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सूरज भी यहां लेता है लंबी छुट्टी! जानिए कैसे तेल-गैस ने नॉर्वे को बना दिया सुपर रिच देश

Narendra Modi की नॉर्वे यात्रा के बीच यह छोटा यूरोपीय देश फिर वैश्विक चर्चा में आ गया है। वजह सिर्फ भारत-नॉर्डिक समिट नहीं, बल्कि नॉर्वे की वह ताकत है जिसने उसे दुनिया के सबसे अमीर और खुशहाल देशों की सूची में खड़ा कर दिया। बर्फ, समुद्र और पहाड़ों के बीच बसे इस देश की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।

जहां रात में भी चमकता है सूरज

Norway को “लैंड ऑफ मिडनाइट सन” कहा जाता है। यहां के उत्तरी हिस्सों में गर्मियों के दौरान कई दिनों तक सूरज डूबता ही नहीं। खासकर आर्कटिक सर्कल के पास स्थित इलाकों में आधी रात को भी दिन जैसा उजाला दिखाई देता है। दूसरी तरफ सर्दियों में यहां लंबे समय तक अंधेरा छाया रहता है।

समुद्र के नीचे छिपा था अरबों डॉलर का खजाना

आज जिस नॉर्वे को दुनिया आर्थिक ताकत के रूप में देखती है, उसकी किस्मत 1960 के दशक में बदली। उत्तरी समुद्र में तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार मिलने के बाद देश ने तेजी से ऊर्जा क्षेत्र में कदम बढ़ाया। कठिन समुद्री इलाकों में ड्रिलिंग की आधुनिक तकनीक विकसित कर नॉर्वे ने खुद को ऊर्जा उत्पादन में सबसे आगे पहुंचा दिया।

रोज निकलता है लाखों बैरल तेल और गैस

नॉर्वे अब दुनिया के प्रमुख ऊर्जा निर्यातकों में शामिल हो चुका है। यहां से हर दिन भारी मात्रा में तेल और गैस निकाली जाती है। यूरोप के कई बड़े देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए नॉर्वे पर निर्भर हैं। समुद्र के नीचे बिछी पाइपलाइनों के जरिए गैस सीधे दूसरे देशों तक पहुंचाई जाती है।

यूरोप का भरोसेमंद गैस सप्लायर

ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, बेल्जियम और पोलैंड समेत कई यूरोपीय देशों तक नॉर्वे गैस पहुंचाता है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद जब यूरोप में ऊर्जा संकट गहराया, तब नॉर्वे की अहमियत और ज्यादा बढ़ गई।

तेल से कमाई, फिर भविष्य के लिए बचत

नॉर्वे की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उसने तेल से होने वाली कमाई को सिर्फ खर्च नहीं किया। देश ने “ऑयल फंड” बनाया, जिसमें ऊर्जा सेक्टर से होने वाली आय जमा की जाती है। आज यह फंड दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड्स में गिना जाता है और इसकी वैल्यू ट्रिलियन डॉलर में पहुंच चुकी है।

अपनी मुद्रा, अपनी अलग पहचान

हालांकि नॉर्वे यूरोप में स्थित है, लेकिन उसने यूरोपीय यूनियन की सदस्यता नहीं ली। यही कारण है कि यहां यूरो नहीं, बल्कि नॉर्वेजियन क्रोन चलती है। देश ने अपनी आर्थिक नीतियों को भी काफी हद तक स्वतंत्र रखा है।

भारत के लिए क्यों अहम है नॉर्वे?

भारत और नॉर्वे के रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं। ऊर्जा, ग्रीन टेक्नोलॉजी, समुद्री इंजीनियरिंग और क्लीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है। पीएम मोदी की यात्रा को इसी साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

छोटा देश, लेकिन दुनिया में बड़ा दबदबा

कम आबादी और छोटे आकार के बावजूद नॉर्वे ने यह साबित कर दिया कि सही नीति, प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल और भविष्य की योजना किसी भी देश को आर्थिक महाशक्ति बना सकती है।