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दुनिया में बढ़ता मानसिक तनाव बना बड़ा खतरा, हर 43 सेकंड में जा रही एक जान

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां अब पूरी दुनिया के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान समय में दुनिया का लगभग हर आठवां व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से प्रभावित है। इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित 79वीं वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में मानसिक स्वास्थ्य को प्रमुख मुद्दों में शामिल किया गया।

युवाओं और महिलाओं पर ज्यादा असर

रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में एक अरब से अधिक लोग मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड महामारी के बाद हालात और ज्यादा खराब हुए हैं। खासतौर पर युवाओं में तनाव, अकेलापन और डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़े हैं। महिलाओं में एंग्जायटी और डिप्रेशन अधिक देखने को मिल रहा है, जबकि पुरुषों में नशे की लत और हिंसक व्यवहार की घटनाएं ज्यादा सामने आ रही हैं।

क्या है मेंटल डिसऑर्डर?

मेंटल डिसऑर्डर ऐसी स्थिति होती है, जो इंसान की सोच, व्यवहार और भावनाओं को प्रभावित करती है। इसके कई प्रकार होते हैं, जिनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी, बाइपोलर डिसऑर्डर, PTSD, स्किजोफ्रेनिया, सोशल फोबिया और ईटिंग डिसऑर्डर शामिल हैं। WHO और DSM-5 की रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा समय में डिप्रेशन और एंग्जायटी सबसे आम मानसिक बीमारियां बन चुकी हैं।

किन देशों में ज्यादा मामले?

WHO के आंकड़ों के मुताबिक अमेरिका क्षेत्र में मानसिक विकारों की दर सबसे ज्यादा 15.6 प्रतिशत दर्ज की गई है। इसके बाद यूरोप में 14.2 प्रतिशत और दक्षिण-पूर्व एशिया में 13.2 प्रतिशत मामले सामने आए हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पुर्तगाल में एंग्जायटी के मरीज सबसे ज्यादा हैं, जबकि डिप्रेशन के मामलों में सीरिया शीर्ष पर है।

आत्महत्या के आंकड़े डरा रहे

मेंटल हेल्थ संकट का सबसे गंभीर पहलू बढ़ती आत्महत्याएं हैं। मेडिकल जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित विश्लेषण के अनुसार हर साल करीब 7.4 लाख लोग सुसाइड कर रहे हैं। इसका मतलब है कि दुनिया में हर 43 सेकंड में एक व्यक्ति अपनी जान गंवा रहा है। 15 से 29 साल के युवाओं में आत्महत्या मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है।

मानसिक तनाव से बचने के उपाय

  • रोजाना पर्याप्त नींद लें और शरीर को एक्टिव रखें
  • योग, मेडिटेशन और एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करें
  • उदासी या तनाव महसूस होने पर अपने करीबी लोगों से खुलकर बात करें
  • लंबे समय तक एंग्जायटी या डिप्रेशन महसूस होने पर डॉक्टर या काउंसलर की मदद जरूर लें
  • सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम को सीमित रखें, ताकि मानसिक दबाव कम हो सके

(Photo : AI Generated)