देश जारी करे। 2 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि अदालत में इस मामले से जुड़े आरोपों और परिवार की मांगों पर महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र
दलजीत सिंह की मौत और उसके बाद हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। सांसद हरसिमरत कौर बादल ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर मानसा के एसएसपी वैभव चौधरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस पूरे मामले में पंजाब सरकार से जवाब मांगने और घटना से संबंधित दस्तावेज संसद के समक्ष मंगवाने का आग्रह किया है।
हरसिमरत कौर बादल का आरोप है कि मानसा के एसएसपी ने उन्हें सांसद के तौर पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोका। उन्होंने पत्र में बताया कि 29 अक्टूबर को जब वह दलजीत सिंह के परिवार से मिलने उसके घर पहुंची थीं, तब उन्होंने पुलिस अधिकारियों से इस मामले पर बातचीत करने की कोशिश की थी।
उनके मुताबिक, बातचीत के दौरान अधिकारियों ने हस्तक्षेप किया और दलजीत के शव को परिवार से दूर ले जाने के संबंध में कोई स्पष्ट या संतोषजनक जानकारी नहीं दी। सांसद ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि परिवार के अधिकारों और जनप्रतिनिधि की भूमिका को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से पंजाब सरकार से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब करने की मांग की है। इसके साथ ही एफआईआर और उससे संबंधित रिकॉर्ड भी मंगवाने का अनुरोध किया गया है, ताकि पुलिस की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके। इस मुद्दे पर अब राजनीतिक स्तर पर भी सरकार पर दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।
झोटा के परिवार ने भी सरकार के सामने रखी सख्त शर्तें
दलजीत सिंह का मामला ही नहीं, बल्कि परविंदर सिंह झोटा के अंतिम संस्कार को लेकर भी मानसा में विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा। झोटा के पिता भीम सिंह ने साफ कर दिया है कि मांगें पूरी होने से पहले वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। उनका कहना है कि आंदोलन चाहे कितने भी महीने तक क्यों न चले, परिवार अपने फैसले से पीछे नहीं हटेगा।
भीम सिंह ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें भम्मे कलां और राज्य के दूसरे इलाकों में पोस्टर फाड़ने के मामलों में गिरफ्तार किए गए युवाओं को रिहा करना शामिल है। इसके अलावा इन युवाओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को भी रद्द करने की मांग की गई है।
परिवार ने बुढलाडा में नशा करते हुए पकड़े गए एएसआई सहजप्रीत सिंह के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाने चाहिए। इसके साथ ही बुढलाडा में युवाओं के खिलाफ तोड़फोड़ के आरोप में दर्ज किए गए मामलों को पूरी तरह खत्म करने की मांग भी की गई है।
झोटा के पिता ने स्पष्ट किया है कि सरकार के साथ बातचीत तभी संभव होगी, जब इन मांगों को पूरा करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे। उनका कहना है कि केवल आश्वासन देने से आंदोलन समाप्त नहीं होगा। परिवार और आंदोलन से जुड़े लोगों की मांगों पर फैसला होने के बाद ही आगे की बातचीत का रास्ता खुलेगा।
20 दिन से तिकोनी चौक पर आंदोलन, 5 नवंबर को सीएम आवास घेरने की तैयारी
परविंदर सिंह झोटा के मामले को लेकर मानसा के तिकोनी चौक पर चल रहा धरना रविवार को 20वें दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारी लगातार सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं और अपने साथी के अंतिम संस्कार से पहले मांगें स्वीकार करने पर जोर दे रहे हैं।
धरने में झोटा के परिजनों के साथ एक्शन कमेटी के सदस्य भी शामिल हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक संघर्ष जारी रहेगा। परिवार और एक्शन कमेटी ने मुख्यमंत्री तथा पंजाब के डीजीपी के इस्तीफे की मांग भी दोहराई है। उनका आरोप है कि पूरे मामले को जिस तरह संभाला गया, उसकी जिम्मेदारी सरकार और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को लेनी चाहिए।
इसी बीच आंदोलन को अगले स्तर पर ले जाने की रणनीति भी बनाई जा रही है। रविवार को प्रदर्शनकारियों के बीच 5 नवंबर को संगरूर में मुख्यमंत्री के आवास का घेराव करने की योजना पर चर्चा हुई। इसके लिए आगे की तैयारियों को लेकर विचार-विमर्श किया गया। आंदोलनकारियों का इरादा है कि अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाया जाए।
फिलहाल मानसा में दोनों परिवारों की ओर से अंतिम संस्कार को लेकर अपनाया गया रुख बरकरार है। एक तरफ दलजीत सिंह के परिजन सीबीआई जांच, पोस्टमार्टम और सुरक्षा की मांग को लेकर अदालत पहुंचे हैं, तो दूसरी तरफ झोटा का परिवार सरकार के सामने अपनी शर्तें रखकर आंदोलन जारी रखे हुए है। सोमवार को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई से दलजीत के मामले में आगे की कानूनी दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। वहीं, झोटा के अंतिम संस्कार और 5 नवंबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर भी प्रशासन और सरकार की अगली कार्रवाई महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल दोनों मामलों में गतिरोध बना हुआ है और परिवार अपनी मांगों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।