भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी को लेकर तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की ओर से सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने के फैसले ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान का दावा है कि पानी के मुद्दे पर भारत दबाव बना रहा है, जबकि भारत का कहना है कि सीमा पार आतंकवाद पर ठोस कदम उठाए बिना पुराने समझौते को सामान्य नहीं किया जाएगा।
पानी के संकट को लेकर पाकिस्तान की ओर से लगातार बयानबाजी सामने आ रही है। पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि अगर इस्लामाबाद को लगा कि उसकी जल सुरक्षा प्रभावित हो रही है तो वह कड़ा कदम उठा सकता है। उन्होंने भारत पर पानी को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।
वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान की सेना नियंत्रण रेखा यानी LoC पर अपनी तैयारियां बढ़ाने में जुटी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तानी सेना ने एलओसी के संवेदनशील इलाकों में एंटी-ड्रोन सिस्टम और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया है। रावलाकोट, कोटली और भीम्बर जैसे सेक्टरों में सैन्य गतिविधियां बढ़ने की बात कही जा रही है।
सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान ने इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और काउंटर ड्रोन नेटवर्क को भी सक्रिय किया है। सेना ने ड्रोन से होने वाले संभावित हमलों और निगरानी को रोकने के लिए नई तकनीकों का इस्तेमाल शुरू किया है। इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में सुरक्षा ढांचे को और मजबूत किया जा रहा है।
चीन और तुर्किये से पाकिस्तान बढ़ा रहा रक्षा ताकत
सिंधु जल विवाद के बीच पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने के लिए विदेशी सहयोग पर भी निर्भर है। चीन के साथ उसकी रक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान को चीन से आधुनिक लड़ाकू विमानों और अन्य सैन्य उपकरणों की आपूर्ति मिल रही है।
चीन की जे-सीरीज फाइटर जेट तकनीक को लेकर भी चर्चा तेज है। पाकिस्तान लंबे समय से चीन से रक्षा उपकरण हासिल करता रहा है और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग कई क्षेत्रों में बढ़ा है।
वहीं तुर्किये भी पाकिस्तान के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। ड्रोन तकनीक से लेकर नौसैनिक क्षमता तक दोनों देशों के बीच कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। कराची के पास ड्रोन निर्माण से जुड़ी परियोजना को लेकर भी चर्चा रही है, जिससे पाकिस्तान अपनी हवाई निगरानी और हमलावर क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
अफगान सीमा से सैनिकों की तैनाती का दावा
पाकिस्तान ने हाल के समय में अफगानिस्तान से लगी सीमा से कुछ सैन्य इकाइयों को हटाकर एलओसी के पास तैनात करने की तैयारी की है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कुछ बटालियनों की तैनाती जम्मू-कश्मीर से सटे इलाकों के आसपास बढ़ाई गई है।
इन क्षेत्रों का इस्तेमाल पहले भी घुसपैठ की कोशिशों के लिए किया जाता रहा है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से सीमा पार आतंकवादी गतिविधियों पर नजर रखती रही हैं।
क्या है सिंधु जल संधि?
भारत और पाकिस्तान के बीच पानी के बंटवारे को लेकर 1960 में सिंधु जल संधि हुई थी। इस समझौते में विश्व बैंक की मध्यस्थता की भूमिका रही थी। 19 सितंबर 1960 को कराची में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
सिंधु नदी प्रणाली में छह प्रमुख नदियां शामिल हैं- सिंधु, झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। इस नदी तंत्र से भारत और पाकिस्तान समेत कई क्षेत्रों की बड़ी आबादी जुड़ी हुई है।
समझौते के तहत पूर्वी नदियों रावी, ब्यास और सतलुज के इस्तेमाल का अधिकार भारत को मिला, जबकि पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी के इस्तेमाल को लेकर पाकिस्तान को अधिक अधिकार दिए गए।
बंटवारे के बाद शुरू हुआ था पानी का विवाद
कई वर्षों की बातचीत के बाद 1960 में सिंधु जल संधि अस्तित्व में आई। यह समझौता दशकों तक दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे का आधार बना रहा।
1947 में भारत-पाकिस्तान के विभाजन के बाद से ही नदियों के पानी को लेकर विवाद शुरू हो गया था। शुरुआती वर्षों में दोनों देशों के बीच अस्थायी समझौते हुए, लेकिन 1948 में पानी रोकने और फिर बहाल करने की घटनाओं के बाद स्थायी समाधान की जरूरत महसूस हुई।
अब पहलगाम आतंकी हमले के बाद इस संधि पर रोक लगाए जाने से दोनों देशों के रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। पाकिस्तान इसे अपनी जल सुरक्षा से जोड़ रहा है, जबकि भारत इसे आतंकवाद के खिलाफ दबाव बनाने के कदम के रूप में देख रहा है।