ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। ईरान की ओर से 60 दिन बाद इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की योजना पर सऊदी अरब ने नाराजगी जाहिर की है। रियाद का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के जारी रहनी चाहिए।
सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की जरूरत नहीं है। उनके मुताबिक, संघर्ष से पहले इस समुद्री मार्ग से आवाजाही सुचारू रूप से चल रही थी और किसी नए टोल सिस्टम को लागू करना उचित नहीं होगा।
सऊदी ने कहा- पुरानी व्यवस्था ही बेहतर
एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि दो महीने बाद ईरान की ओर से लगाए जाने वाले समुद्री शुल्क को लेकर उनका क्या रुख है, तो फैसल बिन फरहान ने कहा कि होर्मुज का संचालन पहले ठीक तरीके से हो रहा था। जहाजों की सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़े मामलों में भी कोई बड़ी परेशानी नहीं थी।
उन्होंने कहा कि किसी भी संघर्ष के कारण ऐसी नई व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती, जो क्षेत्र के देशों पर थोपी जाए। सऊदी मंत्री ने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट को पहले की तरह खुले और स्वतंत्र समुद्री रास्ते के रूप में बनाए रखना चाहिए।
ईरान ने 60 दिन तक फ्री आवाजाही की बात कही
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि अमेरिका के साथ हुए MoU के तहत वह अगले 60 दिनों तक व्यावसायिक जहाजों को बिना शुल्क के सुरक्षित रास्ता उपलब्ध कराएगा। इसके बाद समुद्री सेवाओं और प्रबंधन के लिए चार्ज लेने की व्यवस्था पर विचार किया जाएगा। ईरान ने यह भी कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य उसके नियंत्रण वाला क्षेत्र है और यहां किसी बाहरी नौसैनिक मिशन की जरूरत नहीं है। तेहरान का कहना है कि समुद्री मार्ग की सुरक्षा और संचालन की जिम्मेदारी स्थानीय व्यवस्था के तहत ही होनी चाहिए।
MoU में होर्मुज को लेकर क्या है प्रावधान
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने अमेरिका के साथ हुए समझौते के दस्तावेज को सार्वजनिक किया है। इस 14 सूत्रीय समझौते में होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। दस्तावेज के अनुसार, शुरुआती दो महीनों तक जहाजों की आवाजाही बिना किसी शुल्क के जारी रहेगी। इसके बाद समुद्री सेवाओं के लिए संभावित शुल्क व्यवस्था तैयार की जा सकती है, जिसे ईरान और ओमान मिलकर संचालित करने की बात कही गई है।
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। ऐसे में यहां किसी भी नई व्यवस्था को लेकर क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ गई है।