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तेहरान में उमड़ा जनसैलाब, खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच गूंजे बदले के नारे; ट्रम्प के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की अंतिम विदाई का कार्यक्रम शनिवार को राजधानी तेहरान में भारी भीड़ और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच जारी रहा। देशभर से लाखों लोग काले कपड़े पहनकर राजधानी पहुंचे और पारंपरिक शिया रीति-रिवाजों के अनुसार मातम मनाया। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने छाती पीटकर शोक व्यक्त किया, जबकि कई स्थानों पर अमेरिका विरोधी और बदले की मांग वाले नारे भी सुनाई दिए। पूरे शहर में माहौल बेहद भावुक होने के साथ-साथ राजनीतिक संदेशों से भी भरा नजर आया।

खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्मों की शुरुआत 3 जुलाई से हुई थी और यह कार्यक्रम 9 जुलाई तक अलग-अलग चरणों में जारी रहेगा। पहले दिन से ही तेहरान में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धांजलुओं का सिलसिला शुरू हो गया था। शनिवार को ग्रैंड मुसल्ला परिसर में सबसे बड़ा आयोजन हुआ, जहां लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। प्रशासन के अनुसार कार्यक्रम में शामिल होने वालों के लिए राजधानी में विशेष इंतजाम किए गए ताकि दूर-दराज से आने वाले लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।

अंतिम श्रद्धांजलि के लिए खामेनेई का ताबूत तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड मुसल्ला लाया गया, जहां धार्मिक नेताओं, सरकारी अधिकारियों, विदेशी प्रतिनिधिमंडलों और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। समारोह के दौरान उनके परिवार के कई सदस्य भी मौजूद रहे। रिपोर्टों के मुताबिक उनकी पत्नी, बेटी, दामाद और 14 महीने की पोती को भी अंतिम सम्मान दिया गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान धार्मिक प्रार्थनाएं और शोक सभाएं आयोजित होती रहीं।

शिया परंपरा के अनुसार हजारों लोगों ने काले वस्त्र पहनकर मातम मनाया। कई जगहों पर लोग छाती पीटते हुए दिखाई दिए, जबकि कुछ समूहों ने अमेरिका विरोधी नारे लगाए। भीड़ में मौजूद लोगों ने “खून का बदला खून” और “बदला” जैसे नारे भी लगाए। सुरक्षा एजेंसियां लगातार भीड़ पर नजर बनाए रहीं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। राजधानी के प्रमुख इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल और सैन्य टुकड़ियां तैनात की गईं।

तेहरान में सुरक्षा व्यवस्था को असाधारण स्तर पर पहुंचा दिया गया है। मुख्य सरकारी इमारतों, धार्मिक स्थलों, प्रमुख चौकों और सड़कों पर सेना तथा पुलिस के जवान लगातार गश्त कर रहे हैं। शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर सैन्य वाहनों की तैनाती की गई है। प्रवेश मार्गों पर जांच चौकियां बनाई गई हैं और आने-जाने वाले लोगों की कड़ी निगरानी की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि इतने बड़े आयोजन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए व्यापक सुरक्षा योजना लागू की गई है।

सरकार ने अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले आम लोगों की सुविधा के लिए कई विशेष व्यवस्थाएं भी की हैं। राजधानी की मेट्रो सेवा और सरकारी बसों में लोगों को निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। इसके अलावा विभिन्न होटलों में ठहरने के किराए में 50 प्रतिशत तक की छूट देने की घोषणा की गई। जिन लोगों को होटल नहीं मिल सके, उनके लिए स्कूलों, मस्जिदों और अन्य सार्वजनिक भवनों में अस्थायी ठहरने की व्यवस्था की गई। दूसरे शहरों से आने वाले श्रद्धांजलुओं के लिए विशेष ट्रेनें और अतिरिक्त परिवहन सेवाएं भी शुरू की गईं।

विदेशी प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी भी इस कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता रही। शुक्रवार को आयोजित आधिकारिक श्रद्धांजलि समारोह में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। हालांकि कई बड़े देशों के शीर्ष नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। रूस, चीन, भारत और तुर्किये जैसे देशों ने अपने सर्वोच्च नेतृत्व की बजाय निचले स्तर के प्रतिनिधिमंडल भेजे। इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में भी चर्चा होती रही कि विभिन्न देशों ने इस कार्यक्रम में अपनी भागीदारी का स्तर सोच-समझकर तय किया।

अंतिम यात्रा का कार्यक्रम कई चरणों में आयोजित किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार तेहरान से शुरू होने वाली यह यात्रा आगे कोम पहुंचेगी। इसके बाद धार्मिक महत्व वाले इराक के कर्बला और नजफ शहरों से गुजरने की योजना है। अंत में 9 जुलाई को मशहद में खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। इस पूरे कार्यक्रम को शिया धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आयोजित किया जा रहा है और लाखों लोगों के अलग-अलग चरणों में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है।

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का बयान भी चर्चा का विषय बन गया। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने मानवीय आधार पर ईरान को खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि के बाद ईरान को अमेरिका द्वारा रखी गई शर्तों पर आगे बढ़ना होगा। ट्रम्प के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।

दूसरी ओर, मध्य पूर्व में कूटनीतिक गतिविधियां भी तेज हो गई हैं। कतर की ओर से संकेत दिए गए हैं कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का अगला दौर शुरू हो सकता है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवादों को लेकर एक बार फिर वार्ता की कोशिश की जाएगी। हालांकि अभी तक किसी संभावित बैठक की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गई है।

इसी दौरान ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी सख्त रुख बनाए रखा है। तेहरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद परमाणु मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई बहस शुरू हो गई है। कई देशों का मानना है कि निरीक्षण की अनुमति न मिलने से भविष्य की वार्ताओं पर असर पड़ सकता है, जबकि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा का हवाला देकर इस फैसले को उचित बता रहा है।

खामेनेई की अंतिम विदाई केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि ईरान की आंतरिक राजनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। राजधानी में उमड़ी भारी भीड़ ने जहां अपने नेता के प्रति सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का प्रदर्शन किया, वहीं कार्यक्रम के दौरान लगे नारों ने क्षेत्रीय तनाव और अमेरिका के प्रति गुस्से को भी उजागर किया। आने वाले दिनों में अंतिम संस्कार की शेष रस्में पूरी होने के बाद दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिका-ईरान संबंध किस दिशा में आगे बढ़ते हैं और प्रस्तावित कूटनीतिक वार्ताओं से कोई सकारात्मक परिणाम निकलता है या नहीं।