Skip to main content

The Scoopp

 

विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए सरकार की नई तैयारी, सरकारी बॉण्ड पर टैक्स राहत संभव

भारत सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को आकर्षित करने के लिए बड़ा कदम उठाने पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश से होने वाले कैपिटल गेन्स पर लगने वाला टैक्स हटाने का प्रस्ताव चर्चा में है। इस पहल का उद्देश्य भारतीय बाजार में विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ाना और रुपये पर दबाव को कम करना बताया जा रहा है।

हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से बड़ी मात्रा में धन निकाला है। आंकड़ों के अनुसार, चालू वर्ष में FPIs करीब 2.47 लाख करोड़ रुपये की निकासी कर चुके हैं, जबकि 2025 में यह आंकड़ा लगभग 1.04 लाख करोड़ रुपये था।

वर्तमान व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों को 12 महीने से अधिक अवधि तक रखे गए सूचीबद्ध शेयरों और बॉण्ड्स पर 12.5 प्रतिशत लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा, सरकारी बॉण्ड्स से मिलने वाली ब्याज आय पर 20 प्रतिशत विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू है। सरकार ने 2023 में विदेशी निवेशकों को मिलने वाली 5 प्रतिशत की रियायती कर दर भी समाप्त कर दी थी।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैपिटल गेन्स टैक्स में राहत दी जाती है तो भारतीय ऋण बाजार विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकता है। लंबे समय से निवेशक समुदाय टैक्स बोझ कम करने की मांग कर रहा है ताकि भारत अन्य उभरते बाजारों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बना रहे।

सूत्र यह भी संकेत दे रहे हैं कि केवल टैक्स राहत ही नहीं, बल्कि नियामकीय स्तर पर भी कुछ अतिरिक्त सुधारों की घोषणा की जा सकती है। इन कदमों का मकसद विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ाना और देश में पूंजी प्रवाह को मजबूत करना होगा।

इससे पहले 2019 में सरकार ने निजी निवेश और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन देने के लिए कॉरपोरेट टैक्स में बड़ी कटौती की थी। अब माना जा रहा है कि विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए इसी तरह के कुछ नए फैसले सामने आ सकते हैं।