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PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ बढ़ता गुस्सा: सेना की कार्रवाई से भड़के लोग, नेता ने दी सीमाएं खोलने की चेतावनी

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में इन दिनों हालात तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। रावलकोट समेत कई इलाकों में बड़ी संख्या में लोग पाकिस्तान सरकार और सेना की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस क्षेत्र के लोगों के साथ लंबे समय से भेदभाव किया जा रहा है और उनकी बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

रावलकोट के ईदगाह मैदान में जमा हुई भीड़ ने पाकिस्तान की सत्ता और सैन्य प्रतिष्ठान के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। प्रदर्शनकारियों ने खुले मंच से कहा कि PoJK के लोगों की आवाज को अब दबाया नहीं जा सकता। उनका आरोप है कि इस इलाके पर फैसले लेने वाले लोग स्थानीय जनता की समस्याओं को समझने के बजाय ताकत के दम पर विरोध को रोकना चाहते हैं।

रावलकोट से उठी आवाज ने बढ़ाई इस्लामाबाद की चिंता

PoJK में चल रहा आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रह गया है। हजारों लोगों की मौजूदगी वाले प्रदर्शनों ने पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र के संसाधनों का इस्तेमाल तो किया जा रहा है, लेकिन बदले में यहां के लोगों को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि बिजली, खाद्य सामग्री और आर्थिक अधिकारों को लेकर उनकी मांगों को लंबे समय से टाला जाता रहा है। इसी नाराजगी ने अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले लिया है।

कौन हैं सरदार अमन खान, जिनके बयान से मचा हड़कंप?

इस आंदोलन में सरदार अमन खान एक प्रमुख चेहरे के रूप में सामने आए हैं। वह PoJK में सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता और जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़े नेता माने जाते हैं। वह जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े प्रमुख आयोजकों में शामिल हैं, जो स्थानीय मुद्दों को लेकर आंदोलन चला रही है।

रावलकोट में एक बड़े जनसमूह को संबोधित करते हुए अमन खान ने पाकिस्तान प्रशासन को चेतावनी दी कि अगर लोगों की परेशानियों को दूर नहीं किया गया और जरूरी चीजों की सप्लाई को प्रभावित किया गया तो हालात और गंभीर हो सकते हैं।

उन्होंने संकेत दिया कि अगर क्षेत्र के लोगों को लगातार दबाव में रखा गया तो वे अपने भविष्य को लेकर नए विकल्पों पर विचार कर सकते हैं। उनके इस बयान को पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

सीमा खोलने वाली चेतावनी से बढ़ा तनाव

अमन खान के बयान का सबसे ज्यादा चर्चा वाला हिस्सा वह था जिसमें उन्होंने कहा कि अगर लोगों की मुश्किलें बढ़ती रहीं तो PoJK की सीमाओं को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। उनका इशारा भारत से जुड़े रिश्तों की ओर माना गया।

हालांकि पाकिस्तान सरकार की ओर से इस तरह के बयानों को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। प्रशासन आंदोलन को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि दबाव बढ़ाने से जनता का गुस्सा और बढ़ रहा है।

आंदोलन में हजारों लोग शामिल, सुरक्षा बलों पर लगे आरोप

PoJK में पिछले कई दिनों से चल रहे प्रदर्शनों में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल हो रहे हैं। महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों की भागीदारी ने इस आंदोलन को व्यापक रूप दे दिया है।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने आंदोलन को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में कई लोगों की मौत हुई और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।

स्थानीय नेताओं का आरोप है कि सरकार बातचीत के बजाय बल प्रयोग का रास्ता अपना रही है। वहीं प्रशासन की ओर से कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कही जाती रही है।

आखिर क्यों भड़का PoJK में लोगों का गुस्सा?

PoJK में नाराजगी के पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी शिकायत बिजली, खाद्य सामग्री और रोजगार से जुड़ी हुई है।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जिस इलाके में बड़ी मात्रा में जल संसाधन मौजूद हैं, वहीं के लोगों को महंगी बिजली और भारी बिलों का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि क्षेत्र में बनने वाली पनबिजली का फायदा दूसरे इलाकों को ज्यादा मिलता है, जबकि स्थानीय जनता को पर्याप्त राहत नहीं मिलती।

इसके अलावा आटे और गेहूं जैसी जरूरी चीजों की कीमतों को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोग लंबे समय से सब्सिडी और आर्थिक राहत की मांग करते रहे हैं।

सरकार पर वादे पूरे नहीं करने का आरोप

आंदोलनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान प्रशासन ने पहले उनकी मांगों को लेकर आश्वासन दिया था, लेकिन बाद में उन पर पूरी तरह अमल नहीं किया गया। इसी वजह से लोगों का भरोसा कमजोर हुआ और विरोध प्रदर्शन तेज होते गए।

JAAC का कहना है कि उनका आंदोलन आम लोगों के अधिकारों और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा हुआ है। संगठन लगातार सरकार से मांग कर रहा है कि जनता की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए।

पाकिस्तान के लिए बढ़ती राजनीतिक चुनौती

PoJK का मुद्दा पाकिस्तान के लिए संवेदनशील माना जाता है क्योंकि यह क्षेत्र लंबे समय से राजनीतिक और सुरक्षा दृष्टि से अहम रहा है। वहां बढ़ता जनअसंतोष अब पाकिस्तान सरकार और सेना के लिए नई चुनौती बनता जा रहा है।

रावलकोट से लेकर दूसरे इलाकों तक उठ रही आवाजें दिखा रही हैं कि स्थानीय स्तर पर नाराजगी काफी गहरी हो चुकी है। अगर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच समाधान नहीं निकलता है तो आने वाले समय में यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।

फिलहाल PoJK में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। एक तरफ प्रदर्शनकारी अपने अधिकारों और सुविधाओं की मांग को लेकर डटे हैं, वहीं पाकिस्तान प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि बातचीत का रास्ता खुलता है या फिर टकराव और बढ़ता है।