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हवारा की पैरोल पर राज्यपाल से मिले भगवंत मान, बीमार मां का दिया हवाला; कानून व्यवस्था संभालने का भरोसा

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बुधवार को राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से मुलाकात कर जेल में बंद जगतार सिंह हवारा को मानवीय आधार पर पैरोल दिए जाने का मुद्दा उठाया। मुख्यमंत्री ने हवारा की बीमार मां की स्थिति का हवाला देते हुए उन्हें 10 दिन की पैरोल देने की मांग की। इस मुलाकात के दौरान मान ने यह भरोसा भी दिलाया कि यदि हवारा को पैरोल दी जाती है तो पंजाब में कानून व्यवस्था की स्थिति को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री भगवंत मान बुधवार को राज्यपाल से मिलने के लिए राजभवन पहुंचे। मुलाकात का प्रमुख मुद्दा जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने से जुड़ा रहा। हवारा बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं और वर्तमान में तिहाड़ जेल में बंद हैं। मुख्यमंत्री की ओर से पहले भी इस संबंध में राज्यपाल को पत्र भेजा जा चुका है।

बीमार मां की देखभाल का दिया हवाला

मुख्यमंत्री ने हवारा को पैरोल देने के पीछे उनकी मां की खराब तबीयत को मुख्य आधार बनाया है। उनका कहना है कि हवारा की मां की तबीयत ठीक नहीं रहती और ऐसी स्थिति में बेटे का उनके पास रहना जरूरी है। इसी मानवीय पक्ष को देखते हुए मुख्यमंत्री ने 10 दिन की पैरोल दिए जाने की मांग की है।

मान ने राज्यपाल को लिखे पत्र में भी हवारा की मां की बीमारी का उल्लेख किया था। मुख्यमंत्री की दलील थी कि परिवार के इस कठिन समय में हवारा को अपनी मां की देखभाल करने का अवसर मिलना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने राज्यपाल से मामले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री की राज्यपाल से हुई मुलाकात को इसी मांग को आगे बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मान ने स्पष्ट तौर पर हवारा को सीमित अवधि के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति देने की बात रखी है। प्रस्तावित पैरोल की अवधि 10 दिन बताई गई है।

कानून व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने दिया भरोसा

जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने के मामले में पंजाब में कानून व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल के सामने यह बात रखी कि पैरोल मिलने की स्थिति में सरकार पंजाब में कानून व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने देगी।

मान ने राज्यपाल को भरोसा दिलाया कि सरकार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका कहना है कि मानवीय आधार पर पैरोल देने के फैसले के बावजूद राज्य में शांति और सुरक्षा की स्थिति पर किसी तरह का असर नहीं पड़ने दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री का यह रुख इस मामले में सरकार की ओर से संतुलित स्थिति रखने के तौर पर देखा जा रहा है। एक तरफ हवारा की मां की बीमारी और परिवार की स्थिति को मानवीय आधार बताया गया है, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े पहलू पर भी सरकार ने अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट की है।

पहले ही राज्यपाल को भेजा जा चुका है पत्र

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को इस संबंध में पत्र भी लिखा था। पत्र में उन्होंने जगतार सिंह हवारा को 10 दिन की पैरोल दिए जाने की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने इसमें हवारा की मां की खराब तबीयत को प्रमुख वजह बताया।

मान की ओर से कहा गया कि हवारा की मां बीमार रहती हैं और ऐसे समय में उन्हें अपने बेटे की जरूरत है। इसी वजह से मानवीय आधार पर पैरोल देने का अनुरोध किया गया। अब मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से व्यक्तिगत मुलाकात के दौरान भी इस मुद्दे को उठाया है।

इससे साफ है कि सरकार इस मामले को केवल पत्राचार तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि राज्यपाल के सामने सीधे तौर पर अपनी मांग रखना चाहती है। हालांकि पैरोल को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।

बेअंत सिंह हत्याकांड में उम्रकैद की सजा

जगतार सिंह हवारा बेअंत सिंह हत्याकांड मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनके पैरोल का मामला इसी आपराधिक मामले में मिली सजा की पृष्ठभूमि में सामने आया है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र और राज्यपाल के साथ मुलाकात में सजा के मामले को लेकर कोई बदलाव करने की मांग नहीं की है। उनकी मांग सीमित अवधि के लिए पैरोल देने की है, ताकि हवारा अपनी बीमार मां की देखभाल कर सकें।

यानी मौजूदा मांग का केंद्र उनकी सजा को खत्म करना या उसमें बदलाव करना नहीं, बल्कि मानवीय आधार पर अस्थायी रूप से जेल से बाहर आने की अनुमति देना है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए 10 दिनों की अवधि प्रस्तावित की है।

पंजाब की राजनीति में भी अहम मुद्दा

जगतार सिंह हवारा का नाम पंजाब की राजनीति और सिख समुदाय से जुड़े कई संवेदनशील मुद्दों के संदर्भ में सामने आता रहा है। ऐसे में उन्हें पैरोल दिए जाने का मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी नजर बनी हुई है।

मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा राज्यपाल के सामने यह मांग रखे जाने से मामले को एक बार फिर प्रमुखता मिली है। सरकार ने जहां मानवीय आधार पर हवारा की मां की स्थिति को महत्वपूर्ण बताया है, वहीं कानून व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की चिंता न होने देने का भरोसा भी दिया है।

मुख्यमंत्री का कहना है कि सरकार पंजाब में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएगी। इसी वजह से पैरोल के मुद्दे पर मानवीय पहलू और सार्वजनिक व्यवस्था, दोनों को साथ रखकर बात की गई है।

10 दिन की पैरोल पर जोर

मुख्यमंत्री की मांग स्थायी रिहाई की नहीं है। उन्होंने केवल 10 दिनों के लिए पैरोल दिए जाने का अनुरोध किया है। इस अवधि का उद्देश्य हवारा को अपनी बीमार मां के पास रहने और उनकी देखभाल करने का अवसर देना बताया गया है।

पैरोल की अवधि पूरी होने के बाद संबंधित नियमों के अनुसार आगे की प्रक्रिया लागू होगी। मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल को भेजे गए पत्र में भी 10 दिन की अवधि का स्पष्ट उल्लेख किया गया था।

राज्य सरकार की ओर से इस मांग को मानवीय आधार से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। मुख्यमंत्री ने मां की बीमारी को इस अनुरोध की मुख्य वजह बताते हुए राज्यपाल से सकारात्मक विचार करने की अपील की है।

राज्यपाल से मुलाकात के बाद बढ़ी चर्चा

बुधवार को मुख्यमंत्री और राज्यपाल की मुलाकात के बाद हवारा की पैरोल का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। मुख्यमंत्री ने सीधे राज्यपाल के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि मानवीय आधार पर हवारा को कुछ समय के लिए पैरोल दी जा सकती है।

इस मुलाकात में कानून व्यवस्था को लेकर सरकार की स्थिति भी स्पष्ट की गई। मान ने भरोसा दिलाया कि यदि पैरोल दी जाती है तो पंजाब में किसी भी तरह की कानून व्यवस्था संबंधी समस्या उत्पन्न नहीं होने दी जाएगी।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि हवारा की पैरोल संबंधी मांग पर आगे क्या फैसला होता है। मुख्यमंत्री की ओर से राज्यपाल के समक्ष 10 दिन की पैरोल का अनुरोध रखा गया है और इसके पीछे उनकी मां की बीमारी को आधार बनाया गया है।

मानवीय आधार पर फैसले की अपील

मुख्यमंत्री भगवंत मान का पूरा जोर इस मामले में मानवीय पहलू पर है। उन्होंने हवारा की मां की बीमारी को देखते हुए उन्हें अपने परिवार के साथ कुछ समय बिताने का अवसर देने की मांग की है। उनका कहना है कि मां की देखभाल के लिए हवारा को 10 दिन की पैरोल मिलनी चाहिए।

राज्यपाल से मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार कानून व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगी। इस तरह उन्होंने पैरोल की मांग के साथ-साथ सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सरकार की जिम्मेदारी सामने रखी।

फिलहाल हवारा तिहाड़ जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। उनकी मां की तबीयत को आधार बनाकर मुख्यमंत्री ने पैरोल का अनुरोध किया है। राज्यपाल को पहले भेजे गए पत्र के बाद अब मुख्यमंत्री की प्रत्यक्ष मुलाकात ने इस मांग को और प्रमुख बना दिया है।

आने वाले समय में इस अनुरोध पर संबंधित स्तर से निर्णय लिया जाना है। मुख्यमंत्री की ओर से स्पष्ट रूप से 10 दिन की पैरोल और मानवीय आधार पर विचार करने की मांग रखी गई है। साथ ही पंजाब में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने का आश्वासन भी दिया गया है।