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100 साल की पहेली खत्म! पानी के छिपे रहस्य ने वैज्ञानिकों को चौंकाया

दुनिया में सबसे आम दिखने वाला पदार्थ पानी दरअसल उतना साधारण नहीं है जितना हम समझते हैं। वर्षों से वैज्ञानिक इसके अनोखे व्यवहार को समझने की कोशिश कर रहे थे, और अब आखिरकार एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। स्वीडन की स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक ऐसे रहस्य से पर्दा उठाया है, जो करीब एक सदी से वैज्ञानिकों को उलझाए हुए था।

दो रूपों में मौजूद हो सकता है पानी

नई रिसर्च के मुताबिक, पानी सिर्फ एक ही तरह का तरल नहीं है, बल्कि यह दो अलग-अलग लिक्विड अवस्थाओं में भी मौजूद हो सकता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि बेहद कम तापमान पर ये दोनों रूप आपस में मिलते-जुलते दिखाई देते हैं। यही वह स्थिति है, जिसे ‘क्रिटिकल पॉइंट’ कहा जाता है जहां दोनों अवस्थाओं के बीच की सीमा लगभग खत्म हो जाती है।

कैसे हुआ इस रहस्य का खुलासा?

इस खोज के लिए वैज्ञानिकों ने अत्याधुनिक एक्स-रे लेजर तकनीक का सहारा लिया। दक्षिण कोरिया की एक प्रयोगशाला में पानी को सामान्य स्थिति से हटाकर करीब -63 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा किया गया, वह भी बिना उसे बर्फ में बदले। इस दौरान दबाव सामान्य से लगभग 1000 गुना ज्यादा रखा गया। बेहद तेज एक्स-रे पल्स की मदद से पानी की संरचना को उस क्षण कैद किया गया, जब वह जमने ही वाला था।

बर्फ पानी पर क्यों तैरती है?

पानी का व्यवहार बाकी तरल पदार्थों से बिल्कुल अलग है। आमतौर पर तरल पदार्थ ठंडे होने पर सिकुड़ते हैं और भारी हो जाते हैं, लेकिन पानी 4 डिग्री सेल्सियस पर सबसे अधिक घना होता है। इसके बाद तापमान घटने पर यह फैलने लगता है, जिसके कारण बर्फ हल्की हो जाती है और पानी के ऊपर तैरती है। यही अनोखा गुण वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से पहेली बना हुआ था।

क्या होता है ‘क्रिटिकल पॉइंट’?

वैज्ञानिकों के अनुसार, पानी का क्रिटिकल पॉइंट एक ऐसी अवस्था है जहां तापमान लगभग 374 डिग्री सेल्सियस और दबाव सामान्य वायुमंडल से करीब 218 गुना ज्यादा होता है। इस स्थिति में तरल और गैस के बीच का अंतर मिट जाता है। हालांकि, नई रिसर्च का फोकस उस छिपे हुए क्रिटिकल पॉइंट पर है, जो सुपरकूल्ड पानी के अंदर मौजूद रहता है।

वैज्ञानिकों ने क्या कहा?

स्टडी से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना है कि इस खोज ने दशकों पुरानी थ्योरी को सही साबित कर दिया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, क्रिटिकल पॉइंट के आसपास अणुओं की गति काफी धीमी हो जाती है और पानी के कई असामान्य गुण यहीं से पैदा होते हैं। कुछ वैज्ञानिकों ने इसकी तुलना ‘ब्लैक होल’ जैसी स्थिति से भी की है, जहां पहुंचने के बाद वापसी मुश्किल होती है।

जीवन से क्या है इसका कनेक्शन?

इस खोज ने एक और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, क्या पानी का यही खास व्यवहार जीवन के अस्तित्व से जुड़ा है? वैज्ञानिकों का मानना है कि पानी ही एक ऐसा सुपरक्रिटिकल तरल है, जिसमें जीवन पनपता है। ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी हो जाता है कि इसके ये गुण जीवविज्ञान, जलवायु और पृथ्वी के विकास पर कैसे असर डालते हैं।

आगे क्या होगा?

वैज्ञानिक अब इस दिशा में और गहराई से रिसर्च करना चाहते हैं ताकि यह समझा जा सके कि पानी के ये अनोखे गुण पृथ्वी और जीवन के विकास में किस तरह की भूमिका निभाते हैं। यह खोज भविष्य में केमिस्ट्री, क्लाइमेट साइंस और बायोलॉजी जैसे कई क्षेत्रों में नई दिशा दे सकती है। यह शोध सिर्फ पानी को समझने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन और प्रकृति की मूलभूत समझ को भी बदलने की क्षमता रखता है।