पंजाब के लुधियाना में रविवार को पुलिस और गैंगस्टरों के बीच हुई मुठभेड़ में दो आरोपी मारे गए। यह कार्रवाई शहर के आत्मा पार्क इलाके में एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) और जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने की। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपी अमृतसर के रहने वाले थे और एक बड़ी आपराधिक वारदात को अंजाम देने के इरादे से इलाके में पहुंचे थे। मुठभेड़ के बाद घटनास्थल से तीन 9 एमएम ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद की गई हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के हथियारों में पहले से गोलियां भरी हुई थीं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि उनका मकसद आत्मा पार्क में आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप में मौजूद विरोधी गुट से जुड़े लोगों को निशाना बनाना था। पुलिस अब इस पूरे मामले के पीछे की साजिश, आरोपियों के संपर्कों और उनके कथित विदेशी हैंडलरों की भूमिका की जांच कर रही है।
खुफिया सूचना के बाद सक्रिय हुई पुलिस
लुधियाना पुलिस कमिश्नर स्वप्न शर्मा के अनुसार, पुलिस को पहले से इनपुट मिला था कि कुछ हथियारबंद शूटर शहर में किसी गंभीर वारदात की तैयारी कर रहे हैं। जानकारी में सामने आया कि विदेश में बैठा गैंगस्टर डोनी बल कथित तौर पर इन शूटरों के संपर्क में था। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ाई।
जांच एजेंसियों को जब पता चला कि संदिग्ध आत्मा पार्क इलाके में पहुंच सकते हैं, तो एजीटीएफ और लुधियाना जिला पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से इलाके में घेराबंदी कर दी। पुलिस की कोशिश थी कि संदिग्धों को बिना किसी बड़े नुकसान के पकड़ा जाए और उनके पास मौजूद हथियारों को कब्जे में लिया जा सके।
दोपहर में संदिग्धों को घेरा
पुलिस के अनुसार, रविवार दोपहर करीब तीन बजे टीम को संदिग्ध आरोपियों की मौजूदगी का पता चला। पुलिसकर्मियों ने दोनों को रुकने का संकेत दिया और हथियार नीचे रखने के लिए कहा। हालांकि, पुलिस का दावा है कि आरोपियों ने सरेंडर करने के बजाय टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।
अचानक हुई गोलीबारी के बाद पुलिसकर्मियों ने भी मोर्चा संभाल लिया और जवाबी कार्रवाई शुरू की। इसके बाद आत्मा पार्क क्षेत्र में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बन गई। दोनों तरफ से गोलियां चलीं। पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान करीब 25 राउंड फायर हुए।
जवाबी फायरिंग में दोनों संदिग्ध गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने उन्हें काबू में लेने के बाद स्थिति को सुरक्षित किया, लेकिन दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मुठभेड़ समाप्त होने के बाद इलाके की तलाशी शुरू की गई और हथियारों सहित अन्य संभावित सबूत जुटाए गए।
ब्लड कैंप को लेकर पुलिस को थी आशंका
इस मामले का सबसे अहम पहलू आत्मा पार्क में आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, यह कैंप 2016 में मारे गए लुधियाना के युवक रवि ख्वाजके की याद में कुछ युवकों की ओर से लगाया गया था।
पुलिस की जांच में यह आशंका सामने आई कि विरोधी गैंग से जुड़े लोग कैंप में मौजूद हो सकते हैं और इसी वजह से आरोपियों ने वहां पहुंचकर हमला करने की योजना बनाई थी। हालांकि, पुलिस ने समय रहते संदिग्धों की गतिविधियों की जानकारी हासिल कर ली और संभावित हमले से पहले ही उन्हें रोकने के लिए कार्रवाई शुरू कर दी।
जांच अधिकारियों के अनुसार, अगर संदिग्ध वास्तव में कैंप में पहुंच जाते तो वहां मौजूद लोगों के लिए खतरा पैदा हो सकता था। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों को कैंप में मौजूद किन लोगों को निशाना बनाने का निर्देश दिया गया था और उन्हें इस स्थान की जानकारी किसने दी थी।
2016 की हत्या से जुड़ रही पूरी कहानी
पुलिस ने इस घटना की कड़ी करीब एक दशक पुरानी रंजिश से जोड़कर भी जांच शुरू की है। अधिकारियों के मुताबिक, साल 2016 में लुधियाना के रहने वाले रवि ख्वाजके की हत्या हुई थी। इस मामले में दविंदर बंबिहा का नाम सामने आया था। बाद में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में दविंदर बंबिहा की मौत हो गई थी।
रवि ख्वाजके की याद में आत्मा पार्क में आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप को पुलिस इसी पुराने विवाद के संदर्भ में देख रही है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि पुरानी दुश्मनी ने एक बार फिर हिंसा का रूप लेने की कोशिश की हो सकती है।
हालांकि, पुलिस अभी इस पूरे घटनाक्रम के सभी पहलुओं की पुष्टि करने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों और आपराधिक रिकॉर्ड की जांच के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
हथियारों ने बढ़ाई पुलिस की चिंता
मुठभेड़ खत्म होने के बाद मौके से तीन 9 एमएम ऑटोमैटिक पिस्टल बरामद होना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस के मुताबिक, सभी हथियारों में गोलियां मौजूद थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि आरोपी किसी संभावित कार्रवाई के लिए पूरी तैयारी के साथ पहुंचे थे।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि ये हथियार आरोपियों तक कैसे पहुंचे। इनके स्रोत का पता लगाने के लिए हथियारों की फोरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि इन हथियारों का इस्तेमाल पहले किसी आपराधिक घटना में हुआ था या नहीं।
फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से जरूरी साक्ष्य एकत्र किए हैं। मौके पर चली गोलियों और अन्य सामग्री को जांच के लिए सुरक्षित किया गया है। इससे मुठभेड़ के दौरान हुई फायरिंग और आरोपियों की गतिविधियों की कड़ी जोड़ने में मदद मिल सकती है।
विदेशी कनेक्शन की भी जांच
पुलिस के मुताबिक, दोनों संदिग्धों के विदेश में बैठे गैंगस्टर डोनी बल से संपर्क होने की जानकारी मिली थी। इसी वजह से जांच का एक अहम हिस्सा कथित विदेशी नेटवर्क की भूमिका पर केंद्रित है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि विदेश में बैठे व्यक्ति ने आरोपियों को किस तरह निर्देश दिए थे। क्या उन्हें किसी खास व्यक्ति की पहचान या लोकेशन उपलब्ध कराई गई थी, क्या हथियार या वाहन की व्यवस्था किसी अन्य व्यक्ति ने की थी और इस पूरी साजिश में कितने लोग शामिल थे—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
जांच एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि क्या दोनों आरोपी पहले से किसी गैंग से जुड़े हुए थे या उन्हें किसी विशेष वारदात के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और स्थानीय संपर्कों की भी जांच की जा रही है।
शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दोनों आरोपियों के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर उनकी मौत से जुड़े चिकित्सकीय तथ्यों की भी पुष्टि होगी। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित कर वहां से जरूरी साक्ष्य जुटाए हैं।
अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में आगे की कार्रवाई बरामद हथियारों, फोरेंसिक रिपोर्ट, आरोपियों के आपराधिक इतिहास और उनके संपर्कों के आधार पर की जाएगी। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों आरोपी लुधियाना कब पहुंचे थे और शहर में आने के बाद उन्होंने किन लोगों से संपर्क किया।
पुलिस के सामने अब कई सवाल
मुठभेड़ में दो आरोपियों के मारे जाने के बाद तत्काल खतरा टल गया है, लेकिन जांच एजेंसियों के सामने अब इस नेटवर्क को समझने की चुनौती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ब्लड डोनेशन कैंप को ही संभावित निशाने के तौर पर क्यों चुना गया।
इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगा रही है कि दोनों शूटरों को कथित तौर पर किसने भेजा, हथियार कहां से मिले और क्या इस साजिश में उनके अलावा अन्य लोग भी शामिल थे। विदेश में बैठे कथित हैंडलर से उनके संपर्क की पुष्टि और उसके बाद की भूमिका भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
लुधियाना पुलिस और एजीटीएफ की संयुक्त कार्रवाई ने संभावित गैंगवार को समय रहते रोकने का दावा किया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है, ताकि यह साफ हो सके कि आत्मा पार्क में मौजूद लोगों को निशाना बनाने की योजना कितनी बड़ी थी और इसके पीछे कौन-कौन लोग सक्रिय थे।