Skip to main content

The Scoopp

 

यूके में कानूनी प्रक्रिया पूरी होते ही नीरव मोदी को भारत लाने की तैयारी, विदेश मंत्रालय ने दोहराया सरकार का रुख

भारत सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को भारत वापस लाने की प्रक्रिया लगातार जारी है। हालांकि, उसका प्रत्यर्पण तभी संभव होगा जब यूनाइटेड किंगडम (यूके) की अदालतों में चल रही सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत सरकार इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम कर रही है ताकि कानूनी बाधाएं समाप्त होने के बाद प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

मंगलवार को आयोजित नियमित मीडिया ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल से जब नीरव मोदी के प्रत्यर्पण से जुड़ा सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सरकार का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा है। भारत चाहता है कि देश से फरार होकर विदेशों में रह रहे सभी आर्थिक अपराधियों को वापस लाया जाए ताकि वे भारतीय अदालतों के सामने पेश होकर कानून के अनुसार न्यायिक प्रक्रिया का सामना करें। उन्होंने बताया कि फिलहाल नीरव मोदी से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण न्यायिक मामले ब्रिटेन की अदालतों में लंबित हैं और जैसे ही इनका निपटारा होगा, प्रत्यर्पण की दिशा में अगला कदम उठाया जाएगा।

प्रवक्ता ने कहा कि भारत सरकार केवल औपचारिक रूप से इंतजार नहीं कर रही है, बल्कि पूरे घटनाक्रम की लगातार निगरानी कर रही है। संबंधित मंत्रालयों और जांच एजेंसियों के बीच समन्वय बना हुआ है ताकि किसी भी स्तर पर प्रक्रिया में देरी न हो। उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत की नीति स्पष्ट है कि आर्थिक अपराध करके विदेश भागने वाले किसी भी आरोपी को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा।

नीरव मोदी पिछले कई वर्षों से भारत की जांच एजेंसियों के लिए सबसे चर्चित आर्थिक अपराधियों में शामिल रहा है। उस पर आरोप है कि उसने पंजाब नेशनल बैंक में कथित फर्जी लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) और बैंक गारंटी का इस्तेमाल कर विदेशी बैंकों से हजारों करोड़ रुपये का कर्ज हासिल किया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस पूरे मामले में बैंकिंग प्रणाली का दुरुपयोग किया गया, जिसके कारण सरकारी बैंक को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।

जांच के दौरान सामने आया कि कथित अनियमितताओं का खुलासा होने से पहले ही नीरव मोदी जनवरी 2018 में भारत छोड़कर विदेश चला गया था। इसके बाद केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए। भारत सरकार ने उसके प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन की अदालतों में कानूनी प्रक्रिया शुरू की, जो अब तक विभिन्न चरणों से गुजर रही है।

इस वर्ष मार्च में इस मामले में भारत को एक महत्वपूर्ण कानूनी सफलता मिली थी। लंदन स्थित हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस की किंग्स बेंच डिवीजन ने नीरव मोदी की उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ दोबारा सुनवाई शुरू करने की अनुमति मांगी थी। अदालत के इस फैसले को भारत सरकार ने प्रत्यर्पण प्रक्रिया के लिहाज से सकारात्मक माना था।

सुनवाई के दौरान ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस की ओर से अदालत में पक्ष रखा गया। भारतीय पक्ष की सहायता के लिए सीबीआई की विशेष टीम भी लंदन पहुंची थी। इस टीम में वे अधिकारी भी शामिल थे, जिन्होंने मामले की जांच की थी और अदालत के समक्ष तथ्यों और दस्तावेजों को प्रस्तुत करने में सहयोग दिया। भारतीय एजेंसियों ने अदालत में यह दलील दी कि नीरव मोदी के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं और उसे भारत में मुकदमे का सामना करना चाहिए।

नीरव मोदी की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका का आधार एक अन्य कारोबारी संजय भंडारी से जुड़ा मामला बताया गया था। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि यूके हाई कोर्ट के एक अन्य फैसले के आलोक में उसके प्रत्यर्पण आदेश पर फिर से विचार किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत इस तर्क से सहमत नहीं हुई और उसने मामले को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया। इससे भारत की प्रत्यर्पण संबंधी कोशिशों को मजबूती मिली।

विदेश मंत्रालय का कहना है कि किसी भी प्रत्यर्पण प्रक्रिया में संबंधित देश की न्यायिक प्रणाली का सम्मान करना आवश्यक होता है। इसलिए भारत ब्रिटेन की अदालतों में चल रही सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने का इंतजार कर रहा है। सरकार का मानना है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद नीरव मोदी को भारत लाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

उधर, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में एक अन्य आर्थिक मामलों से जुड़ी सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठे। शीर्ष अदालत ने इंडिया बुल्स हाउसिंग फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े कथित संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर सीबीआई और दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा को कड़ी फटकार लगाई।

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि दोनों एजेंसियों का रवैया बेहद निराशाजनक दिखाई देता है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जिस प्रकार जांच में देरी हुई और अदालत के समक्ष स्थिति रिपोर्ट तक दाखिल नहीं की गई, उससे यह प्रतीत होता है कि मामले में आवश्यक गंभीरता नहीं दिखाई गई। अदालत ने यह भी कहा कि यदि जांच एजेंसियां समय पर अपनी जिम्मेदारियां नहीं निभातीं, तो इससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित होती है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे, ने सुनवाई के दौरान कहा कि सीबीआई और आर्थिक अपराध शाखा की निष्क्रियता आश्चर्यजनक है। अदालत ने कहा कि नियमित मामला दर्ज करने अथवा जांच की दिशा में उठाए गए कदमों की जानकारी तक न्यायालय को उपलब्ध नहीं कराई गई।

पीठ ने यह भी संकेत दिया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं होता तो संबंधित एजेंसियों के प्रमुख अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया जा सकता था। हालांकि अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को भरोसा दिलाया कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी और दो सप्ताह के भीतर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर दी जाएगी। इस आश्वासन के बाद अदालत ने फिलहाल एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब करने का निर्णय टाल दिया।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को आर्थिक अपराधों की जांच करने वाली एजेंसियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि वित्तीय अनियमितताओं और बड़े आर्थिक मामलों में जांच एजेंसियों की जिम्मेदारी केवल प्रारंभिक कार्रवाई तक सीमित नहीं हो सकती, बल्कि उन्हें समयबद्ध और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करनी होगी। न्यायालय ने यह भी संकेत दिया कि यदि भविष्य में लापरवाही जारी रहती है तो वह अधिक कठोर रुख अपना सकता है।

एक ओर जहां नीरव मोदी के प्रत्यर्पण को लेकर भारत सरकार कानूनी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रही है, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियां यह दर्शाती हैं कि आर्थिक अपराधों और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में न्यायपालिका जांच एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के पक्ष में है। आने वाले समय में नीरव मोदी के प्रत्यर्पण से जुड़े कानूनी घटनाक्रम और इंडिया बुल्स मामले में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई दोनों पर देश की नजर बनी रहेगी।