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सिंधु जल संधि के मुद्दे पर फिर गरमाई सियासत, बिलावल ने साधा भारत पर निशाना

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने के बाद पाकिस्तान में जल संसाधनों को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने दियामर-भाशा बांध परियोजना को जल्द पूरा करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना देश की ऊर्जा और जल सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

गिलगित-बाल्टिस्तान के दियामर क्षेत्र में आयोजित एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बिलावल ने भारत की नीतियों की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि नई दिल्ली पानी को दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल कर रही है। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान सरकार से आग्रह किया कि बांध परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए।

दियामर-भाशा बांध पाकिस्तान की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजनाओं में गिना जाता है। करीब 4500 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 15 अरब डॉलर बताई जाती है। इसके पूरा होने पर लाखों एकड़ कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने और बिजली उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है।

इस परियोजना के निर्माण में चीन की महत्वपूर्ण भूमिका है। रिपोर्टों के अनुसार, परियोजना में चीन की सरकारी कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी है, जबकि शेष भाग पाकिस्तान की फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन के पास है। भारत पहले भी इस परियोजना पर आपत्ति जता चुका है। नई दिल्ली का कहना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है और इस क्षेत्र में किसी भी निर्माण गतिविधि पर उसकी आपत्ति बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान द्वारा इस बांध परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की कोशिशों के पीछे सिंधु जल संधि को लेकर पैदा हुई अनिश्चितता भी एक बड़ा कारण है। भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान में जल उपलब्धता और भविष्य की जरूरतों को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। वहीं, पाकिस्तान कई बार यह कह चुका है कि नदियों के पानी के प्रवाह में किसी भी तरह की बाधा को वह गंभीर मुद्दा मानता है।