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The Scoopp

 

स्कंदमाता की आराधना से पाएं सुख-शांति, पांचवें दिन की पूजा का खास महत्व जानें

चैत्र नवरात्रि का पांचवां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित होता है, जिन्हें प्रेम, ममता और करुणा की देवी माना जाता है। इस दिन भक्त विशेष श्रद्धा के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं, क्योंकि मान्यता है कि मां अपने भक्तों के जीवन से दुख और तनाव को दूर कर उन्हें मानसिक शांति और सफलता का आशीर्वाद देती हैं। जो लोग संतान सुख, पारिवारिक खुशहाली और स्थिर जीवन की कामना करते हैं, उनके लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं और उनकी गोद में विराजमान स्कंद ही उनके नाम का आधार हैं। उनकी उपासना करने से न केवल जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि व्यक्ति को अपने कार्यों में सफलता भी मिलने लगती है। कई श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर पूरे विधि-विधान से पूजा करते हैं, जिससे उनके जीवन में नई संभावनाएं और प्रगति के रास्ते खुलते हैं।

ज्योतिष शास्त्र की दृष्टि से भी यह दिन विशेष फलदायी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा और गुरु ग्रह का प्रभाव अधिक रहता है, जिससे मन को स्थिरता मिलती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर होता है, उन्हें इस दिन मां स्कंदमाता की आराधना करने की सलाह दी जाती है। ऐसा करने से मानसिक तनाव कम होता है और भावनात्मक संतुलन बेहतर होता है।

ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों में आज भी यह विश्वास कायम है कि स्कंदमाता की पूजा करने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और करियर में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। इसी कारण कई घरों में इस दिन विशेष पूजन, भोग और आरती का आयोजन किया जाता है, ताकि मां की कृपा पूरे परिवार पर बनी रहे।